Published On : Fri, Jun 19th, 2015

यवतमाल : 15 जून तक नहीं मिला सभी अकालग्रस्त किसानों को नया फसल कर्ज

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सरकार ने की थी पुर्नगठन की घोषणा, नहीं हुआ घोषणा पर अमल

विजस नेता किशोर तिवारी का आरोप

Mungantiwar - Fadanvis - Gadkari
यवतमाल। विदर्भ एवं मराठवाड़े सभी बकायादार किसानों को फसलकर्ज का पुनर्गठन कर उन्हें नये फसल कर्ज 15 जून तक दिया जाएगा, ऐसी राज्य सरकार ने घोषणा की थी, लेकिन सरकार ने निधि उपलब्ध न करा देने से सिर्फ पिछले वर्ष 2014-15 के मौसम के किसानों के फसलकर्ज का पुनगर्ठन करने के निर्देश बैंकों दिए थे, लेकिन अब 18 जुन तक बैंकों में सिर्फ 20 फिसदी फसल कर्ज का वितरण किया होकर पुनगर्ठन करते समय सरकारी बैंकों ने मंजूर फसलकर्ज राशि 30 से 50 फिसदी किसानों दी होने की जानकारी किसान नेता किशोर तिवारी दी होकर यह भी कहा है कि, राज्य सरकार के अर्थखाते से अपना हिस्सा देने के लिए स्पष्ट इनकार करनेे और दूसरी ओर नये फसल कर्ज के बारे में नाबार्ड ने अपने हाथ खड़े करने से आनेवाले समय में भी अकलाग्रस्त किसानों के लिए फसलकर्ज भी अब खेतमाल को लागत खर्च अधिक 50 फिसदी मुनाफा ऐसा गैरंटी मूल्य देने का वादा झूठा साबित होनेवाला है, ऐसा संदेश अब सरकार ने किसानों को दिया है.

कर्ज का पुनगर्ठन करते समय नाबार्ड की ओर से 60 फिसदी, राज्य सरकार से 15 फिसदी आर्थिक भार उठाया जाता है. राज्य बैंक 10 फिसल तो जिला बैंक 15 फिसदी भार उठाती है. इसमें सरकार से दिया जानेवाला 15 फिसदी हिस्सा पिछले 15 वर्षों से नहीं दिया जा रहें, जिससे वह भार राज्य बैंक औेर जिला बैंक पर आने से इस वर्ष नाबार्ड की ओर 60 फिसदी और राज्य सरकार की ओर से 15 फिसदी ऐसा कुल 75 फिसदी राशि नहीं मिलने से पुनगर्ठन करने में राज्य बैंक ने असमर्थता सरकार के दरबार में रखी थी, लेकिन राज्य सरकार अपने हिस्से की करीबन 2 हजार करोड़ रुपए की राशि न देने से पुनगर्ठन का नया पेच निर्माण हुआ होकर सरकार की उदासिनता धोरण से वर्षा आने के पश्चात भी 50 फिसदी किसानो ंके पास बिज लेने के लिए पैसे नहीं है. जिससे इन किसानों को उनकी खेत जमीन बुआई से वंचित रखने की नौबत आ गई है, सरकार ने तत्काल फसल कर्ज देने लिए निधि उपलब्ध कराने की मांग भी तिवारी ने की है.

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विदर्भ में सिर्फ 24 फिसदी कर्ज का वितरण
फसल कर्ज का पुनगर्ठन करने की अवधि खत्म होने के पश्चात अमरावती संभाग में सिर्फ 27 फिसदी किसानों को कर्ज का वितरण किया गया है. इसमें 50 फिसदी किसानों सिर्फ आकडेवारी दिखाने के लिए नाममात्र फसल कर्ज सरकारी बैंकों ने दिया है. लेकिन पात्र किसानों को भी पुनगर्ठन का लाभ नहीं मिला. जिससे नया फसलकर्ज के खाते खोलने के लिए बैंक तैयान नहीं है. सभी ओर धीमीगति से शुरू फसल कर्ज वितरण प्रणाली अब किसानों की और भी चिंता बढ़ा दी है. आत्महत्याग्रस्त प. विदर्भ के करीबन 18 लाख किसानों को बैंकों ने फसलकर्ज देने में इनकार किया है. लेकिन सरकार और अधिकारी बैंकों पर कार्रवाई करेंगे, ऐसा बता रहें है. लेकिन फसल कर्ज वितरण के लिए लगनेवाला निधि सरकार ने नहीं देने का आरोप किशोर तिवारी ने किया है.

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