नागपुर टुडे – जरूरतमंदों को कर्ज देकर कथित तौर पर भारी-भरकम ब्याज वसूलने और बाद में उनकी संपत्ति पर कब्जे की कोशिश करने का एक और गंभीर मामला नागपुर में सामने आया है। बेलतरोड़ी पुलिस ने सेवानिवृत्त शिक्षक की शिकायत पर कमलेश गणपतराव हनोते और अनिता पुरणलाल भारद्वाज के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने करीब दो लाख रुपये का कर्ज लिया था, लेकिन इसके बदले उनसे करीब 6 लाख 10 हजार रुपये वसूल किए गए। इतना ही नहीं, दो प्लॉट से संबंधित दस्तावेज भी दबाव और कथित धमकी के बीच कराए जाने का आरोप लगाया गया है।
29 अगस्त 2026 को दर्ज हुए इस मामले के बाद कथित अवैध साहूकारी के कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की जांच बेलतरोड़ी पुलिस कर रही है।
दो लाख रुपये लिए, किश्तों में लाखों चुकाने का आरोप
पुलिस शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता दिलीप श्रीराम कुंभारे सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। अप्रैल 2024 में निजी काम के लिए उन्हें दो लाख रुपये की आवश्यकता थी। इसी दौरान उनके मित्र विक्रम विजय मेश्राम ने कथित तौर पर उन्हें कमलेश हनोते के बारे में बताया कि वह ब्याज पर पैसे देता है।
इसके बाद फोन-पे के माध्यम से शिकायतकर्ता के खाते में एक लाख रुपये और उनकी बेटी के खाते में 99 हजार रुपये जमा किए गए। आरोप है कि इसके साथ ही शिकायतकर्ता से हस्ताक्षर किए हुए दो खाली चेक तथा 100 रुपये के स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर भी कराए गए।
शिकायतकर्ता के अनुसार, इसके बाद उनसे अलग-अलग माध्यमों से रकम की वसूली शुरू हुई। कभी ऑनलाइन तो कभी नकद रकम दिए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दो लाख रुपये के मूल कर्ज के बदले उनसे कुल 6 लाख 10 हजार रुपये वसूले गए।
घर पहुंचकर धमकाने का आरोप
शिकायत में 25 मई 2024 की घटना का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि कमलेश हनोते और विक्रम मेश्राम शिकायतकर्ता के घर पहुंचे और तीन महीने का ब्याज नहीं देने की बात कहते हुए तत्काल रकम की मांग की।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम नहीं देने पर मारपीट की धमकी दी गई और गाली-गलौज की गई। इसी दौरान घर खाली करने के लिए भी दबाव बनाए जाने का दावा किया गया है। आवाज सुनकर शिकायतकर्ता की पत्नी और बेटी नीचे आईं, जिसके बाद उनके सामने भी कथित रूप से विवाद और गाली-गलौज हुई।
अपने खाते के बजाय दूसरे लोगों के खातों में रकम भेजने का आरोप
मामले में ऑनलाइन पैसों के लेन-देन को लेकर भी पुलिस जांच कर रही है। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उन्होंने 20 हजार रुपये ऑनलाइन देने की कोशिश की तो कथित तौर पर उन्हें कमलेश हनोते के खाते में रकम भेजने के बजाय दूसरे व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर पैसे भेजने के लिए कहा गया।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने कथित रूप से 20 हजार रुपये प्रशांत रामटेके के फोन-पे खाते में भेजे। शिकायत में अलग-अलग व्यक्तियों के खातों में ऑनलाइन रकम भेजे जाने की बात भी कही गई है।
अब पुलिस इन सभी लेन-देन का रिकॉर्ड खंगाल सकती है। किस खाते में कितनी रकम पहुंची, किसके कहने पर रकम भेजी गई और आखिरकार उसका इस्तेमाल किस तरह हुआ—इन सभी बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दो प्लॉट के दस्तावेज कराने का भी आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप शिकायतकर्ता की संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों को लेकर है। शिकायत के मुताबिक, वांझरा क्षेत्र स्थित प्लॉट नंबर 24, करीब 1,250 वर्गफुट जमीन से संबंधित दस्तावेज कथित तौर पर दबाव में कराए गए।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि 11 मई 2024 को उन्हें अपने साथ ले जाकर प्लॉट से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए।
इसके बाद बेसा क्षेत्र स्थित करीब 2,300 वर्गफुट के प्लॉट नंबर 258 और उस पर बने मकान से संबंधित स्थावर संपत्ति का करारनामा भी कराए जाने का दावा शिकायत में किया गया है।
परिवार को स्कॉर्पियो से ले जाने और नोटरी के सामने हस्ताक्षर कराने का आरोप
शिकायत में 10 जनवरी 2025 की एक अन्य घटना का भी उल्लेख है। आरोप के अनुसार, शिकायतकर्ता और उनके परिवार के सदस्यों को स्कॉर्पियो वाहन से भगवाननगर-अजनी क्षेत्र में ले जाया गया।
वहां नोटरी के सामने 500 रुपये के स्टांप पेपर पर तैयार किए गए स्थावर संपत्ति संबंधी करारनामे पर कथित रूप से दबाव और भय के माहौल में हस्ताक्षर करवाए गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें अपनी संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया।
यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल कथित अवैध साहूकारी तक सीमित न रहकर धमकी, जबरन दस्तावेज कराने और संपत्ति संबंधी विवाद के गंभीर पहलुओं तक पहुंच सकता है।
हनोते के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज होने की जानकारी
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कमलेश हनोते के खिलाफ नागपुर शहर के विभिन्न पुलिस थानों में पहले भी पांच मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। इनमें अजनी पुलिस थाने का मामला भी शामिल बताया जा रहा है।
अब बेलतरोड़ी थाने में नया मामला दर्ज होने के बाद पुलिस के सामने पुराने मामलों और वर्तमान शिकायत के बीच किसी संभावित संबंध की जांच का भी मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।
इसी तरह आरती भारद्वाज के हनोते के साथ तीन मामलों में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, वर्तमान बेलतरोड़ी एफआईआर में आरोपी महिला का नाम अनिता पुरणलाल भारद्वाज दर्ज है। इसलिए आरती भारद्वाज और अनिता पुरणलाल भारद्वाज एक ही व्यक्ति हैं या अलग-अलग, इसकी आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस खंगालेगी पैसों से लेकर संपत्ति के दस्तावेज तक
बेलतरोड़ी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(2), 352, 3(5) तथा महाराष्ट्र साहूकारी (विनियमन) अधिनियम, 2014 की धारा 39 के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच उपनिरीक्षक ऋषिकेश दत्तात्रय कडूस कर रहे हैं।
जांच के दौरान फोन-पे और अन्य ऑनलाइन लेन-देन, बैंक खातों, हस्ताक्षर किए गए चेक, स्टांप पेपर, नोटरी दस्तावेज और दोनों प्लॉट से संबंधित कागजात की जांच की जा सकती है।
पुलिस के लिए सबसे अहम बिंदु शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए 6.10 लाख रुपये के कथित लेन-देन का पूरा हिसाब और दोनों प्लॉट से संबंधित दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति होगी। जांच में यह भी स्पष्ट होगा कि कर्ज की रकम, ब्याज और कथित वसूली के बीच वास्तविक आर्थिक लेन-देन क्या था।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
इस मामले में लगाए गए सभी आरोप फिलहाल शिकायत और एफआईआर पर आधारित हैं। आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। आरोपी पक्ष का बयान और उनका बचाव भी मामले की निष्पक्ष जांच के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
फिर भी, दो लाख रुपये के कथित कर्ज के बदले 6.10 लाख रुपये की वसूली और दो संपत्तियों के दस्तावेज कराने के आरोपों ने कथित अवैध साहूकारी के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पुलिस जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इस पूरे मामले में वास्तव में कितनी रकम का लेन-देन हुआ, किस-किस व्यक्ति की भूमिका रही और संपत्ति के दस्तावेज किस परिस्थिति में तैयार किए गए।




