Published On : Fri, May 15th, 2020

कोरोना पर निगाहें, चुनाव पर निशाना !

खाली सियासी मैदान को भरने की कोशिश जारी

गोंदिया/भंडारा : चुनाव आते है, जाते है.. पार्टियां बनती है, बिगड़ती है.. नेता जीतते है, हारते है लेकिन सही मायने में वहीं नेता राजनीति की लंबी पारी खेल सकता है जो हार कर भी हार स्वीकार ना करें? और हालात से लड़ने के लिए फिर उठ खड़ा हो।

जी हां, हम बात कर रहे है राज्यसभा सदस्य प्रफुल पटेल की जिन्होंने गोंदिया-भंडारा जिले की जनता से अपनी हार की सारी कड़वाहट भूलकर अब नजदीकीयां बढ़ानी शुरू कर दी है, इसके क्या मायने निकाले जाएं? कहीं ऐसा तो नहीं कि जिले की राजनीति में दोबारा स्थापित होने के तमाम विकल्प तलाशे जा रहे है और खाली सियासी मैदान को भरने की कोशिश जारी है या फिर यूं कहें कि, कोरोना पर निगाहें और आने वाले जिला परिषद चुनाव पर है निशाना..!

बहरहाल बात चाहे जो भी हो पर एक वैकल्पिक राजनीतिक नेतृत्व देने वाले सबसे बड़े नेता के तौर पर उभरे है प्रफुल पटेल..।

जनता को शासक नहीं सेवक चाहिए?
बीते ६ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के राजनीति की दशा और दिशा ही बदल दी है। उनका सादगी भरा और सरल अंदाज जैसे- कभी खुद को प्रधान सेवक तो कभी चौकीदार कहना? यह जनता के दिलों को छू गया और वे लोकप्रिय होते चले गए तथा उनकी पापुलैरिटी का ग्राफ सर्वोच्च शिखर पर पहुंच गया। मोदीजी के सरल करिश्माई व्यक्तित्व की नकल (कॉपी) दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने की और वे दोबारा सत्ता में लौटे। अब देश के कई नेताओं ने मोदीजी के सादगीपूर्ण अंदाज को अपनाना शुरू कर दिया है।


प्रफुल पटेल के रूख में भी आया बदलाव
बदलते हुए हालात को देख अपने रूख में प्रफुल पटेल ने भी बदलाव लाया है और उनकी कोशिशें सफल हो गई लगती है? जो प्रफुल पटेल कभी घमंड और अंहकार में अपने कुर्ते की अस्तीन चढ़ाते नजर आते थे, उनकी बातों से गुरूर झलकता था, वक्त और हालात ने उन्हें भी राजनीति का नया पाठ सिखा दिया है कि, जनता को शासक नहीं सेवक चाहिए?

लिहाजा गोंदिया-भंडारा जिले की राजनीति में दोबारा स्थापित होेने के लिए प्रफुल पटेल इन दिनों तमाम विकल्प तलाश रहे है।

हालांकि केंद्र में भाजपा को स्पष्ट बहुमत प्राप्त है, चुनाव अभी ४ वर्ष दूर है लेकिन नाना पटोले के लोकसभा के चुनाव रणभूमि से हटने के बाद खाली सियासी मैदान को भरने की कोशिशें जारी है। क्या एैसी कोशिशों से जिले की राजनीति में परिवर्तन लाया जा सकता है? जानकारों का मानना है अभी किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी?

आगामी 2 माह मैं जिला परिषद के चुनाव होने हैं इसमें गोंदिया- भंडारा से प्रफुल पटेल कितना जन समर्थन जुटा पाते है, यह देखना दिलचस्प होगा?

राजनीति को बदलने में मदद कर रहा है कोरोना
कोरोना वायरस के खतरे ने जब देश पर अपना शिंकजा कसा था उस समय जिले की जनता अपने घरों में कैद थी तथा लोकसभा सांसद सुनील मेंढे और जिले के तमाम विधायक अपने दफ्तरों से ही हालात पर नजर बनाए हुए थे। एैसे मुश्किल वक्त में लॉकडाउन की सख्ती होने के बावजूद प्रफुल पटेल ने कार से गोंदिया आने का निश्‍चय किया तथा रास्ते में तमाम रेड और ऑरेंज जोन को क्रॉस करते हुए वे गोंदिया- भंडारा जिले की जनता का दर्द जानने पहुंचे तथा मौजूदा हालात पर आला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की जिसके बाद गणेशनगर का रास्ता आम लोगों की आवाजाही के लिए खुला तथा पहले सप्ताह में ३ दिन हॉफ डे मार्केट ओपन हुआ फिर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उपमुख्यमंत्री अजितदादा पवार, पालकमंत्री अनिल देशमुख, राज्य के चीफ सेक्रेटरी अजोय मेहता, विभागीय आयुक्त नागपुर तथा गोंदिया जिलाधिकारी डॉ. कादंबरी बलकवड़े से सेंट्रल गवर्नमेंट की गाइडलाइन के मुताबिक ग्रीन जोन के दिशा -निर्देशों के पालन का अनुरोध करते हुए गोंदिया के व्यवसाय को सहूलियतें देने की अपील की गई जिसके बाद मार्केट को सप्ताह के सातों दिन खोलने की अनुमति मिली और इस तरह एक वैकल्पिक राजनीतिक नेतृत्व देने वाले सबसे बड़े नेता के तौर पर उभरे है प्रफुल पटेल।

घर-घर राशन किट बांटे, लॉकडाउन में फंसे लोगों को घर पहुंचाने की कवायद तेज

गोंदिया-भंडारा जिले के बेहतरी के लिए प्रफुल पटेल का दिल धड़कता है। आपदा और कोरोना महामारी के बीच जनता के साथ सीधा संवाद कायम करने का प्रयास करते हुए दोनों जिलों के १५ तहसीलों के वे गरीब-देहाड़ी मजदूर जिनका तालाबंदी में रोजगार छिन गया, एैसी मुश्किल घड़ी में सांसद प्रफुल पटेल ने अपने NCP पार्टी कार्यकर्ताओं को इकठ्ठा करते हुए अप्रैल के प्रथम सप्ताह से ही घर-घर जरूरी जीवनावश्यक खाद्य सामग्री (राशन किट) का निःशुल्क वितरण करते हुए गरीबों का दिल जीता।

राष्ट्रवादी कांग्रेस की इस सेवा का असर यह हुआ कि, विरोधी दलों के नेता काफी कमजोर हो गए है। प्रफुल पटेल के लिए यह महामारी चुनौती थी, जिसको उन्होंने अवसर में बदला है और अब एैसा सुनहरा मौका लेकर वह आई है जिससे वह खुद को विषम परिस्थितियों के बीच बेहतर साबित कर रहे है और अब देश के अन्य राज्यों के शहर और महानगरों में फंसे गोंदिया-भंडारा जिले के नागरिकों को वह निःशुल्क बस सेवा तथा ई-पास उपलब्ध कराकर उनके गृहग्राम पहुंचाने की कवायद में जुटे है। अब तक दर्जन भर से अधिक बसें विभिन्न शहरों से नागरिकों को लेकर गोंदिया-भंडारा पहुंच चुकी है तथा यह सिलसिला बदस्तूर जारी है।

निश्‍चित तौर पर आने वाले जिला परिषद चुनाव में यह मुद्दा चुनावी मंच से गूंजेगा और इसका सियासी फायदा प्रफुल पटेल की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस को होता दिखाई दे रहा है।

रवि आर्य