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    Published On : Mon, Nov 12th, 2018

    रद्द को किसान विरोधी वन्य प्राणी संरक्षण कानून – रघुनाथ पाटिल

    संपूर्ण कर्जमाफी के लिए शीतकालीन अधिवेशन में निकलेगा किसान मोर्चा

    नागपुर : अवनि बाघिन को मारे जाने के मामले में शेतकरी संगठन ने इस कार्रवाई को जायज ठहराया है। शेतकरी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष और सुकाणु समिति के आयोजक रघुनाथ दादा पाटिल इस बाघिन पर की गई कार्रवाई को सही ठहराया है। एक कदम आगे बढ़ते हुए पाटिल ने वन्य प्राणी सरंक्षण कानून को ही बदल डालने की है। पाटिल के मुताबिक ये कानून किसानों के विरोध में लाया गया था। इसी कानून के आधार पर ही बाघिन अवनि को मारा गया। सरकार खेती के सभी उत्पादों पर अपना कंट्रोल चाहती है। यह कानून किसानों के विरोध में ही बना था। वन्य प्राणियों की संख्या काफ़ी बढ़ गई है। प्राणियों ने किसानों को भी मारा है। ऐसे हमलों में मारे जाने वाले को बस नाममात्र का मुआवजा दिया जाता है।

    वन्य प्राणियों द्वारा किसानों की फसल बर्बाद कर दी जाती है जिसका भी नाम मात्र मुआवजा मिलता है। प्राणियों के संरक्षण के नाम पर किसानों को वनक्षेत्र से बाहर निकालने की साजिश चल रही है। चीन में कभी हमने नहीं सुना वन्य पशु प्रेमी होते है। वहाँ वन्य प्राणियों की संख्या को देखते हुए उनके नियंत्रण की उपाययोजना की गई है। हमारे यहाँ प्रयास है की किस तरह प्राणी संरक्षण के नाम पर किसानों को वन क्षेत्र से बाहर निकाला जाये। कानून में बैलों के इस्तेमाल को लेकर दिशा निर्देश है और दूसरी तरफ शाश्वत खेती पद्धति की बात की जाती है।

    दरअसल ये प्रयास व्यापारियों और उद्योगपतियों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए हो रहा है। बैलों का इस्तेमाल बंद होगा तो ट्रैक्टर की खपत होराजर्षि राजश्री शाहू महाराज ने जंगल में जाकर बाघों का शिकार किया था। विदर्भ में वनक्षेत्र ही नहीं ऐसे भी कई क्षेत्र हैं जहां वन्य प्राणियों के भय के कारण किसान खेतों से फसल नहीं ला पाते हैं। पत्रकारपरिषद में जय जवान जय किसान संगठन के संयोजक प्रशांत पवार, रुद्रा कुचनकर,अरुण वनकर, विजय शिंदे, दिनकर दाभाडे, कालीदास आपटे उपस्थित थे।

    संपूर्ण कर्जमाफी के लिए शीतकालीन अधिवेशन में निकलेगा किसान मोर्चा
    किसान नेता रघुनाथ दादा पाटिल ने बताया कि वनक्षेत्र में किसानों व नागरिकों के संरक्षण के अलावा अन्य मुद्दों को लेकर विधानमंडल के शीतसत्र के समय मोर्चा निकाला जाएगा। कल्याण से शुरू होकर ये मोर्चा विधिमंडल पहुँचेगा। 24 नवंबर से तीन दिन किसान अपनी माँग को लेकर अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे। इस मोर्चे में विदर्भ से लगभग 5 हजार किसान हिस्सा लेंगे। किसान संपूर्ण कर्जमाफी,बिजली का बिल पूरी तरह माफ़ किये जाने के साथ ही वन क्षेत्र में वन्य प्राणियों के भय को दूर करने की उपाय योजनाए बनाये जाने की माँग सरकार से करेंगे। पाटिल ने कहाँ कि किसान आज भी लगातार आत्महत्या कर रहे है इसलिए आत्महत्या के मामलों को रोकने के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश को लागू करना होगा।

    उत्पादन खर्च की तुलना में कृषि उपज को 50 प्रतिशत अधिक भाव देने की आवश्यकता है। राज्य के किसानों को अब बिजली के लंबित बिजली बिल भरने की आवश्यकता नहीं है सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। पाटिल के साथ पत्र परिषद में मौजूद वणी के किसान नेता रुद्रा कुचनकर ने बताया कि हालही में 7 नवंबर को वणी में प्राणी परिषद का आयोजन किया गया था। जिसमे पारित प्रस्ताव को राज्य सरकार के पास भी भेजा गया है। विदर्भ के सिर्फ वनक्षेत्र के आस पास ही नहीं कई जगहों पर प्राणी फसलों को नुकसान पहुँचा रहे है।


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