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    Published On : Sat, May 16th, 2015
    Vidarbha Today | By Nagpur Today Vidarbha Today

    यवतमाल : इरफान हत्याकांड में 5 को डबल उम्रकैद


    यवतमाल।
    4 नवंबर 2011 की रात 8.30 बजे के दौरान पारवेकर विद्यालय के सामने बुलाकर साजीश के तहत 5 लोगों ने मिलकर सशस्त्र हमला किया था. जिसमें इरफान खान रशीद खान की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी. इस मामले में 5 हत्यारों को उम्रकैद की सजा आज सुनाई गई. यह सजा यवतमाल के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डी.वी. ठाकरे ने सुनाई. इस मामले में सरकार की ओर से एड. पी.वी. गाडबैले ने जोरदार पैरवी की थी.

    जिन्हें डबल उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, उनमें आशु उर्फ आसीफ याकुब (27), शे. फैज शे. गफ्फार (20), अफसर अली चिराग अली (40), शेख अनवर उर्फ मिचमिच्या शे. ईस्माईल (26) और सैयद अबरार सैयद रहू (30) का समावेश है. आशु और उसके साथीदारों का इरफान खान रशीद खान के साथ झगड़ा चल रहा था. इसी पुरानी रंजीश के चलते इरफान को घटना की रात अज्ञात फोन पर से बताया गया कि, तुम्हारा पानठेला किसीने फोड़ दिया है. जिससे इरफान खुद की स्कुटर लेकर  रात 8 बजे पानठेले पर पहुंचा, मगर पानठेला सहीसलामत था. जब फोन आया तो इरफान का पुत्र रिजवान खान भी उसके पिछे-पिछे पहुंचा. वहां से वे लोग रात 8.30 बजे बाबासाहब पारवेकर विद्यालय के सामने पहुंचे. जहां सभी पांचों आरोपियों ने इरफान की स्कुटर रोकी और तलवार से लगातार कई वार किए. जिससे इरफान लहूलूहान अवस्था वहीं गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई.

    इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी मृतक का पुत्र रिजवान खान, सोफिया शाहीन थी. इस मामले में कुल 10 गवाहों के बयान हुए. उसमें रिजवान, सोफिया, पोस्टमार्टंम करनेवाले सचिन गाडग़े, मो. इकबाल, जांच अधिकारी संजय शिरभाते के बयान महत्वपूर्ण साबित हुए. इस मामलें में पुलिस सभी आरोपियों के खिलाफ भादंवि की धारा 147, 148, 149, 302, 120 बी और 341 तथा आम्र्स एक्ट के तहत गुनाह दर्ज किया गया था. इस मामले में 302 और 120 बी के तहत डबल उम्रकैद की सजा इन पाचों आरोपियों को सुनाई गई. इसके अलावा लगाए गए विविध धाराओं में भी सजा हुई है. इसके साथ ही 7.5 हजार रुपए जुर्माना सुनाया गया है. जुर्माना न भरने की सुरत में और सजा भुगतनी पड़ेंगी. इन पांचों आरोपियों की ओर से अमरावती के एड. मिर्झा और एड. शोएब खान, यवतमाल के एड. अजय चमेडिया एवं एड. अमन खान ने पैरवी की, मगर वे किसी भी आरोपी को बचा नहीं सके. क्योंकि प्रत्यक्षदर्शी मृतक का पुत्र होने से मामला सशक्त था.
    court


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