Published On : Tue, Feb 3rd, 2015

अमरावती : जिलाधीश की कार पर चढे आंदोलनकर्ता

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दूजेभाव पर गुस्सा फटा

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अमरावती।
नवसारी स्थित देशी शराब दूकान हटाने के लिए महिलाओं ने मंगलवार को आंदोलन पुकारा, लेकिन आंदोलनकर्ताओं से दूजे भाव का आरोप लगाकर आग बबूला हुए नागरिक जिलाधिकारी किरण गित्ते की गाडी पर चढ़ गये.  महिलाओं ने गाडी को घेरकर जिलाधिकारी मूर्दाबाद के नारे लगाये. तगड़े सुरक्षा बंदोबस्त में सेंध लगाकर जिलाधिश के घेराव से पुलिस महकामे में हडक़ंप मच गया.

जिलाधिकारी कक्ष में नहीं दिया प्रवेश
रिपाई के बैनर तले नवसारी शराब दूकाने हटाने की मांग के लिए सैकड़ों महिलाएं कलेक्ट्रेट पर पहुंची, किंतु यहां तैनात गाडगे नगर थानेदार के.एम.पुंडकर ने केवल 5 लोगों को ही भीतर प्रवेश करने दिया, उसी दौरान अन्य संगठनों के 5 से अधिक लोगों को प्रवेश दिया गया. इस भेदभाव को देखकर आंदोलनकारी महिलाओं ने जिलाधिकारी के खिलाफ नारेबाजी शुरु की. दौरान लंच के लिए जैसे ही जिलाधिकारी कार में सवार हुए, उनकी कार को घेर लिया. इतना ही नहीं तो कुछ गुस्साएं कार्यकर्ता कार पर चढकर नारेबाजी करने लगे. एक दर्जन से अधिक पुलिस कर्मचारी तैनात होने के बाद भी वह गाडी कार्यकर्ताओं को नहीं हटा पाये. आखिरकार जिलाधीश गित्ते कार से उतर गये. सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मी व कार्यकर्ताओं धुक्का मुक्की भी हुई. जिस पर कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर कार्रवाई की मांग की.

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भावी पिढी को बचाने की गुहार
जिलाधीश ने लोगों को शांत कर ज्ञापन स्वीकारा. महिलाओं ने उन्हें बताया कि प्रभाग में डीटीएड कालेज, नर्सिंग होम, नवोदय विद्यालय है. इस मार्ग से अनेक विद्यार्थियों को आना जाना रहता है. शराब की दूकान सडक़ पर होने से मार्ग पर शराब पीकर उत्पात मचाने वालों की संख्या बढ़ गई है. जिससे विद्यार्थियों के मन में भय का वातावरण है. परिसर में अधिकांश श्रमिक रहते है. साथ ही दलित बस्तियां अधिक है. ऐसे में इस दूकान को तत्काल हटाकर भावी पिढी को बचाने की गुहार लगाई, यदि ऐसा नहीं हुआ तो रिपाई की ओर से आंदोलन को तीव्र करने की चेतावनी दी

पहले भी दिया निवेदन
महिलाओं ने बताया कि परिसर के नागरिकों एवं महिलाओं ने कई बार निवेदन दिया, लेकिन निवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की. जिले में राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज, डा पंजाबराव देशमुख का जन्म हुआ, उसी जिले में भरी बस्ती में शराब की दूकान का होना जिले की गरिमा को प्रभावित कर रहा है. इसलिए जल्द से जल्द दूकान हटाने कार्रवाई करे. भन्ते संघपाल के नेतृत्व में छ़ेेडे गये इस आंदोलन में अमोल इंगले, सविता भटकर, संजय गायकवाड, एड.दिपक सरदार, कविता तानोडे, शोभा वानखडे, पंचफुला गायकवाड, सविता तायडे, जयश्री गायकवाड समेत सैकडों महिलाएं शामिल हुई. आखिरकार जिलाधिकारी अपने कैबीन में चलेगे. जिसके पश्चात वह पीछे के गेट से निवास की ओर रवाना हुए. जिलाधिश की सुरक्षा के विषय में गाडगे नगर पुलिस को नोटिस देकर जवाब तलब किए जाने की संभावना है.

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