Published On : Fri, Jun 15th, 2018

साल 2014 से राज्य में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के 11, 500 पद हैं खाली

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नागपुर: राज्य सरकार की ओर से असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती प्रकिया लगभग 2014 से बंद की गई है. सरकार द्वारा वेतन के साथ सरकारी खर्च पर नियंत्रण रखने के लिए असिस्टेंट प्रोफ़ेसर की भर्ती बंद की गई थी. जिसके कारण असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की राह देख रहे पीएचडी, नेट, सेट परीक्षा उत्तीर्ण करनेवाले विद्यार्थी काफी परेशान हैं. सरकार के इस फैसले को लेकर विद्यार्थियों में काफी रोष है. जिसके कारण राज्य में कुछ दिन पहले पीएचडी, नेट, सेट उत्तीर्ण करनेवाले विद्यार्थियों ने प्रदर्शन किया था. पुणे समेत अन्य शहरों में भी इन विद्यार्थियों ने प्रदर्शन किया था.

इस मामले में शिक्षामंत्री विनोद तावडे ने खुद सज्ञान लिया और इन विद्यार्थियों को आश्वासन दिया था कि 6 हफ्तों के भीतर इस पर निर्णय लिया जाएगा. महाराष्ट्र में 1171 निजी अनुदानित कॉलेज हैं. इनमें असिस्टेंट प्रोफेसरों के 34,531 पद मंजूर हैं. जिसमें से 25,020 पद भरे गए हैं, जबकि 9511 पद रिक्त हैं. यह आंकड़ा 1 अक्टूबर 2017 तक का है. मार्च- अप्रैल 2018 में इनमें से 1500 से लेकर 2000 प्रोफ़ेसर रिटायर हो चुके हैं.

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आज महाराष्ट्र में लगभग 11,511 असिस्टेंट प्रोफ़ेसर की जगह खाली है. जबकि पीएचडी, नेट, सेट करनेवाले विद्यार्थियों की संख्या राज्य में लगभग 50 हजार के करीब है. महाराष्ट्र में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के 40 % प्रतिशत पद खाली पड़े हुए हैं, लेकिन सरकार इसकी अनदेखी कर पीएचडी, नेट, सेट पास विद्यार्थियों के साथ अन्याय कर रही है.

सरकार ने निर्णय लिया है कि असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पदों को कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर भरा जाए. जबकि सभी आंदोलन में सहभागी विद्यार्थियों ने इसका विरोध किया है. नागपुर यूनिवर्सिटी के पीएचडी छात्र और कृति समिति के समन्यवयक प्रमोद कानेकर ने जानकारी देते हुए बताया कि कई बार प्रदर्शन किया गया, लेकिन पदभर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई. कानेकर का कहना है कि सरकार कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद भरना चाहती है.

यह उन्हें मान्य नहीं है. 100 प्रतिशत पदभरती शुरू करने को लेकर राज्य के शिक्षामंत्री विनोद तावडे के साथ ही शहर के शिक्षा सहसंचालक को पत्र दिया गया है. सभी विद्यार्थियों का कहना है कि 100 प्रतिशत पदों को भरा जाए. सभी ग्रांटेड कॉलेजों में परमानेंट भर्ती की जाए.

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