Published On : Wed, Apr 5th, 2017

योगी को विदर्भ किसान आंदोलन की दाद

नागपुर – चुनाव प्रचार के दौरान किसानों से किया वादा उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग में ही पूरा कर दिया। मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करने के बाद योगी द्वारा लिए जा रहे फ़ैसले उन्हें लोकप्रियता के शिखर पर पहुँचा रहे है। महाराष्ट्र में किसानों की कर्जमाफ़ी के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने योगी के कदम की सराहना करते हुए उनका अभिनंदन किया है। समिति के किसान नेता राम नेवले के मुताबिक किसानों के लिए लिया गया योगी का फैसला किसानों के प्रति उनकी संवेदना और ईमानदारी का प्रदर्शन करता है। उनके इस एक फ़ैसले से यूपी के लाखों किसानों का फ़ायदा होगा।

योगी को दाद , देवेंद्र दगाबाज

विदर्भ राज्य आंदोलन समिति गुरुवार को किसानों की कर्जमाफी के लिए रेल रोको आंदोलन करने वाली है। सेवाग्राम में होने वाले इस आंदोलन में विदर्भ से हजारो किसान मुंबई और दिल्ली की तरफ जाने वाली ट्रेनों को रोकेंगे। विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस को उनकी ही पार्टी के यूपी मुख्यमंत्री से सीखने की नसीहत दी है। राम नेवले के अनुसार योगी ने किसानों के भले के लिए राजस्व के नुकसान की परवाह न करते हुए धाकड़ फैसला लिया जबकि हमारा दुर्भाग्य है की हमें ऐसा मुख्यमंत्री मिला है जो बीते ढाई साल से किसानों को छल रहा है। जब साहब विपक्ष में थे तब किसानों के लिए आवाज बुलंद करते थे अब सत्ता में है तो राजनितिक महत्वकांक्षा को पूरा करने में लगे है। किसानों की आत्महत्या का सिलसिला लगातार जारी है। तत्कालीन मुख्यमंत्री पर 302 का मुक़दमा दर्ज करने वाले देवेंद्र पर अब क्यूँ न 306 ( आत्महत्या के लिए प्रवृत ) करने का मामला दर्ज होना चाहिए।

सत्तापक्ष -विपक्ष एक सिक्के के दो पहलू

किसानों के लिए संघर्ष करने वाले लोगो और संगठनों को बीजेपी और खुद मुख्यमंत्री से भारी निराशा हाँथ लगी है। विपक्षी दलों के विधिमंडल सदस्य इन दिनों किसानों की कर्ज माफ़ी के लिए संघर्ष यात्रा निकाल रहे है। इस यात्रा की नीयत पर सवाल उठाते हुए विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने कहाँ धूप में तपने वाले किसानों के लिए वातानुकूलित यात्रा निकाली जा रही है। दूसरी और सरकार किसानों की तकलीफ पर आँख मूंद कर बैठी है। दरअसल सत्तापक्ष और विपक्ष एक सिक्के के दो पहलू है। इन्हें किसानों से नहीं सत्ता की राजनीति से मतलब है जब जिसे जरुरत होती है वह किसानों के लिए हमदर्दी बताता है। मकसद पूरा हो जाने के बाद सत्ता के भोग में लग जाते है।