Published On : Sat, Aug 10th, 2019

बेजुबानों लोगों की जुबान थे उमेशबाबू चौबे – वरिष्ठ पत्रकार एस.एन.विनोद

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नागपुर: उमेशचौबे के उन कार्यो को याद करना होगा जो उन्होंने पत्रकारिता और समाज के लिए किए है. वे शहर के बेजुबानों की जुबान थे. पत्रकारिता और सामाजिक कार्य में वे हमेशा अग्रणी रहे है.वे सर्वमान्य पत्रकार थे. यह शब्द शहर के वरिष्ठ पत्रकार एस.एन.विनोद ने उमेशबाबू के लिए कहे. वे शुक्रवार को तिलक पत्रकार भवन में आयोजित स्व.उमेशबाबू चौबे मित्र परिवार की ओर से आयोजित उनके प्रथम पुण्यस्मरण में कहे. इस दौरान प्रमुख रूप से विधायक डॉ. मिलिंद माने, कृष्णा इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडीकल साइंसेज के कुलपति डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप मैत्रे, गिरीश गांधी, कृषि विद्यापीठ के पूर्व कुलगुरु शरद निंबालकर समेत अन्य लोग मौजूद थे. इस दौरान एस.एन.विनोद ने गोदी मीडिया पर भी जमकर निशाना साधा. उन्होने कहा की आज पत्रकार की स्थिति वैसी ही है जैसे किसी संदिग्ध राजनीतिज्ञ की. कई रूप से हमें गलत जानकारी दी जा रही है. सच्ची किसी खबर को जानने के लिए हमें एक नहीं कई अखबारों को देखना पड़ता है. उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी को बड़े टीवी चैनलसे निकालने की भी आलोचना की. रविश कुमार को मिले रेमन मैगससे पुरस्कार मिलने पर उन्होंने कहा की उन्हें यह पुरस्कार विशुद्ध पत्रकारिता के लिए दिया गया है. पत्रकार को इस दौर में दबाने के लिए साम दाम दंड भेद की निति अपनाई जा रही है. पत्रकार सरकारी वेबसाइट से जानकारी निकालकर भी उसके आधारित न्यूस नहीं डाल पा रहे है. उन्होंने कहा की अभी से तानाशाही की जमींन तैयार की जा रही है. उमेश चौबे पर उन्होंने कहा की चंद्रपुर में एक पीड़ित कर्मी को उन्होंने न्याय दिलाया था. उन्होंने स्वार्थ, लालच और प्रलोभन के बिना पत्रकारिता की है. उन्होंने युवा पत्रकारों को संदेश दिया है की पत्रकारिता करे लेकिन गोदी मीडिया वाली पत्रकारिता न करे.

इस दौरान कृषि विद्यापीठ नागपुर के पूर्व कुलगुरु डॉ. शरद निंबालकर ने कहा की उमेशबाबू को सुख की अपेक्षा नहीं थी. वे किसी भी व्यक्ति की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे. उनके प्रयत्नों के कारण ही आज शहर का महाराजबाग ज़ू बचा हुआ है. इस जमींन को लेकर कई बड़ी बड़ी लॉबिया लगी हुई थी. लेकिन उमेशबाबू ने उनके साथ मिलकर इस जमींन को मुक्त कराया.

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डॉ. मिलिंद माने ने इस समय कहा की जब वे सामजिक कार्य करते थे तो उमेशबाबू उनके दवाखाने में आते थे.अंधश्रद्धा निर्मूलन में भी उनका काफी योगदान रहा है. उन्होंने कहा की अंधश्रद्धा के कारण ही देश की प्रगति रुकी हुई है. चौबे ने वृद्धाश्रम और दिव्यांगों के लिए उन्होंने काफी कार्य किया है. माने ने एक अनुभव बताते हुए कहा की एक बार मंच पर वे मेरे साथ बैठे थे. उसी दौरान उनका बैलेंस बिगड़ा और वे करीब 8 फीट की ऊंचाई से गिरनेवाले थे. उसी समय माने से उनको पकड़ लिया. जिसके कारण वे गंभीर रूप से जख्मी होने से बच गए. माने ने भी आज की मीडिया पर सवाल उठाए है. उन्होंने बताया की उन्होंने कई महीनों से टीवी चैनल देखना छोड़ दिया है. सच्ची खबर पता नहीं चल पा रही है.

इस दौरान डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा ने कहा की नागपुर जिन चीजों के लिए जाना जाता उनमे से एक संतरा है. लेकिन आनेवाले दिनों में संतरा लोगों को याद रहे न रहे लेकिन उमेशबाबू चौबे हमेशा याद रहेंगे. उन्होंने कहा की वे सौभायग्यशाली है की उन्हें भी उनका मार्गदर्शन मिला है. विदर्भ की सारी जानकारियां उन्हें थी. उनकी जानकारियां हासिल कर कर के कई लोगों ने पीएचडी कर ली लेकिन कभी भी उमेशबाबू का एहसान नहीं माना. उन्होंने कहा की हमने गांधी को नहीं देखा है लेकिन गांधी कैसे रहे होंगे यह उमेशबाबू को देखकर पता चलता था.

कार्यक्रम के अध्यक्ष गिरीश गांधी ने कहा की उन्होंने हमेशा उपेक्षित लोगों के लिए कार्य किया है. उन्होंने मनपा में स्थायी समिति अध्यक्ष रहते हुए कभी भी भ्रष्टाचार नहीं किया था. इस प्रकार का जीवन जीना काफी कठिन होता है. जिस प्रकार से उन्होंने जीवन जिया है. उनकी परिस्थिति ख़राब होने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दी.

इस कार्यक्रम में प्रयास संस्था के अक्षम बच्चों की ओर से गीत प्रस्तुति देकर उमेशबाबू को याद किया गया. इस कार्यक्रम में बड़ी तादाद में उनके समर्थक और उनको चाहनेवाले लोग मौजूद थे.

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