Published On : Tue, Jun 23rd, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

दो साल 8 माह से जेल में बंद हत्या कांड के दो आरोपियों को हाईकोर्ट से जमानत

ट्रायल में देरी को माना आधार, 73 गवाहों में से अब तक केवल 2 की हुई गवाही | भंडारा के चर्चित नईम शेख हत्याकांड में नागपुर खंडपीठ का महत्वपूर्ण फैसला
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नागपुर  – भंडारा जिले के तुमसर तहसील अंतर्गत गोबरवाही पुलिस थाना क्षेत्र में वर्ष 2023 में हुए चर्चित नईम सिराज शेख हत्याकांड मामले में मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों सतीश चंदन दहात और सचिन भाऊराव भोयर को सशर्त जमानत मंजूर कर दी है। न्यायमूर्ति एम. एम. नेरलिकर ने 17 जून 2026 को यह आदेश पारित किया।

अदालत ने माना कि दोनों आरोपी पिछले दो वर्ष आठ माह से अधिक समय से जेल में बंद हैं, जबकि मामले में अब तक केवल दो गवाहों की ही गवाही दर्ज हो सकी है। ऐसे में संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत मिलने वाले त्वरित सुनवाई (Speedy Trial) के अधिकार का प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है।

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क्या है पूरा मामला ?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 25 सितंबर 2023 को नईम सिराज शेख अपने परिचितों के साथ मैंगनीज के नमूनों की जांच के लिए एक सफेद क्रेटा वाहन से निकला था। शाम करीब 5 बजे गोबरवाही रेलवे फाटक के पास रेलवे गेट बंद होने के कारण वाहन रुका हुआ था।

इसी दौरान एक सफेद टवेरा वाहन वहां पहुंचा। आरोप है कि वाहन से उतरे सतीश दहात और सचिन भोयर ने नईम शेख पर हमला किया। सतीश दहात ने कथित रूप से गोली चलाई, जबकि सचिन भोयर ने कार का शीशा तोड़ा। इसके बाद अन्य आरोपियों ने नईम को वाहन से बाहर निकालकर चाकू से हमला किया, जिसमें उसकी मौत हो गई।

इस घटना के आधार पर गोबरवाही पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 291/2023 दर्ज किया गया था।

गंभीर धाराओं के तहत दर्ज है मामला

सतीश दहात के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 सहित हत्या, आपराधिक साजिश, साक्ष्य नष्ट करने, गैरकानूनी जमावड़ा, आर्म्स एक्ट, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम तथा मकोका (MCOCA) की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं।

वहीं सचिन भोयर के खिलाफ हत्या, साजिश, साक्ष्य नष्ट करने, आर्म्स एक्ट और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

बचाव पक्ष की दलील

आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस. के. मिश्रा तथा अधिवक्ता पी. डी. शर्मा ने अदालत को बताया कि दोनों आरोपी सितंबर 2023 से जेल में हैं। चार्जशीट फरवरी 2024 में दाखिल हुई और दिसंबर 2024 में आरोप तय हुए, लेकिन इसके बाद भी ट्रायल में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई।

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले में 73 गवाहों की सूची है, लेकिन लगभग तीन वर्ष में केवल दो गवाहों की ही जांच हो पाई है, जिससे यह स्पष्ट है कि मुकदमे के जल्द समाप्त होने की संभावना नहीं है।

राज्य सरकार ने किया विरोध

सरकारी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं लोक अभियोजक डी. वी. चौहान ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। मामले में कुल 16 आरोपी हैं और रिकॉर्ड भी काफी विस्तृत है, इसलिए सुनवाई में समय लगना स्वाभाविक है।

अभियोजन ने यह भी कहा कि कई बार आरोपियों की ओर से दायर जमानत याचिकाओं और स्थगन की मांग के कारण भी सुनवाई प्रभावित हुई है।

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट से प्राप्त विस्तृत रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद पाया कि सुनवाई में देरी के लिए केवल एक पक्ष जिम्मेदार नहीं है। अदालत ने कहा कि विभिन्न कारणों से कार्यवाही टलती रही और सभी पक्ष किसी न किसी स्तर पर इसके लिए जिम्मेदार रहे।

हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान दोनों आवेदकों की ओर से ऐसी कोई स्थिति सामने नहीं आई, जिससे यह कहा जा सके कि केवल उन्हीं के कारण मुकदमे में देरी हुई।

अदालत ने कहा कि:

> “जमानत नियम है और जेल अपवाद।”

साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि ट्रायल में असामान्य देरी हो रही हो और आरोपी लंबे समय से जेल में हो, तो अपराध की गंभीरता अकेले जमानत से इनकार करने का आधार नहीं बन सकती।

इन शर्तों पर मिली जमानत

उच्च न्यायालय ने दोनों आरोपियों को एक-एक लाख रुपये के पीआर बॉन्ड तथा समान राशि की दो-दो सक्षम जमानतें प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है।

अदालत ने निम्न शर्तें भी लगाई हैं—

किसी भी गवाह या संबंधित व्यक्ति को प्रभावित नहीं करेंगे।

साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे।

अपना पता और मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस स्टेशन में जमा करेंगे।

जांच अधिकारी को सूचना दिए बिना निवास स्थान नहीं बदलेंगे।

तुमसर तालुका क्षेत्र में प्रवेश नहीं करेंगे।

ट्रायल की प्रत्येक तारीख पर अदालत में उपस्थित रहेंगे।

किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर राज्य सरकार जमानत निरस्त करने की मांग कर सकेगी।

मामले का महत्व

नईम शेख हत्याकांड भंडारा जिले के चर्चित मामलों में से एक माना जाता है। हाईकोर्ट का यह आदेश एक बार फिर इस सिद्धांत को रेखांकित करता है कि त्वरित न्याय प्रत्येक आरोपी का संवैधानिक अधिकार है और ट्रायल में अत्यधिक देरी होने पर अदालतें जमानत देने पर विचार कर सकती हैं, चाहे आरोप गंभीर ही क्यों न हों।

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