Published On : Wed, May 6th, 2015

पुसद : वर्धा-नांदेड रेलवे : संघर्ष समिति का जनसंपर्क अभियान


जनता व लोकप्रतिनिधियों को सक्रीय होने का आवाहन  

पुसद (यवतमाल)। वर्धा-नांदेड रेलवे के संदर्भ में सोई सरकार को उठाने के लिए रेलवे संघर्ष समिति ने जनसंपर्क अभियान शुरू किया है. महानगरों के विकास के लिए प्रावधानों की तुलना में छोटे शहर व गांव पर होनेवाले अत्याचार पर प्रकाश डालने वाले पत्र जनता में वितरित किये जा रहे है.

संघर्ष समिति के अध्यक्ष एड. ज्ञानेंद्र कुशवाह ने कहां कि, 2014 के अंतरिम बजट ने वर्धा-नांदेड रेलवे को ठेंगा दिखाया है तथा 2015 के रेल बजट में महाराष्ट्र के हिस्से में 11 हजार 441 करोड़ रूपये आये है. उसमे से कुछ रकम महानगर के विकास के लिए खर्च हो रही है. 60 किमी लंबाई वाले विरार-डहाणू मार्ग चौड़ीकरण के लिए 3,555 करोड रूपये तथा पनवेल कर्जत रेलवे मार्ग के लिए 2,024 करोड रूपये इस वर्ष के लिए मंजूर हुए है. इस पर 274 किमी लंबाई के वर्धा-नांदेड रेलवे के लिए किये जानेवाले भूसंपादन के लिए लगने वाले केवल साडे बारा करोड रूपये भी राज्य सरकार की ओर नही है? ऐसा प्रश्न उपस्थित हो रहा है. राज्य शासन ने भी उस खर्च का 40 प्रतिशत हिस्सा न उठाकर अपनी उदासीनता प्रकट की है. उसने इस प्रकल्प के लिए 1,000 करोड रूपये एक बार देकर हम विकास के लिए प्रतिबद्ध है ऐसा दिखा दिया है.

जब तक जनता अपने न्याय हक्क के लिए अपनी आवाज बुलंद नही करती तब तक शासन दरबार में उसकी दखल नही ली जाएगी. उसके लिए संघर्ष समिति के सदस्य लोगों से मिलकर इसी मुद्दे पर सक्रीय होने के लिए आवाहन कर रहे है. इस अभियान में एड. उमेश चिट्टरवार, मनीष दशरथकर, विष्णु धुले, दिगंबर लोहटे, ओम लोहटे, विलास बोरकर, आदि शामिल है.
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