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    Published On : Mon, Nov 5th, 2018

    किसान धीरे-धीरे कॉरपोरेट घरानों के हाथों अपनी खेती गंवाते जा रहे

    नाबार्ड भी नकद मुंबई में बांट रहा है जहां खेती-किसानी है ही नहीं

    नागपुर: केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना राफेल से भी बड़ा घोटाला है.‘किसान धीरे-धीरे कॉरपोरेट घरानों के हाथों अपनी खेती गंवाते जा रहे हैं. जबकि महाराष्ट्र में 55 प्रतिशत आबादी ग्रामीण है. राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) भी नकद मुंबई में बांट रहा है जहां खेती-किसानी है ही नहीं.

    29 और 30 नवंबर को देश के किसानों के हितार्थ आॅल इंडिया किसान संघर्ष कोआॅर्डिनेशन कमेटी द्वारा संसद मार्च का आयोजन किया गया हैं,आयोजक नेतृत्वकर्ताओं की मांग हैं कि स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करने के लिए कम से कम तीन दिन तक बहस की जाए. अगर जीएसटी के लिए आधी रात को संसद बुलाई जा सकती है तो किसानों के मुद्दों पर सदन में बहस क्यों नहीं की जाती.

    आयोजकों की ओर से कहा गया कि वर्तमान सरकार की नीतियां किसान विरोधी हैं. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना राफेल घोटाले से भी बड़ा घोटाला है. रिलायंस और एस्सार जैसी चुनिंदा कंपनियों को फसल बीमा देने का काम दिया गया है.’

    तबरीबन 2.80 लाख किसानों ने अपने खेतों में सोया उगाया था. एक ज़िले के किसानों ने 19.2 करोड़ रुपये का प्रीमियम अदा किया. इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार की ओर से 77-77 करोड़ रुपये यानी कुल 173 करोड़ रुपये बीमा के लिए रिलायंस इंश्योरेंस को दिए जाते हैं.’

    किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई और बीमा कंपनी ने किसानों को पैसे का भुगतान किया. एक ज़िले में रिलायंस ने 30 करोड़ रुपये दिए, जिससे बिना एक पैसा लगाए उसे कुल 143 करोड़ रुपये का लाभ मिला. अब इस हिसाब से हर ज़िले को किए गए भुगतान और कंपनी को हुए लाभ का अनुमान लगाया जा सकता है.’

    पिछले 20 सालों में हर दिन दो हज़ार किसान खेती छोड़ रहे हैं. ऐसे किसानों की संख्या लगातार घट रही है जिनकी अपनी खेतीहर ज़मीन हुआ करती थी और ऐसे किसानों की संख्या बढ़ रही है जो किराये पर ज़मीन लेकर खेती कर रहे हैं. इन किरायेदार किसानों में 80 प्रतिशत क़र्ज़ में डूबे हुए हैं.

    वर्तमान सरकार किसान आत्महत्या से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक नहीं करना चाहती. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार पिछले बीस साल यानी 1995 से 2015 के बीच 3.10 लाख किसानों ने आत्महत्या की. पिछले दो साल से किसान आत्महत्या के आंकड़ों को जारी नहीं किया जा रहा है.


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