Published On : Mon, May 25th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

क्या प्रधानमंत्री की “ऊर्जा बचाओ” अपील को नजरअंदाज कर रहा है NMC?

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नागपुर: एक ओर देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi लगातार ऊर्जा संरक्षण, फ्यूल सेविंग और कार्बन उत्सर्जन कम करने का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नागपुर महानगरपालिका (NMC) द्वारा भारी डीजल खपत वाली मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनों के उपयोग को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।

नागपुर की सड़कों पर इन दिनों हाईटेक रोड क्लीनिंग मशीनें लगातार दिखाई दे रही हैं। NMC का दावा है कि ये मशीनें धूल कम करने, शहर को साफ रखने और प्रदूषण नियंत्रण में मददगार साबित हो रही हैं। लेकिन अब नागरिकों और कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि इन मशीनों की वास्तविक उपयोगिता, खर्च और पर्यावरणीय प्रभाव पर सार्वजनिक चर्चा होनी चाहिए।

जानकारी के अनुसार, NMC के पास वर्तमान में लगभग 9 से 10 मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनें हैं। तकनीकी अनुमानों के मुताबिक एक मशीन प्रतिदिन लगभग 80 से 150 लीटर तक डीजल की खपत कर सकती है। इस हिसाब से यदि सभी मशीनें नियमित रूप से चल रही हों, तो शहर में प्रतिदिन लगभग 800 से 1500 लीटर डीजल सिर्फ सड़क सफाई में खर्च हो सकता है।

डीजल की वर्तमान कीमत को देखते हुए यह खर्च प्रतिदिन ₹70 हजार से ₹1.35 लाख तक पहुंच सकता है। सालभर में यह आंकड़ा करोड़ों रुपये तक जा सकता है।

यही कारण है कि अब शहर में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह मॉडल वास्तव में पर्यावरण हितैषी है?

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प्रधानमंत्री मोदी कई मंचों से “Mission LiFE”, ऊर्जा बचत और ईंधन की खपत कम करने की बात कर चुके हैं। उन्होंने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की बचत और कार्बन फुटप्रिंट घटाने की अपील भी की है। ऐसे में नागरिक पूछ रहे हैं कि क्या NMC इस राष्ट्रीय सोच के अनुरूप काम कर रहा है?

अब सीधे सवाल नागपुर के महापौर से पूछे जा रहे हैं —

  • इन मशीनों की वास्तविक दैनिक डीजल खपत कितनी है?
  • क्या इनके संचालन का कोई स्वतंत्र ऑडिट कराया गया?
  • क्या मशीनों से प्रदूषण कम हुआ या सिर्फ दिखावटी सफाई हो रही है?
  • मशीनों के संचालन और मेंटेनेंस पर अब तक कुल कितना खर्च हुआ?
  • क्या NMC ने इलेक्ट्रिक या CNG आधारित विकल्पों पर विचार किया?
  • क्या इन मशीनों की कार्यक्षमता का कोई सार्वजनिक डेटा उपलब्ध है?

विशेषज्ञों का मानना है कि मैकेनाइज्ड सफाई आधुनिक व्यवस्था का हिस्सा हो सकती है, लेकिन यदि उससे भारी मात्रा में डीजल जल रहा हो, तो उसके पर्यावरणीय लाभ पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

दिल्ली सहित कुछ शहर अब CNG आधारित रोड स्वीपिंग मशीनों की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में नागपुर जैसे “स्मार्ट सिटी” में भविष्य की योजना क्या होगी, इस पर भी नजर बनी हुई है।

फिलहाल शहर की जनता जवाब चाहती है –
क्या यह वास्तव में “स्मार्ट क्लीनिंग” है,
या फिर टैक्सपेयर्स के पैसों से चल रहा एक महंगा प्रयोग?

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