Published On : Wed, Jul 18th, 2018

सुविधाओं के आभाव में एमपीएससी की पूर्व परीक्षा में फिर पिछड़े विदर्भ के परीक्षार्थी

नागपुर: महाराष्ट्र में एक बार फिर विदर्भ के विद्यार्थी पिछड़ गए हैं. एमपीएससी की परीक्षा में नागपुर समेत विदर्भ के विभिन्न जिलों के आकड़े काफी चिंताजनक हैं. जिसके कारण विदर्भ के विद्यार्थियों के समुचित विकास के लिए सरकार की पहल की जरूरत अब महसूस होने लगी है.13 मई 2018 को महाराष्ट्र दुय्यम सेवा पूर्व परीक्षा हुई थी. 547 पदों के लिए ली गई

इस परीक्षा में एएसओ के 136, एसटीआय- 34 और पीएसआय के 387 पद भरे जाने हैं. इस परीक्षा में स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर के लिए नागपुर के 19, अमरावती के 11, अकोला के 5, गडचिरोली के 3,चंद्रपुर के 4, बुलढाणा के 6, वर्धा के 2, वाशिम 2 और यवतमाल के 5 विद्यार्थी मेंस की परीक्षा देंगे. यानी कुल मिलाकर 776 विद्यार्थी पास हुए हैं.

इनमें पुणे से सबसे ज्यादा 364 विद्यार्थी पास हुए हैं. पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाड़ा के विधार्थी इसमें आगे रहे हैं. असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (एएसओ ) केें पद के लिए 2407 पास हुए हैैं. इसमें नागपुर के 44, अकोला के 15, अमरावती 37, भंडारा के 2, बुलढाणा के 21, चंद्रपुर के 12, गडचिरोली के 5, गोंदिया का 1, वर्धा के 5, वाशिम के 18 और यवतमाल से 17 विद्यार्थियों ने पूर्व परीक्षा पास की है. इनमें भी मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के विद्यार्थियों का ही बोलबाला रहा है. इसमें पुणे के 1077, सातारा के 95, सोलापुर के 44, ठाणे के 31, सांगली के 106, औरंगाबाद के 156 अहमदनगर के 106, कोल्हापुर के 172 विद्यार्थी मेंस के लिए पात्र हुए हैं. इसके परिणाम 9,10 और 11 जुलाई को घोषित हुए हैं.मेन्स की परीक्षा अगस्त, सितम्बर और अक्टूबर में होगी. पिछले साल भी विदर्भ की एसटीआई में 8 %, पीएसआय में 9 %, एएसओ का 8 % प्रतिशत ही रहा था.

पीएसआई के लिए 7618 विद्यार्थियों ने पूर्व परीक्षा पास की है. इसमें नागपुर के 138, अकोला के 85, अमरावती के 141, भंडारा के 21, बुलढाणा के 74, चंद्रपुर के 45, गड़चिरोली के 25, गोंदिया के 10, वर्धा के 26, वाशिम के 66 और यवतमाल के 70 विद्यार्थी हैं. इसमें भी पुणे के 3110 विद्यार्थियों ने परीक्षा पास की है. उस्मानाबाद के 94, परभणी के 74, सांगली के 313, सातारा 288, ठाणे के 133, अहमदनगर के 353, औरंगाबाद के 531, समेत अन्य जिलों के विद्यार्थी भी शामिल हैं.

कुल पद और विदर्भ के विद्यार्थियों की संख्या
एएसओ के लिए कुल 136 पद हैं. जिसके लिए 2407 लोग पास हुए हैं.इसमें विदर्भ के 177 विद्यार्थी पास हुए हैं. जिसमे विदर्भ के विद्यार्थियों के प्रतिशत की बात करें तो वह केवल 7. 35 % प्रतिशत ही है. एसटीआय की 34 पद के लिए 776 विद्यार्थी पास हुए हैं. जिसमें विदर्भ के 57 विद्यार्थी शामिल हैं. इसमें विदर्भ के विद्यार्थियों का प्रतिशत 7.34 % है. पीएसआय के 387 पद हैं. जिसके लिए सबसे ज्यादा 7618 विद्यार्थी मेंस के लिए क्वालीफाई हुए हैं. इसमें विदर्भ के 627 विद्यार्थी हैं. इसमें विदर्भ के विद्यार्थियों का प्रतिशत भी 8.23 % है.

संसाधन के बावजूद भी विद्यार्थी नहीं बढ़ा आंकड़ा
शहर में कई जगहों पर कोचिंग क्लासेस उपलब्ध हैं. बावजूद इसके विदर्भ के विद्यार्थी पिछड़ रहे हैं. लाइब्रेरी में सुबह से शाम तक विद्यार्थी पढ़ते हुए दिखाई देते हैं. लेकिन उन्हें उचित मार्गदर्शन नहीं मिलने से ही वे एमपीएससी की परीक्षा में पिछड़ रहे हैं.

क्या विदर्भ के विद्यार्थियों के लिए अलग पदों का हो निर्माण
विदर्भ के विद्यार्थी पश्चिम महाराष्ट्र के विद्यार्थियों से पिछड़ रहे हैं. अभी पूर्व परीक्षा का रिजल्ट आया है. जिसके बाद मेंस की परीक्षा होगी और रिजल्ट घोषित किया जाएगा. मेंस की परीक्षा में विदर्भ के विद्यार्थियों का रिजल्ट और भी खराब आने की आशंका जाई जा रही है. लेकिन यह केवल इस वर्ष की बात नहीं है. पिछले वर्ष भी इसी तरह परीक्षा में विदर्भ के विद्यार्थी पिछड़ गए थे.

विद्यार्थियों का क्या है कहना
एमपीएससी की तैयारी कर रहे विद्यार्थी घपेश धवले ने बताया कि पुणे में विद्यार्थियों को काफी अच्छा गाइडेंस मिलता है. नोट्स की उपलब्धता भी बढ़ जाती है. कई नौकरी और पदभरती में पुणे में जल्दी पता चलता है. कई तरह की सुविधाएं पुणे में ज्यादा हैं. इसलिए वहां के विद्यार्थी एमपीएससी में आगे रहते हैं.

नागपुर के कोचिंग संचालक क्या कहते हैं

नागपुर के यूनिक अकादमी के संचालक प्रफुल पाटिल ने बताया कि पुणे में ज्यादतर विद्यार्थियों दूसरे जिलों से हैं. पुणे के विद्यार्थियों को समाचारपत्र पढ़ने की आदत है. लेकिन नागपुर के विद्यार्थी समाचारपत्र को कम पढ़ते हैं. उनका कहना है कि सरकार को विदर्भ के विद्यार्थियों के लिए अलग जगह निकालनी होगी. हालांकि यह संभव नहीं है. यह मान्य नहीं होगा. पुणे में लाइब्रेरी और क्लासेज का ध्रुवीकरण हुआ है.

ज्यादातर विद्यार्थी पुणे के नहीं होते हैं. पिछले 15 साल में विदर्भ और नागपुर में एमपीएससी का क्रेज आया है. लेकिन वहां इससे पहले से युवाओं में इस परीक्षा को लेकर जागरुकता है. पूर्व विदर्भ के विद्यार्थी इश मामले में और भी पीछे हैं.