Published On : Fri, Apr 2nd, 2021

WCL : RTI का जवाब कह रहा APPROVED GRADE और REALISATION GRADE में बड़ा फर्क

– RTI के तहत उत्पादन हो रहे GRADE की जानकारी दी गई,शेष जानकारी छिपाई जा रही,दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2016-17 के बाद सभी खदानों का GRADE SEEPAGE होता दिख रहा

नागपुर : WCL अंतर्गत MINES शुरू करने हेतु GEOLOGICAL AND MINING सर्वे बाद खदानों को मंजूरी दिलवाने के लिए जिस GRADE को सामने रखा जाता हैं,अर्थात जिस GRADE के आधार पर खदान शुरू करने की मान्यता मिलती हैं उसके उलट जब उत्पादन शुरू किया जाता तो दर्शाया गया GRADE कम हो जाता हैं.इससे WCL को बड़ा राजस्व नुकसान हो रहा हैं.इस शंका के मद्देनज़र RTI द्वारा निम्न जानकारी मांगी गई थी.

1. वर्ष 2014 से दिसंबर 2020 तक नए खदानों का APPROVED COAL GRADE का ब्यौरा उपलब्ध करवाए

2. उक्त खदानों से उत्पादित हो रहे कोयले की GRADE का विवरण दे

3. उक्त खदानों के लिए क्षेत्र तय होने के बाद अधिग्रहण संबंधी सम्पूर्ण ब्यौरा (सेक्शन वाइज ,दिनांक सह नियमावली ) उपलब्ध करवाए।

इसके जवाब में वेकोलि मुख्यालय के महाप्रबंधक (गुणवत्ता नियंत्रण) ने 18 मार्च को जानकारी दी कि

1. WCL में वर्ष 2014 से दिसंबर 2020 के मध्य खोले गए खदानों के लिए अनुमोदित कोयले की GRADE का वर्षवार ब्यौरा दिया गया.

जिसमें वर्ष 2016-17 के बाद GRADE SEEPAGE सभी खदानों में साफ़-साफ़ नज़र आ रहा.

2. उपरोक्त खदानों से कोयला का उत्पादन वर्ष 2020-21 के कॉलम में दर्शित GRADE के अनुसार ही हो रहा हैं.

इन्होंने APPROVED GRADE की जानकारी नहीं दी

३.आवेदक द्वारा क्रमांक 3 के अंतर्गत मांगी गई जानकारी विभाग के पास उपलब्ध नहीं

इनका काम था,जिस विभाग से सम्बंधित हो मुद्दा भेज कर सम्बंधित विभाग को जानकारी देने के लिए गुजारिश करना या फिर उनसे जानकारी लेकर आवेदक को पूर्ति करना,लेकिन उन्होंने सिरे से हाथ खड़ा कर दिए.

ज्ञात हो कि कोयले का ग्रेड Central Institute of Mining and Fuel Research (CIMFR) घोषित करती हैं.कोयले के ग्राहक को तय GRADE का कोयला नहीं देने पर ,WCL को उसका पैसा नहीं मिलता हैं.नियमनुसार WCL ने जिस GRADE को दर्शाकर कोयला बेचा और ग्राहक ने कोयला का GRADE जांचा ,जिसमें 2 ग्रेड कम पाया गया तो WCL को राजस्व का नुकसान होता हैं.

या फिर WCL के सम्बंधित अधिकारियों के सांठगांठ से सांठगांठ वाली समूह को मुफ्त में कोयला देने के लिए गुणवत्तापूर्ण कोयले में पत्थर मिलाकर उन्हें SUPPLY कर दिया जाता हैं और जब उक्त कंपनी GRADE CHECK REPORT पेश करती हैं तो उसमें दर्शाये गए GRADE कम होने के कारण उन्हें मुफ्त में कोयला मिल जाता हैं.

पिछले वर्ष डुमरी कोल साइडिंग से कोयला ग्राहक के पास गया और कई रैक के पैसे आजतक WCL को नहीं मिले।
उक्त मामले की गंभीरता को देखते हुए एमओडीआई फाउंडेशन (MODI FOUNDATION) ने नए CMD मनोज कुमार गुप्ता से मांग की थी कि उक्त मामले को सूक्ष्मता से जाँच करें और ठोस उपाययोजना कर WCL को आर्थिक तंगी से उबारने की कोशिश करें।

उक्त मांग सह आगाह करने के बावजूद गर WCL HQ के GM का उक्त प्रकार से जवाब देने का मतलब साफ़ हैं ‘चिराग तले अंधेरा’. सभी मिलकर नए CMD के सकारात्मक उद्देश्य पर पानी फेरने के लिए जीतोड़ कोशिश कर रहे.