
नागपुर – कभी जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने के बाद नागरिकों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता था, लेकिन अब यही प्रमाणपत्र हासिल करना लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए बड़ी संख्या में आवेदन लंबित पड़े हैं और कई नागरिकों को प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए तीन से चार महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है।
मनपा और जिला स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के करीब 7,900 आवेदन लंबित बताए जा रहे हैं। इनमें जिला स्तर पर करीब 3,400, जबकि मनपा मुख्यालय में जून से अब तक 4,500 से अधिक आवेदन लंबित हैं। अधिकारियों के अनुसार, लंबित मामलों की बड़ी संख्या वर्ष 2016 से पहले के जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड से संबंधित है।
एक लॉगिन पर हजारों आवेदनों का बोझ
प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) पर उपलब्ध केवल एक लॉगिन सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया है। 2016 से पहले के रिकॉर्ड की प्रक्रिया के लिए मनपा मुख्यालय में स्वास्थ्य अधिकारी को फिलहाल केवल एक सीआरएस लॉगिन उपलब्ध है। इसी कारण आवेदनों के सत्यापन, अनुमोदन और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।
भारतीय महापंजीयक (रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया) कार्यालय की ओर से 8 जून 2026 को जारी आदेश के बाद 2016 से पहले के रिकॉर्ड के लिए जिला स्तर पर अनुमोदन अनिवार्य किया गया है। इसके बाद लंबित आवेदनों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
आयुक्त ने ली समीक्षा बैठक
बढ़ती समस्या को देखते हुए मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर ने अधिकारियों के साथ बैठक लेकर पूरे मामले की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भारतीय महापंजीयक कार्यालय को पत्र भेजकर अतिरिक्त सीआरएस लॉगिन उपलब्ध कराने की मांग करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नागरिकों को जल्द से जल्द प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के लिए लंबित आवेदनों का निपटारा तेज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मनपा के एक अधिकारी के अनुसार, अतिरिक्त सीआरएस लॉगिन की मांग करीब दो महीने पहले ही राज्य के जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिकारियों से की गई थी, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
रोज आते हैं 1,500 से 2,000 आवेदन
मनपा के पास हर महीने जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र के करीब 1,500 से 2,000 आवेदन आते हैं। मनपा के पास वर्ष 1910 से अब तक के जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। वर्ष 1910 से 2015 तक के पुराने रिकॉर्ड मनपा मुख्यालय में रखे गए हैं।
पुराने रिकॉर्ड की जरूरत केवल नागपुर के नागरिकों को ही नहीं होती, बल्कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों के लोग भी पुराने जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड प्राप्त करने के लिए मनपा में आवेदन करते हैं।
जोन कार्यालयों से जारी होते हैं नए रिकॉर्ड
वर्ष 2016 और उसके बाद के जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड के प्रमाणपत्र मनपा के जोनल कार्यालयों के माध्यम से जारी किए जाते हैं। वहीं 2016 से पहले के रिकॉर्ड की प्रक्रिया जिला स्तर पर होने के कारण इन आवेदनों के निपटारे में अधिक समय लग रहा है।
जिला स्वास्थ्य विभाग पर भी बढ़ा दबाव
जिला स्वास्थ्य विभाग को मनपा, 29 नगर परिषदों और नगर पंचायतों, एक कैंटोनमेंट बोर्ड तथा 761 ग्राम पंचायतों और गांवों से रोजाना करीब 400 आवेदन प्राप्त होते हैं।
2016 से पहले के जन्म-मृत्यु पंजीकरण के अलावा इसी जिला स्तर के सीआरएस लॉगिन का इस्तेमाल विलंबित पंजीकरण, रजिस्ट्रार के मोबाइल नंबर अपडेट करने और आधार प्रमाणीकरण जैसे अन्य कार्यों के लिए भी किया जाता है। ऐसे में एक ही लॉगिन पर कई तरह की जिम्मेदारियां होने से काम का दबाव और बढ़ गया है।
अधिकारियों के अनुसार, जिला स्तर पर प्रतिदिन करीब 400 आवेदन प्राप्त होने के बावजूद लगभग 100 आवेदनों की ही प्रक्रिया पूरी हो पाती है। इससे लंबित आवेदनों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है और नागरिकों को अपने जरूरी दस्तावेज हासिल करने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है।
प्रमाणपत्र के लिए नागरिकों की बढ़ रही परेशानी
जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र कई सरकारी तथा कानूनी प्रक्रियाओं में आवश्यक दस्तावेज होते हैं। ऐसे में प्रमाणपत्र जारी होने में महीनों की देरी से नागरिकों को अन्य कामों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। अब अतिरिक्त सीआरएस लॉगिन उपलब्ध होने और लंबित आवेदनों के तेजी से निपटारे पर नागरिकों की नजर है।



