
नागपुर टुडे : शहर में छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और तनाव ने एक बार फिर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई दो दर्दनाक घटनाओं में एक छात्रा और एक छात्र ने कथित रूप से आत्महत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इन घटनाओं ने अभिभावकों, शिक्षकों और समाज को झकझोर कर रख दिया है।
‘तारे ज़मीन पर’ स्टेटस के बाद छात्रा का आत्मघाती कदम
वाठोड़ा थाना क्षेत्र के अनमोल नगर में रहने वाली 17 वर्षीय माही नीतीश आत्राम ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। माही ने हाल ही में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन पिछले कुछ समय से वह मानसिक तनाव से गुजर रही थी। परिवार के अनुसार उसका उपचार और काउंसलिंग भी चल रही थी।
जानकारी के मुताबिक घटना वाली रात माही ने परिवार के साथ भोजन किया और अपने कमरे में चली गई। इसी दौरान किसी बात को लेकर उसके पिता ने उसे डांट दिया। इसके बाद माही ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर अभिनेता आमिर खान की चर्चित फिल्म ‘तारे ज़मीन पर’ से जुड़ा स्टेटस लगाया। कुछ देर बाद उसने दुपट्टे से फंदा बनाकर आत्मघाती कदम उठा लिया।
सुबह जब परिजनों ने उसे आवाज दी और कमरे का दरवाजा खोला तो वह फंदे से लटकी मिली। परिजन तत्काल उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने छात्रा का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। उसके व्हाट्सएप स्टेटस, कॉल डिटेल और चैट की जांच की जा रही है ताकि आत्महत्या के पीछे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। पड़ोसियों के अनुसार माही शांत, मिलनसार और पढ़ाई में अच्छी छात्रा थी।
बीसीए छात्र ने भी की आत्महत्या
इसी तरह बेलतरोड़ी थाना क्षेत्र के हरिहरनगर निवासी 22 वर्षीय अभय उत्तमराव निघोट ने भी कथित रूप से पढ़ाई के तनाव में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अभय बीसीए का छात्र था और अपनी पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर बताया जाता है।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह वह अपने कमरे में गया। परिवार के लोगों को लगा कि वह पढ़ाई कर रहा है, इसलिए किसी ने उसे परेशान नहीं किया। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर परिजनों ने कमरे में जाकर देखा तो वह फंदे से लटका हुआ मिला।
उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने मामले में आकस्मिक मृत्यु का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बढ़ती चिंता का विषय
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा, करियर और भविष्य की अनिश्चितताओं के बीच कई युवा मानसिक दबाव, चिंता और भावनात्मक संघर्ष का सामना कर रहे हैं।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों की भावनाओं को समझने, उनसे नियमित संवाद बनाए रखने और उनकी मानसिक स्थिति पर समय रहते ध्यान देने की आवश्यकता है। केवल शैक्षणिक प्रदर्शन पर ध्यान देने के बजाय बच्चों के भावनात्मक स्वास्थ्य को भी समान महत्व देना जरूरी है।
इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सफलता की दौड़ में कहीं युवा पीढ़ी तनाव के ऐसे दलदल में तो नहीं फंस रही, जहां से बाहर निकलने के लिए उन्हें सबसे ज्यादा सहारे, संवाद और समझ की जरूरत है।







