नागपुर: नागपुर साइबर पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह का मास्टरमाइंड और उसके अन्य साथी अभी फरार हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 209 एटीएम कार्ड, 45 सिम कार्ड, 45 चेकबुक, 45 पासबुक, फर्जी दस्तावेज और अन्य बैंकिंग सामग्री जब्त की है। प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के जरिए देशभर में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की रकम के लेनदेन की आशंका जताई जा रही है।
साइबर पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद इन खातों को साइबर ठगों को किराये पर उपलब्ध कराया जाता था। ऑनलाइन ठगी से हासिल रकम पहले इन्हीं खातों में जमा की जाती और फिर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर नकद निकासी कर ली जाती थी, जिससे पैसों के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके।
जांच के आधार पर साइबर पुलिस ने हुडकेश्वर थाना क्षेत्र के नरसाला स्थित एक ठिकाने पर छापा मारकर उज्ज्वला राजगिरे, पठाण उर्फ इरफान इकबाल शेख और आयुष रामटेके को गिरफ्तार किया। हालांकि पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही गिरोह का मास्टरमाइंड और कुछ अन्य आरोपी मौके से फरार हो गए।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 209 एटीएम कार्ड, 45 से अधिक सिम कार्ड, 45 चेकबुक, 45 पासबुक, कई ब्लैंक चेक, विभिन्न कंपनियों के रबर स्टैम्प, क्यूआर कोड, क्यूआर स्कैनर मशीनें तथा एक लैपटॉप बरामद किया। जब्त किए गए लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।
संयुक्त पुलिस आयुक्त नवीन चंद्र रेड्डी ने बताया कि पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक कितने बैंक खाते खुलवाए, किन-किन साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए और इनके माध्यम से कितनी राशि का लेनदेन किया गया। शुरुआती जांच में इस रैकेट के कई राज्यों तक फैले होने की आशंका सामने आई है।
पुलिस अब इस नेटवर्क की फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक की जांच कर रही है। फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है और मामले से जुड़े सभी बैंक खातों एवं डिजिटल नेटवर्क की गहन जांच जारी है। नागपुर साइबर पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।





