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    Published On : Fri, Nov 6th, 2020
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    Arnab Goswami को आज कोर्ट से नहीं मिली राहत, कल फिर होगी सुनवाई

    नई दिल्ली: रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) को आज भी कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई है। बता दें कि अर्नब गोस्वामी की अर्जी पर बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने आज सुनवाई को शुनिवार तक के लिए टाल दिया है। इस मामले में अब कल(7 नवंबर) को 12 बजे सुनवाई होगी। बता दें कि अर्जी पर शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान जस्टिस ने पूछा कि क्या मजिस्ट्रेट के आदेश को सेसन्स कोर्ट में चुनौती दी गई है, इस पर वकील हरीश साल्वे (Harish Salve) ने कहा-हां। जस्टिस ने कहा कि हमें ये नहीं पता कि सेसन्स कोर्ट ने क्या फैसला दिया है। इस पर हरीश साल्वे ने कहा कि मेरा मुवक्किल जेल में है। साल्‍वे ने कहा, ‘मैं कुछ वजह से आदेश दिखाना चाहता हूं क्योंकि CJM ने नोट किया कि मामले को फिर से खोलने के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है।

    इसके अलावा उन्‍होंने कहा कि गृह मंत्री अनिल देशमुख ने अर्नब को लेकर विधानसभा में आरोप लगाया था कि आत्महत्या के लिए वही जिम्मेदार हैं। यहीं से पूरा मामला शुरू होता है। अर्नब गोस्वामी को एक विशेषाधिकार नोटिस भी जारी किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने आज विधानसभा सचिव को पत्र के लिए अवमानना ​​नोटिस जारी किया है। उन्‍होंने कहा कि पुलिस एक ऐसे पुलिस रिमांड को पाना चाहती है, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अस्वीकार कर दिया था।

    साल्वे ने इस सुनवाई में आगे कहा कि यह मायने नहीं रखता कि आदेश चुनौती के अधीन है या नहीं ?सीजेएम ने रिकॉर्ड और केस डायरी देखने के बाद आदेश पारित किया। साल्वे ने कहा कि सीजेएम ने अपने आदेश में कहा है “ऐसा लगता है कि आरोपी (अरनब गोस्वामी) की गिरफ्तारी अवैध है” उन्‍होंने कहा कि गृह मंत्री अनिल देशमुख ने विधानसभा में कहा कि अन्वय नाइक की आत्महत्या अर्णब गोस्वामी द्वारा बकाया राशि का भुगतान न करने के कारण हुई था। मेरा सवाल है क्या निर्णय लेने के लिए मंत्री न्यायपालिका से ऊपर है?

    साल्वे ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि यह राज्य सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। गौरतलब है क‍ि अर्नब गोस्वामी को 53 साल के इंटीरियर डिजाइनर को कथित रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में बुधवार को गिरफ्तार किया गया था। साल्‍वे ने कहा कि शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि अगर किसी का नाम सुसाइड नोट में है तो उसे जेल में डाल देना चाहिए। इसके लिए मैं राउत को दोषी नहीं दूंगा क्योंकि वो कानून की जानकारी ना होने की वजह से ऐसा बोले, लेकिन मैं न्यायालय को कुछ फैसले दिखाऊंगा। किसी ने भी यह नहीं बताया कि आरोपी और मृतक के बीच कोई व्यक्तिगत संबंध था। यह एक कारोबारी लेनदेन था।

    साल्वे ने कहा कि, समस्या यह नहीं हो सकती है कि अर्णब टीवी चैनल पर वापस जाएगा और चिल्लाएगा और परमबीर सिंह के खिलाफ आरोप लगाएगा। वह निश्चित रूप से होगा, लेकिन ये सब उसे हिरासत में रखने का कोई आधार नहीं है। जस्टिस शिंदे ने अर्णब के वकील आबाद पोंडा से पूछा कि क्या मजिस्ट्रेट के समक्ष जमानत अर्जी दी गई थी। पोंडा ने बताया जमानत की अर्जी वापस ले ली गई क्योंकि सीजेएम ने कोई विशेष तारीख नहीं दी और इसे “उचित समय” के बाद के लिए रख दिया था। जस्टिस शिंदे ने पूछा सामन्यतः याचिकाकर्ता को किस अदालत में जाना चाहिए था तो आबाद पोंडा ने कहा मजिस्ट्रेट कोर्ट में।

    आज अदालत ने क्या कहा
    बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा के अफसर द्वारा अर्नब गोस्वामी को अदालत में नोटिस दाखिल पर धमकी वाले पत्र पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अवमानना नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि अधिकारी ने स्पीकर और विशेषाधिकार समिति द्वारा भेजे गए नोटिस की प्रकृति गोपनीय होने के कारण अदालत में देने पर पत्र कैसे लिखा? शीर्ष न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “कोई इस तरह से कैसे डरा सकता है? इस तरह से धमकियां देकर किसी को अदालत में आने से कैसे रोका जा सकता है? हम इस तरह के किसी भी आचरण की सराहना नहीं करते हैं।”

    कोर्ट ने कहा कि हम चाहते हैं कि इस पर हम एमिकस क्यूरी की सहायता लें। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र विधानसभा सचिव को दो सप्ताह में कारण बताने के लिए नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि विधानसभा नोटिस दिखाने के लिए अर्नब गोस्वामी को दी गई धमकी के लिए उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विशेषाधिकार मामले में अर्णब की गिरफ्तारी न हो।

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