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    Published On : Sun, Aug 5th, 2018

    आरेंज सिटी स्ट्रीट में बनेगा ‘मेडिकल हब’

    नागपुर: वर्षों से प्रलंबित मनपा के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के कार्य की शुरुआत अब जल्द ही होने वाली है. इस प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए राज्य सरकार ने 200 करोड़ रुपये कर्ज लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. यह जानकारी स्थायी समिति सभापति विक्की कुकरेजा ने दी. उन्होंने बताया कि मनपा खुद इस प्रोजेक्ट को डेवलप कर बेचेगी ताकि मनपा के आय का रास्ता भी बने.

    यह वायबल हो, इसलिए चरणबद्ध तरीके से प्रोजेक्ट को साकार किया जाएगा. जिसमें सबसे पहले जमीन के बीच में 10 लाख वर्गफीट जमीन पर ‘मेडिकल हब’ साकार किया जाएगा. इसके अलावा इंजीनियर्स, अन्य प्रोफेशनल्स के लिए चेंबर भी साकार किए जाएंगे. प्रोजेक्ट को वायबल बनाने के लिए 21 प्लाट्स में बांटकर एक के बाद एक डेवलप करने का प्लान है. इसे 7 जोन में विभाजित किया गया है. मनपा प्रशासन व भाजपा इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता से पूरा करना चाहती है.

    ट्रांजक्शन एडवाइजर की नियुक्ति
    वर्धा रोड होटल रेडिसन्स ब्लू से सीआरपीएफ क्षेत्र में मौजा सोमलवाड़ा, खामला, भामटी, टाकली व जयताला परिसर में मनपा की 30.49 हेक्टेयर जमीन पर आरेंज सिटी प्रोजेक्ट साकार करने के लिए दूसरी निविदा में मेसर्स वेस्टियन ग्लोबल वर्क प्लेसेस सर्विसेस प्रा. लिमिटेड एंड वेंकटेश्वरा हैबिटैट एलएलपी कनसोर्टियम को ट्रांजक्शन एडवाइजर नियुक्त किया गया है, जिसे टेंडर की शर्तनुसार एक्टिविटी-1 व 2 के लिए एक करोड़ रुपये दिए जाएंगे. 15 हफ्तों में वेस्टियन को प्रोजेक्ट की रिपोर्ट बनाकर देनी है. उन्होंने बताया कि इस पूरे प्रोजेक्ट को 8 से 10 वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. यहां लोगों के लिए उचित दरों पर घर भी बनाकर दिए जाएंगे. इसके अलावा सभी मूलभूत सुविधाएं, बाजार आदि भी नियोजित किए जाएंगे.

    मेट्रो स्टेशन के पास ‘मेट्रो मॉल’
    कुकरेजा ने बताया कि मेडिकल हब का निर्माण पहले करने का प्लान किया गया है और उसके बाद जयप्रकाशनगर मेट्रो स्टेशन के समीप ‘मेट्रो माल्स’ का निर्माण किया जाएगा. मनपा चरणबद्ध तरीके से एक-एक प्रोजेक्ट को साकार करेगी और उसे बेचकर प्राप्त आय से ही दूसरी स्कीमों को साकार किया जाएगा. यह मनपा द्वारा स्वनिधि से तैयार किया गया पूरी तरह से अपना प्रोजेक्ट होगा, जिसे विश्वस्तरीय बनाने की योजना है.

    पर्यावरणीय एनओसी की जरूरत नहीं
    बताया गया कि चूंकि 2 लाख वर्गफुट से अधिक के प्रोजेक्ट को ही पर्यावरण विभाग की एनओसी लगती है इसलिए आरेंज सिटी के किसी प्रोजेक्ट के लिए इसकी जरूरत नहीं होगी. बावजूद इसके यह प्रोजेक्ट पहले सिंगल प्रोजेक्ट था, इसलिए साल भर पहले केन्द्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को एनओसी के लिए प्रस्ताव भेजा गया था. आगे कोई आब्जेक्शन न ले, इसलिए पर्यावरण की अनुमति भी ली जा रही है जो जल्द ही मिल जाएगी.

    एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि आरेंज सिटी प्रोजेक्ट की जमीन के अतिक्रमण हटाए जाएंगे और जो रोड इस जमीन में अवैध रूप से बनाए गए हैं, उन्हें हटाया जाएगा.


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