Published On : Sat, Mar 4th, 2017

भांडेवाड़ी में बिन प्रक्रिया का 18.25 लाख मीट्रिक टन घन कचरा

Dumping yard

File Pic


नागपुर:
नागपुर शहर अमूमन रोज 1100 मीट्रिक टन घनकचरा पैदा करता है। घन कचरा व्यवस्थापन की कमान हंजर कम्पनी पर डाली गई थी। लेकिन फरवरी 2012 को हंजर का भांडेवाड़ी डम्पिंग में लगे प्लांट में आग लगने के बाद से इसकी गति लड़खड़ाने लगी। नतीजा तब से लेकर अब तक कम्पनी उबर नहीं पाई और 800 मीट्रिक टन घन कचरा प्रक्रिया की क्षमता से घटकर अब बताया जा रहा है कि 100 मीट्रिक टन से भी कम घन कचरे पर प्रक्रिया हो रही है। जानकार को यहां तक कहते हैं कि कचरा प्रक्रिया 100 से भी घटकर तकरीबन 50 से 60 मीट्रिक टन पर आ गई है। लिहाजा बीते पांच सालों में भांडेवाडी डम्पिंग यार्ड एक खतरनाक पर्यावरणीय स्तर के ढेर पर खड़ा हो चुका है। पर्यावरण से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि भांडेवाड़ी में बिका प्रक्रिया के तकरीबन 91 प्रतिशत कचरा पड़ा हुआ है। इस पर प्रक्रिया करना नई कम्पनी के लिए टेढ़ी खीर साबित होनेवाला है।

प्रतिदिन 1100 मीट्रिक टन कचरा नागपुर शहर से भांडेवाड़ी डम्पिंग यार्ड पहुंचता है। लिहाजा पांच सालों में 365 दिनों के अनुसार 1825 दिनों में 20 लाख 7500 हजार मीट्रिक टन घन कचरा भांडेवाड़ी डम्पिंग यार्ड जा पहुंचा है। इसमें अगर औसत 100 मीट्रिक टन कचरे की प्रक्रिया को आधार माना जाए तो पांच सालों में 1 लाख 82 हजार 500 मीट्रिक टन घन कचरे पर प्रक्रिया हुई है। लिहाजा 18.25 लाख मीट्रिक टन घन कचरा भांडेवाड़ी डम्पिंग यार्ड में बिना प्रक्रिया के पड़ा हुआ है।

मनपा ने हंजर कम्पनी के स्थान पर एस्सल ग्रुप को प्लांट का काम सौपने की प्रक्रिया की है। यहां कचरे को जलाकर बिजली तैयार करने की प्रक्रिया की जाएगी। लेकिन इस ओर अब तक कोई पहल शुरू नहीं हुई है। लेकिन साफ और स्वच्छ दिखाई देनेवाले नागपुर से रोजोना 1100 मीट्रिक टन घन कचरा डम्पिंग यार्ड पहुंच रहा है। इससे पर्यावरण को लेकर गंभीर समस्याएं खड़ी होने के संकेत मिल रहे हैं। जल्द ध्यान ना देने की स्थिति में या तो नया डम्पिंग यार्ड के विकल्प पर विचार करना होगा या नए प्रोसेसिंग प्लांट के विकल्प को तैयार करना होगा।