Published On : Mon, Sep 14th, 2020

माहभर में जेम्बो अस्पताल के स्थापना की हवा निकली

– अब डेडिकेटेड कोविड अस्पताल की संख्या बढ़ाने पर जोर

नागपुर – पिछले माह जिले के पालकमंत्री नितिन राऊत ने मानकापुर स्थित विभागीय खेल संकुल में जम्बो अस्पताल तैयार करने की घोषणा की थी,इसके पूर्व तत्कालीन व विवादास्पद मनपायुक्त तुकाराम मुंढे ने कलमेश्वर मार्ग स्थित राधास्वामी सत्संग परिसर में कोरोना मरीजों के लिए 5000 बेड तैयार करने को खूब प्रचारित किया था।मुंढे के साथ ही पालकमंत्री की खुद की पीठ थपथपाने वाली घोषणों की हवा उड़ गई,जब कल के बैठक में पालकमंत्री ने सम्पूर्ण बैठक में चर्चा के दौरान जम्बो अस्पताल का एक शब्द भी जिक्र नहीं किया। कुछ इस तरह जम्बो अस्पताल की हवा निकलने से सम्पूर्ण जिले में गर्मागर्म चर्चा का विषय बन गया।

कल से पालकमंत्री नितिन राऊत ने जेम्बो अस्पताल की जगह डेडिकेटेड कोविड अस्पताल की संख्या बढ़ाने के लिए उपस्थित अधिकारियों पर दबाव बनाने की जानकारी मिली हैं।

याद रहे कि कोरोना मरीजों के लिए तत्कालीन मनपायुक्त तुकाराम मुंढे की घोषणा प्रत्यक्ष में साकार होने के पहले हवा हो गई,इसके बाद 16 अगस्त को पालकमंत्री राऊत ने विभागीय आयुक्त कार्यालय में एक बैठक लेकर मानकापुर विभागीय खेल संकुल में जेम्बो अस्पताल तैयार करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही जेम्बो अस्पताल निर्माण करने के लिए शालिनी ताई मेघे वैधकीय महाविद्यालय, यशवंत स्टेडियम, पटवर्धन मैदान,वीसीए मैदान के साथ पुनः राधास्वामी सत्संग परिसर भी चर्चा हुई लेकिन पालकमंत्री राऊत ने विभागीय खेल संकुल को तहरिज दी। जेम्बो अस्पताल की जरूरत यह बतलाई गई कि बढ़ते कोरोना मरीजों के लिए मेडिकल,मेयो अस्पताल पर पड़ रहा भार को कम किया जा सकेगा। कोरोना मरीजों के अलावा अन्य बीमार आदि मरीजों का भी इलाज भली भांति हो सकेगा। इस महत्वपूर्ण घोषणा को ठीक 1 माह बाद घोषणकर्ता पालकमंत्री ही भूल गए।

आज की सूरत-ए-हाल यह हैं कि रोजाना कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में सैकड़ों में इजाफा हो रहा (पिछले 15 दिनों में रोजाना औसतन 1500 मरीज रोज निकल रहे )।अपर्याप्त व्यवस्था के कारण रोजाना 4 दर्जन से अधिक कोरोना मरीजों की मृत्यु हो रही।

उल्लेखनीय यह हैं कि प्रशासन सख्त लॉक डाऊन कर बढ़ते कोरोना मरीजों का सिलसिला तोड़ने के बजाय अन्य अस्थाई मार्गों पर ज्यादा सक्रिय हैं। निजी हो या सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए पर्याप्त बेड उपलब्धि का मामला पिछले 15 दिनों से गंभीर हो चुका हैं। बढ़ते मरीजों के हिसाब से उनके इलाज सह देखभाल के लिए अपर्याप्त कर्मियों के कारण मरीजों सह उनके परिजनों का दुखड़ा असहनीय हो चुका हैं।

पर्याप्त बेड सह अस्पतालों सह अन्य जगहों पर सेंट्रलाइज पद्दत से भर्ती प्रक्रिया की सख्त जरूरत हैं। मरीजों के परिजनों द्वारा मुहमांगी पैसे देने के बाद भी उन्हें अस्पतालों में बेड नहीं मिल पा राह,ऑक्सीजन बेड तो कोसों दूर हो गया। आज मरीज को बेड या ऑक्सीजन बेड दिलवाना सबसे बड़ा काम होने के बावजूद सिर्फ बैठक दर बैठक लेकर कागजों को काला पिला किया जा रहा। यहीं आलम रहा तो स्थिति और बिगड़ने की संभावना को जानकर नाकार नहीं पा रहे।प्रशासन की ठोस नीति का अभाव के कारण कहीं न्याय के लिए त्रस्त परिजन न्यायालय की शरण में न चले जाएं तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होंगी।