Published On : Sat, May 2nd, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

वीआईए ने वीटीपीए के साथ मिलकर “नया आयकर अधिनियम, 2025” पर पूर्ण दिवसीय सेमिनार आयोजित किया

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विदर्भ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (वीआईए) के कराधान एवं कॉर्पोरेट विधि मंच ने विदर्भ टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन (वीटीपीए) के साथ संयुक्त रूप से “नया आयकर अधिनियम, 2025” विषय पर एक पूर्ण दिवसीय सेमिनार वीआईए हॉल, उद्योग भवन, सिविल लाइंस, नागपुर में आयोजित किया।

इस सेमिनार का उद्देश्य 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए आयकर अधिनियम, 2025 के प्रावधानों की व्यापक जानकारी प्रदान करना था।

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May 02- 2026 - Time 10.30Hrs
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सीए नरेश जाखोटिया, उपाध्यक्ष – वीआईए ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया और समयानुकूल इस सत्र के आयोजन के लिए कर मंच की सराहना की। उन्होंने देश के श्रेष्ठ वक्ताओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए भी आभार व्यक्त किया।

सीए अशोक चांडक, अध्यक्ष – वीआईए कराधान एवं कॉर्पोरेट विधि मंच ने अपने उद्घाटन भाषण में सरकार की इस पहल की सराहना की और कम समय में नए आयकर अधिनियम के मसौदे एवं क्रियान्वयन को सफल बनाने के लिए प्रशंसा व्यक्त की। उन्होंने भारतीय आयकर कानून के इतिहास और यात्रा पर भी प्रकाश डाला।

सीए महेंद्र जैन, अध्यक्ष – वीटीपीए ने सेमिनार की संरचना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले आयकर अधिनियम, 2025 को समझना हमारा उद्देश्य है। यह परिवर्तन भारत की वित्तीय नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। वीटीपीए के साथ सहयोग के माध्यम से हम अपने सदस्यों को नए वैधानिक प्रावधानों को समझने और लागू करने में सक्षम बनाना चाहते हैं।

मुख्य अतिथि डॉ. सिबिचेन के मैथ्यू, भारतीय राजस्व सेवा, महानिदेशक, राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी, नागपुर ने सेमिनार का उद्घाटन करते हुए कहा कि आयकर अधिनियम, 2025 करदाता-केंद्रित प्रणाली की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव है। उन्होंने बताया कि आयकर विभाग के अधिकारियों ने निरंतर कार्य करते हुए इसे देशहित में तैयार किया है। उन्होंने यह भी बताया कि नए अधिनियम में 1961 के 819 धाराओं की जगह 536 धाराओं का सरलीकृत ढांचा प्रस्तुत किया गया है।

डॉ. मैथ्यू ने “कर वर्ष” की एक समान अवधारणा के परिचय पर प्रकाश डाला, जो पूर्व के मूल्यांकन वर्ष और पूर्व वर्ष की जटिल प्रणाली को समाप्त करता है। उन्होंने टीडीएस प्रावधानों के एकीकरण को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस सुधार का मुख्य उद्देश्य डिजिटल प्रणाली और फेसलेस प्रक्रिया के माध्यम से स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देना है।

पहला तकनीकी सत्र “आयकर अधिनियम, 2025 को समझना : क्या बदला? क्या यथावत है?” विषय पर आयोजित किया गया, जिसका समन्वय सीए राजेश चांडक, उपाध्यक्ष – वीटीपीए ने किया। सीए आर. बुपथी (चेन्नई) ने करदाताओं की अनेक शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2026 से पूर्व की सभी कार्यवाहियाँ पुराने 1961 अधिनियम के अंतर्गत ही रहेंगी।

उन्होंने यह भी बताया कि 31 मार्च 2026 से पूर्व दाखिल किए गए आयकर रिटर्न से संबंधित सभी आकलन, अपील एवं अनुपालन पुराने अधिनियम के अनुसार ही होंगे। राहत के रूप में उन्होंने मानक कटौती को ₹75,000 तक बढ़ाने और धारा 87ए के तहत ₹12 लाख तक की आय को करमुक्त करने के प्रावधान का उल्लेख किया।

दूसरा तकनीकी सत्र “नया आयकर अधिनियम, 2025 – व्यवसाय एवं पेशे, पूंजीगत लाभ एवं आकलन” विषय पर आयोजित किया गया, जिसका समन्वय सीए महेंद्र जैन ने किया। इस सत्र में मुंबई के सीए विमल पुनमिया ने विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि मूल सिद्धांतों को बरकरार रखते हुए अधिनियम को अधिक सरल और व्यवस्थित बनाया गया है।

उन्होंने बताया कि “व्यवसाय या पेशे से लाभ” से संबंधित प्रावधानों को व्यवस्थित रूप से पुनर्गठित किया गया है। प्रमुख बदलावों में अनुमानित कराधान योजनाओं का एकीकरण और सूचना प्रौद्योगिकी एवं कंपनी सचिव जैसे पेशों को अनिवार्य लेखा संधारण के अंतर्गत शामिल करना शामिल है।

पूंजीगत लाभ के संदर्भ में उन्होंने प्रावधानों के पुनर्गठन और छूटों के स्पष्ट समन्वय पर प्रकाश डाला।

तीसरा तकनीकी सत्र “सर्वे, तलाशी, दंड, प्रपत्र एवं अन्य परिवर्तन” विषय पर आयोजित किया गया, जिसका समन्वय सीए सचिन जाजोदिया ने किया। इस सत्र में सीए (डॉ.) शार्दुल दिलीप शाह ने बताया कि नया अधिनियम आधुनिक तकनीक पर आधारित है और कर प्रणाली को सरल बनाता है।

उन्होंने डिजिटल निगरानी के विस्तार, आभासी डिजिटल स्थानों तक पहुंच, सर्वे के दौरान शपथ पर बयान दर्ज करने की अनिवार्यता तथा तलाशी के दौरान गोपनीयता प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि अघोषित आय पर 60% की दर से कर लगाया जाएगा।

इस सेमिनार में उद्योगपति, उद्यमी, वित्त अधिकारी, लेखाकार एवं कर सलाहकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में कई सदस्यों का योगदान रहा। इस सेमिनार में विदर्भ क्षेत्र से 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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