Published On : Sat, Nov 18th, 2017

3 बाल सुधारगृह में रेस्क्यू कर लाए गए 20 में से केवल 5 ही बच्चे मौजूद


नागपुर: नागपुर शहर में सड़क और चौराहों पर रोजाना सैकड़ों बच्चों के साथ ही बड़े लोग भी भीख मांगते हुए नजर आ रहे हैं. लेकिन कार्रवाई के आभाव में इन बच्चों से भीख मंगवाने वाले इनके माता पिता भी बेखौफ इन बच्चों का फायदा उठा रहे हैं. इस पूरे में मामले में जिला महिला व बालविकास विभाग की बात करें तो वह पूरी तरह से निष्क्रिय दिखाई दे रहा है. बीते चार महीनों में शहर में भीख मांगनेवाले सैकड़ों बच्चों में से केवल 20 बच्चों को ही रेस्क्यू किया गया है तो वहीं इनसे भीख मंगवानेवाले इनके माता पिता महिला व बालविकास विभाग को केवल 10 ही मिले हैं.

इनके अभिभावकों पर एफआईआर दर्ज की गई है तो वहीं इन बच्चों को सरकारी बाल सुधार गृह में रखा गया है. सरकारी बाल सुधार गृह नागपुर शहर में 3 हैं. दो पांचपावली में और एक काटोल रोड पर है. लेकिन इनमें अभी केवल 5 ही बच्चे हैं. जिन्हें भीख मांगते हुए रेस्क्यू किया गया था. इस बारे में महिला व बालविकास विभाग का कहना है कि बच्चों को रेस्क्यू करने के बाद उन्हें बाल सुधारगृह भेजा जाता है और जब बच्चों को लेने के लिए उनके अभिभावक आते हैं तो उनसे बॉन्ड लिखवाकर बच्चों को उनके साथ भेजा जाता है. इसमें यह सोचनेवाली बात यह है कि अगर अभिभावकों से भीख नहीं मंगवाने का बॉन्ड लिखवाया जाता तो फिर वापस बच्चे कैसे सिग्नलों पर भीख मांगते हुए दिखाई देते हैं. और दोबारा पकड़ने पर महिला व बालविकास विभाग सख्त कार्रवाई इनके अभिभावकों पर क्यों नहीं करता है.

इसमें विभाग का यह भी कहना है कि रात में बच्चों को रेस्क्यू नहीं किया जाता क्योंकि उन्हें रखने की परेशानी होती है. जबकि शहर में ही तीन सुधार गृह होने के बाद भी जिला महिला व बालविकास विभाग बच्चों को रेस्क्यू करने से कतराता है. बर्डी, कॉटन मार्केट चौक, अग्रसेन चौक, गांधीबाग, एलआईसी चौक, संविधान चौक इन जगहों पर सबसे ज्यादा भीख मांगनेवाले बच्चे और उनके माता पिता दिखाई देते हैं.

भीख मांगनेवाले बच्चों के बारे में जिला महिला व बालविकास अधिकारी विजयसिंह परदेसी का कहना है कि आए दिन इन बच्चों को रेस्क्यू किया जाता है. शहर के रेस्क्यू किए गए बच्चों के सुधार गृह में अभी फिलहाल 5 बच्चे ही हैं. बाकी बच्चों को उनके अभिभावकों को लिखित में लिखवाकर सौंप दिया गया है. परदेसी ने यह भी बताया कि पुलिस की मदद तो मिल रही है लेकिन एनजीओ को भी सहयोग करना चाहिए. परदेसी ने यह भी बताया कि अभी शहर में जो बच्चे और बड़े भीख मांग रहे हैं, वे दूसरे हैं. क्योंकि जिन्हें हमने रेस्क्यू किया है, वे शहर छोड़ कर जा चुके हैं.