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‘लव जेहाद’ नहीं, ये तो ‘लव बम’ है!


किसी भी धर्म की बालिग लड़की का अन्य धर्म के लड़के से न तो प्रेम करना गुनाह है, न उससे शादी करना जुर्म है. केरल की 24 वर्षीया अखिला अशोकन ने भी कोई गुनाह नहीं किया. उसने एक मुस्लिम युवक से मोहब्बत की, इस्लाम कबूला, फिर उसी से निकाह किया… और अखिला से ‘हादिया’ बन गई उसके माता-पिता और परिजनों ने इसका विरोध किया. उसे समाज के उसूल समझाए, अच्छे-बुरे का ज्ञान दिया. मगर अखिला नहीं मानी. अब वह केवल मुसलमान बन कर ही जिंदगी जीना नहीं चाहती, बल्कि एक मुस्लिम नारी के रूप में ही मरना चाहती है! यहां तक तो सब ठीक है, किंतु उसके एक बयान ने इस प्रेम-प्रकरण को पहले केरल हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा दिया. वह अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम फैसले के बाद सलेम (तमिलनाडु) के होमियो मेडिकल कॉलेज के होस्टल में रहकर इंटर्नशिप कर रही है.

अखिला के पिता अशोक का कहना है कि उसकी इकलौती बेटी सीरिया जाकर ‘आईएस’ में शामिल होना चाहती है. उन्होंने इस आशय की याचिका केरल हाईकोर्ट में लगाते हुए दावा किया कि मेरी बेटी को बहला-फुसला कर और उसका ‘ब्रेन-वॉश’ कर उसे ‘इस्लाम’ कबूल करवाया गया और फिर शफी जहां ने मोहब्बत का जाल फेंक कर उससे निकाह भी कर लिया! अब वह उसे ‘सीरिया’ भेज कर ‘इस्लाम की आग’ में झोंकना चाहता है. केरल हाईकोर्ट ने लम्बी सुनवाई के बाद हादिया प्रकरण को ‘लव जेहाद’ मानते हुए इस निकाह को रद्द कर, अखिला उर्फ हादिया को उसके माता-पिता को सौंप दिया. इसके खिलाफ हादिया के शौहर ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई, जहां अंतरिम आदेश पर हादिया को पिता की देख-रेख से आजाद तो कर दिया गया, मगर उसे शौहर के साथ रहने की इजाजत फिर भी नहीं दी!

सुप्रीम कोर्ट के तीन विद्वान न्यायाधीशों की खंडपीठ चाहती, तो केरल हाईकोर्ट को यह शादी रद्द करने के फैसले पर फटकार लगा कर हादिया को उसके शौहर को सौंप सकती थी! मगर सर्वोच्च अदालत ने उसे मेडिकल कॉलेज के होस्टल में रहने और आगे की शिक्षा पूरी करने का फरमान दे डाला. इसके पीछे का मकसद अखिला उर्फ हादिया को सीरिया जाने से रोकना भी हो सकता है! क्योंकि वहां के हालात किसी से छिपे नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने इस संजीदा प्रकरण की जांच अब एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को सौंप दी है, जो हादिया के ‘सीरिया कनेक्शन’ की गहराई से जांच करेगी.

पहली नजर में तमाम हिंदू संगठनों को यह ‘लव जेहाद’ का मामला जरूर लगता होगा, लेकिन हमारी नजर में यह ‘लव जेहाद’ न होकर ‘आतंक का एक ऐसा लव बम’ है, जिसका अंत बहुत भयानक है! पहले अखिला का धर्मांतरण, फिर इस्लामिक सेंटर में उसका ब्रेन-वॉश, फिर निकाह… और अंत में सीरिया भेजने की तैयारी…!? क्या यह एक अकेले शफी जहां नामक युवक की अक्ल या साजिश से संभव है? क्या इसके पीछे के तत्वों की गहराई से जांच नहीं होनी चाहिए? क्या वाकई हादिया को सीरिया भेजा जाने वाला था? अथवा सच्चे प्यार में पागल होकर हादिया ही सीरिया में सच्ची मुस्लिम महिला के रूप में मरने की जिद करके ‘जन्नत’ पाना चाहती है? सच्चाई का पता तो लगना ही चाहिए.

हादिया प्रकरण से कुछ सवाल भी उपजते हैं. ऐसे क्या कारण हैं कि देश के सर्वाधिक साक्षर प्रदेश केरल में ‘लव जेहाद’ के तकरीबन 5,000 मामले पिछले 10-11 सालों से सामने आए हैं! क्यों पिछले 6 साल में यहां की 2,667 हिंदू एवं ईसाई लड़कियों ने ‘इस्लाम’ कबूला? यहां हिंदू आबादी 54.73 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी 26.56 फीसदी है. फिर भी यहां जन्म लेने वाले प्रत्येक 100 बच्चों में से 42 बच्चे मुस्लिम और 42 ही बच्चे हिंदू पैदा होते हैं! विडंबना यह कि 2,667 में से 705 मामलों की पुलिस ने गहराई से जांच की, क्योंकि बाकी कन्वर्टेड लड़कियों का पता ही नहीं चल पाया! इनमें से मात्र 123 लड़कियों की बमुश्किल ‘घर वापसी’ हुई. अर्थ यह कि एक बार जवान लड़की हाथ से निकल गई, तो उसका वापस आना बेहद मुश्किल होता है! ऐसे में समाज को सतर्क रहने की जरुरत है. ‘लव जेहाद’ के भेड़ियों से बेटियों को बचाइए!… हादिया की तरह उन्हें ‘लव बम’ बनने से रोकिए!