Published On : Wed, Aug 28th, 2019

भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और मिहान में विकास कार्य के लिए 992 करोड़ रुपये के बढे हुए निधि को कैबिनेट की मंजूरी

नागपुर: नागपुर के मिहान प्रोजेक्ट में भूमिअधिग्रहण करने और विकास कार्य के साथ ही पुनर्वसन के लिए महाराष्ट्र एयरपोर्ट विकास कंपनीने पेश किए 992.9 करोड़ के खर्च पर 28 अगस्त को राज्य मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है. इससे पहले 1508 करोड़ रुपए की मंजूरी शासन ने दी थी. अब कुल 2500 करोड़ रुपए खर्च के कारण इस प्रोजेक्ट का काम तेजी से होगा. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा लिए गए सकारत्मक निर्णय के कारण और पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के लगातार प्रयास के कारण ही यह बढ़ा हुआ निधि मंजूर हुआ है.

मिहान प्रकल्पग्रस्तो के पुनर्वसन के लिए पहले 644 करोड़ रुपए की प्रशासकीय मान्यता शासन ने दी थी. उसके बाद 28 अगस्त को 235.83 के बढे हुए निधि को मंजूरी मिली है. दीवानी न्यायलय के बढे नुक्सान भरपाई के बारे में कलम 18 के अनुसार दाखिल हुए दावों के लिए 500 करोड़ रुपए का बड़ा हुआ निधि उपलब्ध होनेवाला है.

इसके साथ ही दीवानी न्यायलय के बढे हुए नुक्सान भरपाई के लिए कलम 28 के अनुसार आनेवाले 95 करोड़ रुपए के अतिरिक्त खर्च को भी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है. इसके साथ प्रकल्पग्रस्तो के भूमिअधिग्रहण के लिए 111.98 करोड़ रुपए को मंजूरी दी है. भारतीय वायुदल के मौजा जयताला स्थित पोच सड़क निर्माण के लिए 50 करोड़ रुपए का निधि मिलेगा. उस रकम का और प्रोजेक्ट खर्च पर 10 प्रतिशत बढ़त पकड़कर और मानकर मिलनेवाली रकम 99.28 करोड़ रुपए का 992 करोड़ रुपए में समावेश है. अब तक सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 2500 करोड़ रुपए को मंजूरी दी है. भूमि अधिग्रहण के मामले में, 55 और 276 मामलों को धन की कमी के कारण इसे पूरा नहीं किया गया था.

न्यायलय के परिणाम के अनुसार, धारा 18 के अनुसार, 545 मामलों में से, 214 मामलों में 117 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. बढ़ी हुई मुआवजा राशि की गणना 164 मामलों में जिला कार्यालय के माध्यम से की गई है. यह राशि 150 करोड़ है. शेष मामलों में और साथ ही न्यायालय में लंबित मामलों में, राशि लगभग 500 करोड़ हो जाएगी.

पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने खुद परियोजना अधिकारियों और जिला प्रशासन के संबंधित अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक की. उन्होंने परियोजना पीड़ितों के साथ पुनर्वास क्षेत्र का भी दौरा किया. यहाँ यह उल्लेखनीय है कि परियोजना पीड़ितों की समस्याओं और मांगों को वास्तविक रूप से सुना गया और उन्होंने सरकार तक पहुँचकर अधिकतम व्यय को स्वीकृत करने का प्रयास किया.