
नागपुर टुडे: दसवीं बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत अंक हासिल करने के बावजूद एक होनहार छात्रा ने ऐसा कदम उठा लिया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। रामटेक के समीप शीतलवाड़ी स्थित शिवनगर में रहने वाली 16 वर्षीय कावेरी कमलाकर बोरसे ने मंगलवार सुबह अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस दर्दनाक घटना के बाद परिवार, पड़ोसियों और स्कूल परिसर में शोक की लहर फैल गई।
दरवाजा नहीं खुला तो हुआ अनहोनी का अंदेशा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कावेरी प्रोविडेंस विद्यालय, मनसर की छात्रा थी। उसके पिता भारतीय सेना में कार्यरत हैं, जबकि मां तहसील कृषि विभाग में नौकरी करती हैं। मंगलवार सुबह रोज की तरह माता-पिता अपने-अपने काम पर निकल गए। घर में अकेली मौजूद कावेरी ने चुनरी का फंदा बनाकर आत्मघाती कदम उठा लिया।
सुबह जब दूधवाला घर पहुंचा तो काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला। आवाज लगाने के बावजूद अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद पड़ोसियों को बुलाया गया। काफी प्रयासों के बाद बाथरूम का दरवाजा खोला गया तो अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। कावेरी फंदे से लटकी हुई थी। तुरंत उसे नीचे उतारकर अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
75 प्रतिशत अंक भी नहीं दे सके सुकून
बताया जा रहा है कि हाल ही में घोषित दसवीं बोर्ड परीक्षा में कावेरी को 75 प्रतिशत अंक मिले थे। परिवार और परिचितों के अनुसार, वह अपने परीक्षा परिणाम से संतुष्ट नहीं थी और पिछले कुछ दिनों से मानसिक तनाव में थी। माना जा रहा है कि पढ़ाई और भविष्य को लेकर बढ़ते दबाव ने उसकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाला।
चार दिन पहले ही गांव से लौटा था परिवार
मूल रूप से धुले जिले के शिरपुर निवासी बोरसे परिवार चार दिन पहले ही अपने पैतृक गांव से रामटेक लौटा था। कावेरी की दो बड़ी बहनें गांव में ही रुकी थीं, जबकि वह माता-पिता के साथ वापस आई थी। परिवार को जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही दिनों में इतनी बड़ी त्रासदी सामने आ जाएगी।
पुलिस जांच में जुटी
घटना की सूचना मिलते ही रामटेक पुलिस मौके पर पहुंची। पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए उपजिला अस्पताल भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कावेरी की मौत ने एक बार फिर समाज के सामने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अंकों और प्रतियोगिता की अंधी दौड़ में बच्चों पर बढ़ता मानसिक दबाव कब कम होगा।








