Published On : Mon, Sep 11th, 2017

वीडियो : पुलिस से गाली गलौंच करते नजर आए भाजपा नेता दयाशंकर तिवारी

नागपुर: रविवार को गणेशपेठ पुलिस स्टेशन में उस समय हंगामा मच गया जब भाजपा के वरिष्ठ नगरसेवक दयाशंकर तिवारी ने मामूली बात को लेकर पुलिस को गालियां दी और आम आदमी पर अपनी खाकी वर्दी का रौब जमानेवाली पुलिस मूकदर्शक बनकर गालियां सुंनने के अलावा कुछ नहीं कर सकी. इस पुरे वाक्य का वीडियो पुलिस स्टेशन में मौजूद महिला पुलिस कर्मियों ने बना लिया और उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया. पूरी घटना इस प्रकार से है. रविवार शाम को मोक्षधाम रोड से वैभव दीक्षित अपने मित्र के साथ जा रहा था और सामने ही पुलिस की ओर से ड्रंक एंड ड्राइव के अंतर्गत गाड़ियों की जांच की जा रही थी. जिसके कारण रास्ते से जा रहे दीक्षित ने अपनी गाडी यूटर्न ले ली. बारिश के कारण सड़क पर पानी जमा था. जिसके कारण गाडी फिसल गयी और दोनों को मामूली खरोच आयी. दोनों ने अपने साथ हुई दुर्घटना की बात परिसर के नगरसेवक दयाशंकर तिवारी को दी. तिवारी अपने कार्यकर्ताओ समेत गणेशपेठ पुलिस स्टेशन पहुंचे और वहां मौजूद पुलिस उपनिरिक्षक, पुलिस कर्मियों को गंदी गंदी गालिया देने लगे. जब वे गालियां दे रहे थे. तो पुलिस चुपचाप मूकदर्शक बनकर केवल गालियां सुनती रही. वही मौजूद एक महिला पुलिसकर्मी ने पूरी घटना का मोबाइल में वीडियो बनाया और सोशल मीडिया में वायरल कर दिया.

इस बारे में नगरसेवक दयाशंकर तिवारी ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि पुलिस की ओर से लड़कों के साथ मारपीट की गयी. जिसके कारण एक को गंभीर चोटे आयी है. जिस पुलिस ने मारपीट की वह शराब के नशे में था. तिवारी ने मारपीट करनेवाले पुलिस कर्मी पर कार्रवाई करने की मांग की है.

इस बारे में सामजिक कार्यकर्ता नूतन रेवतकर ने पुलिस के साथ हुई बदसलूकी को लेकर पुलिस आयुक्त और पुलिस उप-आयुक्त को नगरसेवक दयाशंकर तिवारी पर कार्रवाई की मांग को लेकर निवेदन सौपा है.

दयाशंकर तिवारी ने लिया पत्र परिषद , दिया स्पस्टीकऱण

कल रात लगभग 11 बजे घाट रोड पर स्थित इरोज मोटर के सामने गणेशपेठ यातायात विभाग की पुलिस ने नशे में धुत होकर एक बाइक सवार युवक के सिर पर एक नहीं बल्कि दो बार प्रहार कर एक का सिर फोड़ कर फरार हो गया. जब मामले के दोषी पुलिस कर्मी किशोर राजेश जाधव पर कार्रवाई करने हेतु भाजपा नेता ने दबाव बनाया तो उनके द्वारा कहे गए अपशब्द पर मामला दर्ज करने की धमकी दिए जाने की बात पत्र परिषद् में दयाशंकर तिवारी ने दी है. शहर के भाजपा नेता दयाशंकर तिवारी, शहर भाजपा महामंत्री संदीप जोशी, पूर्व महापौर प्रवीण दटके ने उक्त घटना के दोषी पुलिस कर्मी किशोर जाधव व उसके संरक्षक ड्यूटी अफसर कांडेकर को निलंबित करने की मांग की है.

तिवारी ने पत्र परिषद में जानकारी देते हुए बताया की रविवार को मध्य नागपुर के निवासी कानून की पढाई करने वाले वैभव दीक्षित और उनका साथी आदित्य ठाकुर अपने साथी को सामान लौटाने के लिए मेडिकल चौक जा रहे थे कि उनके पास पैसे न होने के कारण अगले मोड़ से पीछे की ओर एटीएम की ओर पलटे. एटीएम की ओर जा ही रहे थे कि पिछे से पुलिसकर्मी किशोर जाधव ने आवाज मारी और बिना कुछ पूछे लाठी घुमाई, एक बार नहीं बल्कि दो बार, लाठी सिर पर लगने से सिर फट गया और बेहिसाब खून निकलने लगा. खून निकलता देख वहां उपस्थित पुलिस वाले ने अपने बचाव के लिए उन्हें घटनस्थल से भागने का निर्देश दिया. जब उन्होंने अपने परिजनों को घटनास्थल पर बुलाने की बात कही तो उक्त पुलिस वाले तमतमा गए.

तिवारी ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि दीक्षित का सिर फटने से काफी खून बह रहा था, इसी बीच उनका भाई घटनास्थल पर पहुँच गया, इस बीच पुलिस वाले भाग गए और सभी गणेशपेठ थाने पहुँच गए. पुलिस के खिलाफ मामला दर्ज करवाने का प्रयास करने लगे. इस दौरान भाजपा नेता दयाशंकर तिवारी थाने पहुंचे, पुलिसिया रुख से खफा होकर तिवारी ने पुलिस से कुछ अपशब्द कहे. जिसका तय रणनीति के हिसाब से महिला पुलिस कर्मी उर्मिला ने वीडियो बना लिया.

तिवारी ने जब उक्त दोषी पुलिस कर्मी का मेडिकल करवाने हेतु मांग की तो तैनात ड्यूटी अफसर कांडेकर ने तिवारी को धमकाया कि उनके द्वारा कहे गए अपशब्द के बिना पर उनपर भी मामला दर्ज करना होगा. इसके बाद जैसे-तैसे समय काट उक्त दोषी पुलिस किशोर जाधव का मेडिकल करवाया गया, उसकी जाँच में अल्कोहल पाया गया. इसके बाद तिवारी और वैभव के समर्थन में थाने में जमा हुजूम उक्त पुलिस पर कार्रवाई की मांग करने लगा. दूसरी ओर वैभव को रात भर मेयो अस्पताल में रखा गया. आज सुबह छुट्टी दी गई. गणेशपेठ पुलिस ने आज सुबह अपने दोषी पुलिसकर्मी के बचाव में तिवारी के अपशब्द भरे बयां वाला वीडियो वाइरल कर उन्हें बदनाम और मामला दबाने की कोशिश करने का प्रयास किया गया. उक्त घटनाक्रम पर तिवारी ने दोषी पुलिस कर्मी और उसके संरक्षक ड्यूटी अफसर कांडेकर को निलंबित करने की मांग राज्य के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और शहर पुलिस आयुक्त से की है. उल्लेखनीय यह है कि जब सत्ताधारी नेताओं की नागपुर शहर में यह दशा है तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम जनता पुलिसिया झंझट में कैसे पिस रही होगी.