Published On : Sat, Aug 7th, 2021

मंडल में 4, घरों में 2 फुट के गणेश, मनपा ने जारी किया परिपत्रक

नागपुर. कोरोना की दूसरी लहर के पूरी तरह नियंत्रण में होने के बावजूद हाल ही में अधिकांश व्यापारिक गतिविधियों में छूट दी गई किंतु धार्मिक आयोजनों पर पहले की तरह पाबंदी जारी है. इसी क्रम में निकट भविष्य में होनेवाले गणेश उत्सव को लेकर मनपा की ओर से नियमावली जारी की गई.

इसके अनुसार सार्वजनिक मंडल द्वारा 4 फुट के गणेश मूर्ति की स्थापना की जा सकेगी जबकि घरों में केवल 2 फुट तक की मूर्ति स्थापित की जा सकेगी. मंडल के सामने किसी भी तरह की धार्मिक विधि करने पर पूरी तरह पाबंदी है. गतिविधियों में छोटे बच्चे और ज्येष्ठ नागरिक शामिल नहीं हो सकेंगे. मनपा आयुक्त राधाकृष्णन. बी ने उत्सव में किसी भी तरह की राहत नहीं मिलने के स्पष्ट संकेत दिए हैं. साथ ही कड़ी शर्तें लागू कर दी गई हैं.

पीओपी की मूर्तियां न खरीदें आयुक्त की ओर से जारी परिपत्रक में प्रत्येक मंडल को थर्मल स्क्रीनिंग मशीन, सैनेटाइजर की व्यवस्था, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, मंडल परिसर को बार-बार सैनेटाइज करने के आदेश का उल्लेख है. केंद्रीय प्रदूषण मंडल द्वारा 12 मई 2020 को जारी आदेशों का हवाला देकर पीओपी मूर्तियों की खरीदी टालने की अपील भी लोगों से की गयी है. पंडाल की रचना नियमों के अनुसार होनी चाहिए. पंडाल में भीड़ न हो, इसकी जिम्मेदारी मंडल पदाधिकारियों की होगी.

घरों में ही बाप्पा का विसर्जन
आयुक्त ने घरों में मिट्टी या इको फ्रेंडली बाप्पा की स्थापना करने की अपील भी की है. संभवत: बाप्पा का विसर्जन घरों में करने तथा संभव न होने पर मनपा द्वारा अलग-अलग हिस्सों में निर्मित किए जानेवाले कृत्रिम टैंक में विसर्जन करने की सलाह दी गयी है. कृत्रिम टैंक के लिए शहर के सामाजिक संगठन, हाउसिंग सोसाइटी, जनप्रतिनिधियों से पहल करने की अपील भी आयुक्त ने की है. आयुक्त ने कहा है कि इस दौरान मनोरंजन के कार्यक्रम न किए जाएं. इसके बदले स्वास्थ्य शिविर लिए जाने चाहिए जिसमें कोरोना, मलेरिया, डेंगू जैसे बीमारियों पर जनजागृति कार्यक्रम लेने चाहिए. रक्तदान शिविर को अधिक प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए. घरों में भी आरती, भजन, किर्तन या अन्य धार्मिक विधि के दौरान भीड़ न हो, इसका ध्यान रखा जाना चाहिए.

ऑनलाइन दर्शन
कोविड नियमों का पालन करना सभी मंडलों के लिए बंधनकारक होगा. ऐसे में मंडलों को सोशल मीडिया का लाभ उठाकर ऑनलाइन दर्शन की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए. इसके अलावा स्थानीय केबल या वेबसाइट्स का सहारा लेकर दर्शन के लिए लोगों को उपलब्ध कराना चाहिए.