Published On : Mon, Sep 22nd, 2014

वेकोलि के वफादार : चुनाव के बहाने ड्यूटी से गुल, पर पगार ले रहे फुल !

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नागपुर टुडे.

वेस्टर्न कोल्फ़ील्ड्स लिमिटेड पूर्णतः सरकारी इकाई नहीं है,लेकिन अधीनस्थ जरूर है. इसलिए अधिकांश मामलों में उसका खुद का निर्णय सर्वोपरि होता है. इसलिए अधिकारी सह कर्मचारी भी सरकारी नियमों को ताक पर रख अपनी मनमानी करने में कोई कसार नहीं छोड़ते हैं. ताजा मामला विधान सभा चुनाव को लेकर सामने आया है ?
वेकोलि मुख्यालय के अधिकारी हों या कर्मचारी या फिर खदान कर्मी, चुनाव आते ही अपनी रोजमर्रा के कार्य छोड़कर महीनों हाजिरी लगाये या फिर बिना लगाये चुनावी कार्यो में भाग लेते नज़र आएंगे। आगामी विधानसभा चुनाव हेतु नागपुर, चंद्रपुर, यवतमाळ जिले के वेकोलि खदानों के अधिकारी-कर्मचारी पिछले १५ दिनों से अपने कार्यस्थल से गायब हैं. पता चला है कि सभी अपने-अपने इच्छुक दल सह उम्मीदवार के साथ चुनावी कार्यों में शिद्दत से भिड़े हुए हैं. सूत्र बताते हैं कि शायद इतनी शिद्दत से अपनी रोजी-रोटी देने वाले कार्य-विभाग से जुड़े होते तो विभाग का आज कायाकल्प हो गया होता।
वेकोलि के मुख्यालय के साथ साथ प्रत्येक खदान में कम से कम एक दर्ज़न से अधिक ऐसे अधिकारी-कर्मचारी देखने को मिल जाएंगे है, जो आए दिन किसी न किसी बहाने से अधिकृत-अनाधिकृत छुट्टी पर रहते हैं और पूरे वेतन के साथ साथ  अन्य लाभ उठाते हैं ।

३०० अधिकारी-कर्मचारी गायब!
विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र वेकोलि के लगभग ३०० अधिकारी-कर्मचारी वेकोलि प्रशासन द्वारा दिए गए जिम्मेदारी को छोड़ अपने  ऊपरी अधिकारी को पक्ष में लेकर या उन्हें डरा-धमकाकर पिछले १५ दिनों से गायब है और अगले एक माह यानि २० अक्टूबर तक गायब रहेंगे। संबंधित प्रशासन को पता रहने के बावजूद गायब होने वाले कर्मियों को पूरा वेतन देने का सिलसिला जारी है.
सबसे अहम यह है कि वेकोलि मुख्यालय के अधिकारियों की चुप्पी समझ से परे है.क्या वेकोलि प्रशासन पर बाहरी जनप्रतिनिधियों का खौफ है ?

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आधे एकड़ पर दी जाती है जमीनधारको को नौकरी
दो सप्ताह पूर्व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रवि भवन में वेकोलि दिग्गज अधिकारियों की अहम बैठक ली. बैठक में उन्होंने वेकोलि अध्यक्ष एवं प्रबंधक को फटकार लगाते हुए पूछा कि आधी एकड़ जमीन अधिग्रहण करने पर नौकरी किस आधार या नियम के तहत दी जा रही  है. जबकि नियमानुसार जमीनें अधिग्रहित नहीं की जा रही है. अधिग्रहित की गई जमीन पर प्रत्येक २-२ एकड़ पर १-१ नौकरी एवं मुआवजे का प्रावधान है। गडकरी ने चेताया कि वेकोलि में गोरखधंधा अविलंब बंद हो जाना चाहिए। अगर वक़्त पर वेकोलि प्रशासन ने जमीनें अधिग्रहित की होती तो वेकोलि की प्रलंबित खदानें खुलकर उत्पादन का सिलसिला जारी होता और जमीन धारकों को नौकरी भी मिल गई होती।

खदानों की कॉलोनियों पर अवैध कब्ज़ा
वेकोलि की कन्हान(टेकाडी कॉलोनी) स्थित खदानों सह अन्य खदानों के लिए निर्मित खदानों में जरूरतमंद कर्मियों को जगह उपलब्ध करवाने की बजाय बाहर के लोगों के कब्जे को बरक़रार रखा गया है. वेकोलि प्रशासन की शाह पर अधिकांश कॉलोनियों में बाहर के लोग कब्ज़ा जमाए बैठे हैं. इसके अलावा आसपास की  जमीनों पर भी कब्ज़ा है. नागपुर स्थित मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय अंतर्गत खदानों का तो यही आलम है. यहाँ के मुख्यमहाप्रबंधक की शह पर कॉलोनियों के क्वार्टरों  पर तो कब्ज़ा है ही, इसके अलावा कॉलोनी की खाली जमीन सह खदान क्षेत्र में रिक्त जमीनो  पर  कब्ज़ा दिनों दिन बढ़ते जा रहा है.

बाहरी बच्चों से वसूल रहे स्कूल बस का किराया
वेकोलि प्रशासन ने कर्मियों के बच्चों को  स्कूल-कॉलेज आवाजाही हेतु ठेके पर निजी बसें उपलब्ध करवाई है, इन बसों के मालक वेकोलि के बच्चों के अलावा बाहरी प्रत्येक बच्चों को ५-६ सौ रूपए माहवारी पर लाते-ले जाते है. कोराडी रोड निवासी एक पालक नारनवरे के अनुसार सैकड़ो बाहरी बच्चे इसी पद्दत से आवाजाही करते है.

द्वारा:-राजीव रंजन कुशवाहा

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