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    Published On : Tue, Nov 21st, 2017
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    विरोध करनेवालों को पक्ष में लेने के बाद गोरेवाड़ा की जमीन देना तय है


    नागपुर: वर्षों से गोरेवाड़ा स्थित वन विभाग की जमीन मनपा के कब्जे में है, जिसे तय रणनित के तहत गत आमसभा में लौटाने का प्रस्ताव लाया गया था. इस प्रस्स्ताव का नैतिकता के आधार पर सिरे से नगर सेवक जगदीश व हरीश ग्वालवंशी ने विरोध किया था. तब सभागृह में दिए गए निदेशों का पालन किए बिना फिर सोमवार को आमसभा में विषय क्रमांक ११८ के तहत चर्चा के साथ मंजूरी के लिए प्रस्तावित था. इससे पहले ‘नागपुर टुडे’ ने सत्तापक्ष के मंसूबे को उजागर कर दिया, जिससे सत्तापक्ष व प्रशासन ने गुप्त मंत्रणा कर कल हुई आमसभा से विषय ही गायब कर दिया.

    आमसभा की कार्यवाही के दौरान जब विषय क्रमांक ११७ के बाद सीधे ११९ का पुकारा महापौर ने किया, तो हरीश ग्वालवंशी ने तुरंत खड़े होकर कुछ कहने की कोशिश की लेकिन सत्तापक्ष के पहली कतार में बैठे नगरसेवकों ने हरीश को इशारा कर बैठने का निर्देश दिया. इतनी तेजी से तब आमसभा की कार्यवाही जारी थी कि उसके कुछ सेकेंड के बाद सदन की कार्यवाही की अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा महापौर ने कर दी.

    इसके बाद हरीश ग्वालवंशी ने उन्हें बैठानेवाले नगरसेवक से विषय का ग़ायब किए जाने की जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया गया कि जमीन तो देना तय है, फिर भी आयुक्त के साथ स्थानीय नगरसेवक उस परिसर का दौरा कर विरोधियों से भी चर्चा करेंगे. हरीश ग्वालवंशी ने इसके बाद सत्तापक्ष नेता संदीप जोशी से मुलाकात कर अपना विरोध जताने का कारण बताया और वहां के लिए तैयार की गई योजना की जानकारी दी, लेकिन फिर भी जोशी ने ग्वालवंशी की जानकारी को नाकार दिया. ग्वालवंशी ने मांग की कि उक्त दौरे और समीक्षा में उन्हें भी शामिल किया जाए.


    उल्लेखनीय यह है कि सत्ताधारियों के वरिष्ठ नेताओं के निर्देशों पर मनपा अधीनस्त वन विभाग को जमीन लौटाने की कार्यवाही शुरू की गई. जिसे मनपा में सत्ताधारियों और प्रशासन द्वारा नकारने की हिम्मत नहीं है, भले ही सैकड़ों वर्ष पुराना वन उजाड़ दिया जाए. ऐसे में सत्ताधारियों द्वारा प्रशासकीय अड़चनों को दूर करने के लिए जगदीश और हरीश ग्वालवंशी की अटके पड़े प्रस्तावों को मंजूरी दिलाने का आश्वासन देंगा. जैसे कांग्रेस के नगरसेवक रमेश पुणेकर ने भाजपा की नीतियों से नाराज सभी नगर सेवकों को दी जानेवाली निधियों की जानकारी आरटीआई के तहत मांगी, तो वित्त विभाग गोलगोल जवाब देने का रवैय्या अपनाने लगा. यही नहीं सत्तापक्ष पुणेकर के प्रलंबित ३ प्रस्तावों को आगे बढ़ाकर अतिरिक्त आयुक्त कार्यालय में अटका दिया.

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    ऐसी ही चाल चलने की रणनीत बनाकर नगरसेवक द्वय ग्वालवंशी चच्चा-भतीजे को अपने पक्ष में करना चाह रही है. अब देखना यह है कि प्रशासन और सत्ताधारी कब उक्त स्थल का दौरा कर जनसुनवाई लेते हैं. यह भी देखना है कि उक्त दौरे में किसे तहरिज दी जाती है और निचोड़ क्या निकलता है. सबसे मजेदार बात यह हैं कि सत्ताधारियों से जुड़े पर्यावरण संरक्षक कार्यकर्ताओं की संगठनें गायब है, वर्ना पेड़ की एक टहनी तोड़ने पर हंगामा ऐसा मचाता है कि मानो सम्पूर्ण पर्यावरण नष्ट कर दिया गया हो.


    सरकारी संपत्ति-राजस्व को नुकसान के साथ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ नियमित संघर्ष करनेवाले विवेक सिसोदिया के अनुसार यह सम्पूर्ण जमीन मनपा के पास ६० वर्ष से अधिक समय से है. इस परिसर में ब्रिटिशकालीन गेस्ट हाऊस आदि के अवशेष आज भी जीर्ण अवस्था में है. इसी से सटा गोरेवाड़ा डैम है. इस परिसर की शोभा बढ़ा रहे १००-१५० वर्ष पुराने हज़ारों की संख्या में वृक्ष आज भी पर्यावरण का संतुलन बना रहे हैं. मनपा जलप्रदाय विभाग के ५० के आसपास क्वार्टर हैं, जिसमें कई पीढ़ी से कर्मी रह रहे हैं. कुल मिलाकर वातावरण निसर्गमय है. रोजाना सुबह-शाम इस परिसर में हज़ारों नागरिक टहलने और खासकर छुट्टियों में सहल के लिए आते हैं. मनपा प्रशासन और वन विभाग के इस हरयाली को छेड़छाड़ करने पर सुधी नागरिक न्यायालय में दस्तक की भी तैयारी कर रहे हैं.






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