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Published On : Wed, May 16th, 2018

स्कूल बस घोटाला : बालाजी ट्रेवल्स को बचाने के लिए व्यंकटेश ट्रेवल्स को किया ‘ब्लैकलिस्ट’ वेकोलि प्रबंधन की शह पर

नागपुर: राज्य परिवहन विभाग के स्कूल बसों के निर्धारित किए गए मानकों का उल्लंघन करने वाली गोंदिया की बालाजी ट्रेवल्स ने पोल खुलते ही पिछले सप्ताह अपनी फर्जी स्कूल बस को कथित रूप से वेकोलि प्रबंधन की शह पर चालक के हाथों गायब करवा दिया था. फिर २ दिन बाद पीली रंग (कंपनी कलर) की गाड़ी पेश की गई. इस लीपापोती पर वेकोलि के वणी नार्थ ऑफिस और न ही नागपुर स्थित वेकोलि मुख्यालय के दिग्गज अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं.

इस मामले में सीबीआई के हरकत में आने और नागपुर टुडे की नियमित दखल के कारण सकते में आए वेकोलि प्रबंधन ने बालाजी ट्रेवल्स को संरक्षण देने के लिए इस समूह की व्यंकटेश ट्रेवल्स को सिर्फ वेकोलि की वणी नार्थ के आधा दर्जन से अधिक खदानों में से एक खदान से मात्र एक वर्ष के लिए ‘ब्लैकलिस्ट’ कर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है. वेकोलि प्रबंधन के इस रुख से नाराज इंटक नेता आबिद हुसैन ज़हीद हुसैन ने बालाजी ट्रेवल्स को वेकोलि से काली सूची में डालने और इस सन्दर्भ में पूर्ण प्रकरण की जांच सीबीआई जैसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से करवाने की मांग की.

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बादल दिया बस का रंग
ज्ञात हो कि मामला सार्वजानिक होते ही बालाजी ट्रेवल्स ने नार्थ वणी के खदान कर्मियों के बच्चों को स्कूल आवाजाही के लिए सफ़ेद रंग की स्कूल बस लगाई थी. जबकि स्कूल बस के लिए राज्य परिवहन विभाग के नियमावली के अनुसार पीले रंग के साथ बस का 27 मानकों पर खरा उतरना अनिवार्य है. इस मामले की पोल स्थानीय इंटक नेता आबिद हुसैन ज़हीद हुसैन ने खोल वेकोलि क्षेत्रीय प्रशासन को कानूनन कार्रवाई की मांग कर ही रहे थे कि बालाजी ट्रेवल्स के संचालक ने अपने बस चालक के हाथों वेकोलि अधिकारियों को विश्वास में लेकर बस गायब करवा दी.

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जांच से हो सकते हैं कई खुलासे
आबिद हुसैन ज़हीद हुसैन के अनुसार २८ अप्रैल को बालाजी ट्रेवल्स द्वारा पीले रंग (कंपनी कलर) की गाड़ी नार्थ वणी के सम्बंधित क्षेत्र में भेज दी गई. पुरानी सफ़ेद बस और नई भेजी गई पीली बस वह भी कंपनी द्वारा रंगी गई बस, दोनों अलग-अलग होने का दावा आबिद हुसैन ने किया हैं. इनके अनुसार पुरानी सफ़ेद बस के प्रस्तुत कागजात और भेजी गई पीली बस की जाँच की गई तो कई खुलासा हो सकता है.

जुगाड़ लगाकर हासिल किया था टेंडर
उल्लेखनीय यह है कि वेकोलि के नार्थ वणी क्षेत्र ने एक माह पूर्व खदानों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों के बच्चों को स्कूल आवाजाही के लिए निविदा जारी की गई थी. इस निविदा की शर्तों के अनुसार स्कूल बस आरटीओ में 27 मानकों को पूरा करने के बाद पंजीकृत किया जाता है, साथ ही ये बस भी 54 सीटर होनी चाहिए. अमूमन स्कूल बस में बच्चों को चढ़ने-उतरने के लिए सीढ़ियों में अतिरिक्त पायदान (स्टेप्स) होना अति-आवश्यक है. गोंदिया की चर्चित बालाजी ट्रेवल्स ने यह टेंडर हासिल करने के लिए जोर लगाया. लेकिन वेकोलि के संबंधितों ने सलाह दी कि वे बालाजी के नाम से टेंडर उठाने के बजाय नई फर्म से टेंडर प्रक्रिया में भाग लें. बालाजी ट्रेवल्स समूह के प्रमुख गुप्ता अपनी पत्नी के नाम (व्यंकटेश टूर्स एंड ट्रेवल्स) से फर्जी दस्तावेजों को जमा कर टेंडर हासिल करने में सफल हुए. टेंडर मिलने के बाद गुप्ता ने आरटीओ के नियमों का उल्लंघन करना शुरू किया. यह स्कूल बस 54 के बजाय 51 सीटर और बस पीली की बजाय सफ़ेद दौड़ाई जा रही है. इस बस में खिड़कियों पर 2-2 बार (रॉड) हैं,जबकि स्कूल बस में बच्चों की सुरक्षा के मद्देनज़र 4-4 रॉड होनी चाहिए. उधर गुप्ता ने उक्त बस जिस कंपनी से खरीदी (जायका) उनका कहना है कि बालाजी ट्रेवल्स गोंदिया ने 7-8 माह पहले एक स्टाफ बस बेचीं थी. स्टाफ बस में खिड़कियों पर 2-2 रॉड थी.

लीपापोती का प्रयास
बालाजी ट्रेवल्स जो टेंडर हथियाने के लिए अपने निकटवर्ती परिजन के नाम का दुरुपयोग किया था.इस मामले के खिलाफ आबिद हुसैन की वेकोलि में दौड़म-भाग से प्रकरण को सीबीआई ने भी गंभीरता से लिया है.जिसको ठंडा करने के लिए वेकोलि प्रबंधन ने बालाजी ट्रेवल्स को बचाने के लिए सिर्फ वेकोलि की वणी नार्थ से ‘ब्लैकलिस्ट’ कर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की.

राजीव रंजन कुशवाहा

Bebaak
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