Published On : Fri, Aug 28th, 2020

विश्वविद्यालयों के फाइनल इयर के एग्जाम होंगे, सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई हरी झंडी

नई दिल्ली: Final Year Exams 2020: कोरोनाकाल में एक्जाम कराए जाने को लेकर देश में जारी बहस के बीच आज सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालयों के फाइनल ईयर के छात्रों की परीक्षा से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि विश्वविद्यालयों के फाइल इयर के एग्जाम होंगे. कोर्ट ने कहा कि किसी राज्य को लगता है, उनके लिए परीक्षा कराना मुमकिन नहीं, तो वह UGC के पास जा सकता है. राज्य अंतिम वर्ष की बिना परीक्षा लिए विद्यार्थियों को प्रमोट नहीं कर सकते. 30 सितंबर तक परीक्षा करवाने के लिए UGC के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी है,.

सुप्रीम कोर्ट में अंतिम वर्ष की परीक्षा टालने वाली याचिका पर पिछली सुनवाई 18 अगस्त को हुई थी. इस दौरान यूनिवर्सिटी और कॉलेजों की अंतिम वर्ष की परीक्षा रद्द करने पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था. इसी के साथ अदालत ने सभी पक्षों से तीन दिन के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने को कहा था. अदालत ने ये भी कहा था कि अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि डिग्री कोर्स के अंतिम वर्ष की परीक्षा रद्द होंगी या नहीं. इसी मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी और परीक्षा को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा.

Gold Rate
May 14- 2026 - Time 10.30Hrs
Gold 24 KT ₹ 1,63,000 /-
Gold 22 KT ₹ 1,51,600 /-
Silver/Kg ₹ 2,92,400/-
Platinum ₹ 88,000/-
Recommended rate for Nagpur sarafa Making charges minimum 13% and above

सुप्रीम कोर्ट में पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तथ्य स्पष्ट हैं. जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान सरकार से पूछा था कि क्या यूजीसी के आदेश और निर्देश में सरकार दखल दे सकती है. इसके अलावा कोर्ट ने ये भी कहा था कि छात्रों का हित किसमें है? ये छात्र तय नहीं कर सकते, इसके लिए वैधानिक संस्था है, छात्र ये सब तय करने के काबिल नहीं हैं.

UGC ने कोर्ट में कहा था कि महाराष्ट्र सरकार इस मामले में परीक्षा आयोजित करने पर राजनीतिक विरोध कर रही है. मई में महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ पैनल ने भी परीक्षा आयोजित करने की सिफारिश की थी. राज्य सरकार यह नहीं कह सकती कि परीक्षा आयोजित न करें. अधिक से अधिक राज्य सरकार ये कह सकती है कि परीक्षा की तारीख आगे बढ़ा दी जाए.

यूजीसी ने दलील दी थी कि विश्वविद्यालय के कुलपतियों को मई में महाराष्ट्र सरकार द्वारा बैठक के लिए बुलाया गया था. इस बैठक में फैसला लिया गया कि पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों को पास किया जा सकता है, लेकिन अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए परीक्षा की जरूरी है.

इस बैठक के बाद एक याचिका युवा सेना द्वारा दायर की गई जिसकी अध्यक्षता महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के बेटे ने की. इसी युवा सेना की याचिका के बाद सरकार का भी विचार बदल गया और वह परीक्षा के खिलाफ हो गई. जबकि राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करने का अधिकार ही नहीं है.

Advertisement
GET YOUR OWN WEBSITE
FOR ₹9,999
Domain & Hosting FREE for 1 Year
No Hidden Charges
Advertisement
Advertisement