Published On : Wed, Mar 18th, 2020

रंजन गोगोई को राज्यसभा भेजने का , आखिर क्यों जोखिम लिया मोदी सरकार ने ?

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नागपुर– पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को राज्यसभा में नामित करने के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं. इन सवालों के पीछे उनके अयोध्या और राफेल मामलों पर सुनाए गए फैसले हैं. आपको बता दें कि रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में शामिल रहे हैं जिन्होंने उस समय के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन पर पक्षपात के आरोप लगाए थे. इसके बाद रंजन गोगोई एक तरह से नायक बनकर सामने आए क्योंकि माना जा रहा था कि इसके बाद वह देश का प्रधान न्यायाधीश बनने का मौका खो सकते हैं. इन चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस एक तरह से मोदी सरकार को भी लपेट रही थी और यह पीएम मोदी के आलोचकों के लिए एक तरह से हथियार साबित हुई.

जस्टिस दीपक मिश्रा के रिटायर होते होने के बाद रंजन गोगोई ही देश के प्रधान न्यायाधीश बने. लेकिन अयोध्या और राफेल से जुड़े दो मामलों में उनकी अगुवाई में दिए गए फैसले विपक्ष को रास नहीं आए और उनके कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट बहुत ही कम या शायद ही किसी टिप्पणी या फैसले में मोदी सरकार के लिए परेशानी का सबब बना हो. ऐसे में उनका राज्यसभा में जाना लाजिमी है कि सवालों के घेरे में आएगा.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, ‘उनको (रंजन गोगोई) ईमानदारी से समझौता करने के लिए याद किया जाएगा’. एआईएमआईएस प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस फैसले पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने पूर्व CJI पर निशाना साधते हुए कहा कि वो खुद मना करें नहीं तो एक्सपोज हो जाएंगे. ओवैसी ने कहा, ”जस्टिस लोकुर ने जो कहा मैं उससे सहमत हूं. मैं सवाल उठा रहा हूं. न्यायालय पर सवाल उठते है. उनके फैसले से सरकार को लाभ हुआ है. वो खुद मना करें नही तो एक्सपोज हो जाएंगे. जेटली साहेब ने यही कहा था. इनके खिलाफ महिला ने भी शिकायत की थी. संविधान और लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है.

सवाल इस बात का उठता है कि जब सरकार को पता था कि रंजन गोगोई को राज्यसभा भेजे जाने पर विवाद होना निश्चित है तो वह इस फैसले पर आगे क्यों बढ़ी. इस सवाल पर सरकारी के सूत्रों का का कहना है कि मनोनीत सांसदों में विभिन्न क्षेत्र के लोग हैं. लेकिन प्रसिद्ध न्यायविद नहीं था. जस्टिस गोगोई को इसीलिए लाया गया है क्योंकि वे मुख्य न्यायाधीश रहे हैं. देश के प्रसिद्ध न्यायविद हैं. कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं. उनके आने से राज्यभा में बहस को नई धार मिलेगी और ‘हाउस ऑफ़ ऐल्डर्स’ को उनके अनुभवों का लाभ मिलेगा.

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हालांकि बीजेपी नेता मानते हैं कि इसके पीछे असम चुनाव भी एक कारण हो सकता है क्योंकि राज्य में अगले साल चुनाव है. जस्टिस गोगोई जिस समुदाय से आते हैं उसका वहां उनका ख़ासा प्रभाव है. बीजेपी इससे पहले भूपेन्द्र हज़ारिका को भारत रत्न भी दे चुकी है. रंजन गोगोई ने दशकों से लंबित अयोध्या विवाद में फैसला दिया है. वे उस पांच जजों की पीठ के अध्यक्ष थे जिसने राम मंदिर के हक़ में फैसला दिया है. इस फैसले के बाद पूरे देश में सांप्रदायिक सौहार्द बना रहा. यह इस फैसले की एक ख़ास बात है.

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