Published On : Sat, May 25th, 2019

मालिकी हक के पट्टे मिलने पर ही होंगे कर्ज के लिए पात्र

नागपुर। सबको घर देने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। नागपुर में मालिकी हक का पट्टा वितरण करने के लिए तीन एजेंसियाें को नियुक्त किया गया है। प्रत्येक एजेंसी को दो विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। अब तक 11 हजार परिवारों का सर्वे किया जा चुका है। मनपा की जगह पर 13 झोपड़पट्टियों में से 3 हजार 874 परिवारों की जानकारी जमा हो गई है, जबकि 1260 परिवारों ने अपने दस्तावेज जमा करवा दिए हैं। इसमें 378 परिवारों को पट्टे और 227 परिवारों को डिमांड का वितरण किया जा चुका है।

सर्वे एजेंसी को दस्तावेज दें

किसी भी अतिक्रमणधारक को कर्ज नहीं दिया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र सरकार के 6 मार्च 2019 के शासन निर्णय के बाद भाड़ापट्टा मिलने वाले व्यक्ति को घर गिरवी रखकर शिक्षा सहित अन्य किसी भी विषय को लेकर किसी भी बैंक से कर्ज लेने के लिए पात्र है। इस पर मनपा आयुक्त अभिजीत बांगर ने अतिक्रमणधारकों से संपत्तिकर भर कर सर्वे करने वाली एजेंसी को दस्तावेज देने का आह्नान किया है। उधर विभिन्न जगह लगाए गए शिविरों के माध्यम से 671 परिवारों को संपत्तिकर भर कर भाड़ापट्टा लेने का आह्वान किया गया है। नजूल की जगह पर बनी झोपड़पट्टी में से 7 हजार 861 घरों का सर्वे किया जा चुका है, जिसमें 2 हजार 392 परिवारों ने दस्तावेज जमा करवा दिए है। इनमें 1 हजार 768 झोपड़पट्टी की अंतिम जानकारी नजूल और उपजिलाधिकारी कार्यालय को भेज दी गई है।

स्वतंत्र सेल का गठन

पट्टे वितरण के कार्य को गति देने के लिए मनपा आयुक्त बांगर के नेतृत्व में मनपा में स्वतंत्र पट्टा वितरण सेल गठित किया गया है। अतिरिक्त आयुक्त अजीज शेख के नेतृत्व में नियंत्रण अधिकारी के रूप में सहायक आयुक्त मिलिंद मेश्राम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पट्टा वितरण प्रक्रिया की रिपोर्ट प्रत्येक सोमवार को मनपा आयुक्त को सौंपनी होगी।

यह निर्णय लिया गया

सरकार ने 17 नवंबर 2018 को 2011 के पहले अतिक्रमणकारियों को मालिकी हक का पट्टा देने का निर्णय लिया। नागपुर सुधार प्रन्यास की जगह पर स्थानीय स्वराज संस्थाओं के क्षेत्र में सभी सरकारी विभाग सिर्फ वनविभाग को छोड़कर, नागरी स्थानीय स्वराज संस्था की जगह पर और नागपुर महानगर विकास प्राधिकरण की जगह अतिक्रमण नियमानुसार करने पर भाड़ा पट्टा देने का निर्णय लिया है। इसके लिए दस्तावेज जमा करने का काम सीएफएसडीसी, इमेजिस और आर्किनोवा द्वारा किया जा रहा है। प्लेन टेबल सर्वे के माध्यम से सामाजकि आर्थिक जानकारी जमा की जा रही है।