Published On : Fri, May 15th, 2020

” वेकोलि की प्रगति में कर्मियों की भूमिका अहम “

जितेश ट्विट करते हैं – “इस कम्पनी में काम करने का आनंद सचमुच एकदम अलग है, यहां कर्मियों की व्यक्तिगत देखभाल की जाती है” वह मध्यप्रदेश की भूमिगत खदान छतरपुर-1 में मेकेनिकल फ़िटर हैं. महाराष्ट्र की खुली खदान गोकुल के मैनेजर सुधांशु फेसबुक पर पोस्ट करते हैं – ‘अपना बेहतर रिजल्ट देने के लिए उत्साहित हूं. ‘सोशल मीडिया पर दिल से निकलीं इन तरह की अन्य कई भावनाएं देखने को मिल रही हैं. सारांश यह कि यह पूरा किस्सा उसकी मानव-पूंजी ( Human Capital) की देख-भाल और उसे उत्साहित-प्रेरित करने का है. वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) को अब इसके कर्मी गण ‘टीम वेकोलि’ या “हमारा अपना वेकोलि” कहते हैं, क्योंकि अब वे मानने लगे हैं कि यह उनकी अपनी कम्पनी है और वे वेकोलि परिवार के महत्वपूर्ण, अभिन्न अंग हैं. बदलाव की हवा अब यहां बहने लगी है. कम्पनी की कार्य-संस्कृति में परिवर्तन के लिए, उसके प्रति लगाव की भावना जरूरी है, जिसे वेकोलि में हर कहीं देखा और महसूस किया जा रहा है.

कोयला-उत्पादन करने वाली वेकोलि, कोल इंडिया लिमिटेड की एक अनुषंगी कम्पनी है. महाराष्ट्र तथा मध्यप्रदेश में फैली इस कम्पनी का मुख्यालय नागपुर में है. सार्वजनिक उपक्रमों या अन्य संस्थानों के बीच केस स्टडी के लिए यह कम्पनी उपयुक्त है कि कैसे मानव – पूंजी को महत्वदेने तथा उसे प्रोत्साहित करने से न केवल सकारात्मक बदलाव आ सकता है, बल्कि कम्पनी का विकास हो सकता है और संस्थान की पूरी कार्य-संस्कृति भी बदल सकती है. छह वर्ष पूर्व जो कम्पनी लगभग बंद होने के कगार पर थी, अपनी मानव-पूंजी को उत्साहित और प्रेरित कर अपने “आउट ऑफ़ बॉक्स” कार्यों के साथ विकास और सफ़लता के नये मानदण्ड स्थापित कर रही है, नये प्रतिमान गढ़ रही है.

कोयला-उद्योग के राष्ट्रीयकरण के बाद 1975में वेकोलि अस्तित्व में आई. पर, विरासत में उसे कठिन भू-गर्भीय खनन परिस्थितियों के साथ, बड़ी संख्या में भूमिगत खदानें मिलीं. अवरोधों के बावज़ूद, 2008 तक यह कम्पनी ठीक-ठाक काम करती रही. कोयला-भंडार के समाप्त होते जाने और जमीन की ऊँची दरों के कारण कम्पनी की स्थिति खराब होते-होते 2013 में नौबत यहां तक आ गयी कि इस का बीआईएफ़आर में जाना तय सा हो गया था.

कहा जाता है कि जब सफ़र कठिन लगने लगे तो और ज्यादा जोश के साथ जोर लगाना चाहिए. 2014 के आखिर में नयी सोच के साथ, नये प्रबंधन ने व्यवस्था की बागडोर सम्भाली और कम्पनी को फिर से खड़ा करने के दृढ़ निश्चय के साथ ठोस योजनाओं पर काम शुरू किया गया. पहला – तकनीकी पहलुओं की समीक्षा कर परियोजनाओं को व्यावहारिक और लाभप्रद बनाने तथा भूमि-सुधार के प्रावधानों के तहत आवश्यक भू-अर्जन, दूसरा – सामने दिख रही चुनौतियों से निपटने के लिए मानव-पूंजी में जोश भरना. कम्पनी-कर्मियों के योगदान से सिर्फ़ दो महीने के अंदर विज़न- 2020 तैयार किया गया. इन उपाय-योजनाओं को सफ़ल होते देख जनवरी, 2015 में पहली नयी परियोजना प्रारम्भ की गयी और, एक साल के भीतर कम्पनी ने 12नयी परियोजनाएं खोलकर, उत्पादन में वृद्धि दर्ज़ करना शुरू कर दिया.

सभी के लिए यह सुखद आश्चर्य था कि इस परिवर्तन में तकनीकी और आर एंड आर पहलू के अलावा, मानव-पूंजी का योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण साबित हुआ. वेकोलि ने कम्पनी-कर्मियों में वेकोलि के प्रति अपनत्व और लगाव को बढ़ावा देना शुरू किया. श्रमिकों, मध्यम और उच्चस्तर के अधिकारियों में ऊर्जा का संचार करने के लिए सबसे पहले भावी पीढ़ी -जेन नेक्स्ट को सक्रिय किया गया. सभी क्षेत्रों में योजना बनाने और उनके क्रियान्वयन के लिए जनरल मजदूर से ले कर जनरल मैनेजर तक का “संवाद” ग्रुप बनाया गया. बड़ी संख्या में कर्मियों तक इसे पहुँचाने और उन्हें प्रेरित करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग किया गया.

अब तक यह स्पष्ट नज़र आने लगा था कि वेकोलि फ़िर से उठ खड़ी होगी और अब वह पीछे मुड़कर नहीं देखेगी. वार्षिक उत्पादन में वृद्धि के बावजूद अपने लक्ष्य तक पहुँचने में कम्पनी को सफलता नहीं मिल पा रही थी. अत्यधिक कठिन भू-गर्भीय खनन परिस्थितियों के कारण ज्यादा उत्पादन -लागत होने से कम्पनी की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ नहीं थी. इसलिए, अपनी मूलभूत व्यवस्था को सुदृढ़ करने के अलावा कम्पनी के पास कोई और विकल्प नहीं रह गया था. इसी आलोक में, कम्पनी ने जून, 2018 में “मिशन वेकोलि : 2.0” प्रारम्भ किया. इसके केंद्र में फिर मानव-पूंजी ही प्रमुख थी. जनरल मज़दूर, मशीन ऑपरेटर, कनिष्ठ, मध्य और उच्च अधिकारियों से मिले 10,000से अधिक सुझावों और व्यक्तिगत स्तर पर हुए संवाद ने मिशन को पुख्ता आधार प्रदान किया. टीम वेकोलि ने सचमुच एक टीम की तरह काम करना शुरू किया और उनकी ज़ुबान से नहीं, बल्कि दिल से निकलने लगी– “हमारा वेकोलि, अपना वेकोलि. “उत्साहित कर्मियों के कारण वेकोलि ने अपनी बुनियादी चीजों को ठीक करना शुरू किया.

लाइन फंक्शन और सपोर्ट फंक्शन की जरूरतों और गतिविधयों को चिन्हित कर, समयबद्ध तरीके से कार्य प्रारम्भ किया गया. मानव-पूंजी में ऊर्जा-संचार की गतिविधियाँ लगातार जारी रखी गयीं. वर्ष-2018-19कम्पनी के लिए उल्लेखनीय रहा, जब टीम वेकोलि ने न केवल कोयला-उत्पादन का लक्ष्य पार किया, बल्कि कर-भुगतान के पूर्व सकारात्मक लाभ के साथ 15% की वृद्धि भी दर्ज़ की. पिछले पांच वर्षों में खोली गयीं 20 नयी परियोजनाओं के बड़े योगदान से कम्पनी ने 49.7 मिलियन टन लक्ष्य के मुकाबले 53.14मिलियन टन कोयला-उत्पादन किया. 2019-20 में भी विकास की यही रफ़्तार जारी रही और वेकोलि ने फिर निर्धारित उत्पादन-लक्ष्य से आगे जा कर कोल इंडिया की सभी अनुषंगी कम्पनियों में सर्वाधिक 8.4 % वृद्धि दर्ज की. कोल इंडिया के 1 बिलियन टन कोयला-उत्पादन लक्ष्य में सहयोग के लिए वेकोलि अब 2023-24 में 75 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने की ओर अग्रसर है.

कम्पनी के उत्साही कर्मियों ने न केवल उत्पादन और वित्तीय मोर्चों पर वेकोलि को मजबूत करने में कम्पनी की मदद की, अपितु 2015से ही बीच-बीच में आउट ऑफ़ बॉक्स सोच को भी क्रियान्वित करना शुरू किया. राष्ट्र की प्राथमिकता के अनुरूप, वेकोलि ईको-माइन टूरिज़्म, खदान से निकले पानी का सिंचाई के लिए उपयोग, पीने के लिए कोल नीर तथा ओवर बर्डन से रेत निकाल कर सामान्य जन के लिए सस्ती दर पर उपलब्ध करवाने का फ्लैगशिप कार्यक्रम शुरू कर प्रशंसा की पात्र बनी. हम यह कह सकते हैं कि वेकोलि ने “फर्श से अर्श” की यात्रा बख़ूबी पूरी की है. इन सभी गतिविधियों में कम्पनी में विभिन्न स्तरों पर मित्र, शक्ति और सिनर्जी जैसी सशक्त, ऊर्जावान टीमें रात-दिन सक्रिय रहीं.

वर्तमान में, कोरोना वायरस के गंभीर संकट के दौरान भी आवश्यक सेवाओं में शामिल कोयला उद्योग के कम्पनी- कर्मी, पूरे देश में लॉकडाउन के बावजूद राष्ट्र की ऊर्जा-जरूरतों की पूर्ति के लिए काम कर रहे हैं. अपने कर्मियों के अतिरिक्त ठेका-कर्मियों से भी उच्च प्रबंधन मोबाइल फोन पर सीधा संवाद कर उनकी सलामती की जानकारी ले रहा है. कठिनाई की इस घड़ी में, अन्य कर्मी भी स्वेच्छा से आम जरुरतमन्द लोगों की मदद के लिए आगे आकर, उन्हें भोजन तथा दूसरी आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करवा रहे हैं. पर्दे के पीछे 24 X 7 कार्यरत ये कोरोना कोयला-योद्धा वाकई सराहना के पात्र हैं.