Published On : Mon, Dec 20th, 2021
By Nagpur Today Nagpur News

देश भर में हो इस अभियान का प्रसार – तुमाने

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– अपूर्व विज्ञान मेला- 2021 का समापन

नागपुर: समाज के कमजोर तबके के इन बच्चों ने जिस तरह से अपने प्रयोगों को प्रस्तुत किया है, वह महत्वपूर्ण है। अपूर्व विज्ञान मेला विज्ञान शिक्षा की दिशा में देश भर में अनोखा प्रयोग है। इसका विस्तार होना चाहिए। उक्त विचार रामटेक के सांसद कृपाल तुमाने ने व्यक्त किए।

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असोसिएशन फॉर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इन बेसिक साइंस एजुकेशन, नागपुर महानगर पालिका और विज्ञान प्रसार, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रभाषा भवन परिसर, उत्तर अंबाझिरी मार्ग में आयोजित पांच दिवसीय अपूर्व विज्ञान मेले का रविवार को समापन हुआ। श्री तुमाने ने कहा कि प्रयोग समझाते हुए बच्चों का आत्मविश्वास काबिले तारीफ था। उनके बताने से साफ पता चलता था कि बच्चों ने सिद्धांतों को रटा नहीं है, बल्कि समझा है। हर प्रयोग में बच्चों की पूरी सहभागिता थी। संस्था के सचिव सुरेश अग्रवाल ने श्री तुमाने का स्वागत किया और उन्हें मेला के संबंध में जानकारी दी।
शिक्षक बधाई के पात्र – शांति राधाकृष्णन शिक्षाविद् शांति राधाकृष्णन ने कहा कि किसी सरकारी या मनपा स्कूल के बच्चों को प्रयोग का यह अवसर उपलब्ध होना उल्लेखनीय है। इससे भी महत्वपूर्ण यह है बच्चों को प्रशिक्षित करना। इसके लिए वे सभी शिक्षिकाएं बधाई की पात्र हैं जिन्होंने विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया है। शिक्षाविद् होने के साथ ही वे मनपा आयुक्त राधाकृष्णन बी. की पत्नी भी हैं।

उन्होंने कहा कि मैं खुद सरकारी स्कूल में पढ़ी हूं। हम लोगों को विज्ञान के प्रयोगों का अनुभव नहीं मिल पाता था। लेकिन यहां सहज उपलब्ध वस्तुओं से विज्ञान की संकल्पनाओं को समझाया जा रहा है। मनपा के मेला समन्वयक राजेंद्र पुसेकर और शिक्षिकाएं ज्योति मेडपिलवार, नीता गडेकर, पुष्पलता गावंडे, नीलिमा अढाऊ, दीप्ति बिष्ट, वंदना चव्हाण, मनीषा मोगलेवार, सुनीता झरबडे के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने प्रयोग बखूबी प्रस्तुत किए।

गत पांच दिनों में हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने मेले का लाभ उठाया। अभिभावकगण भी बड़ी संख्या में मेला देखने आए। मेले में आसपास उपलब्ध वस्तुओं से निर्मित सरल, सुगम और कम खर्चीले विज्ञान के करीब 100 प्रयोग प्रदर्शित किए गए थे। भौतिकशास्त्र, रसायन शास्त्र व गणित के ज्यादातर प्रयोगों को लोग बारीकी से समझते रहे। शरीर के हृदय, मस्तिष्क, आंख, किडनी जैसे असली अंग भी खासे आकर्षण का केंद्र रहे। छत्तीसगढ़ से शिक्षकों का दल भी मेला देखने पहुंचा। इनमें राजनांदगांव के अभिषेक शुक्ला, कांकेर के लखनलाल साहू शामिल थे।

पालकों-शिक्षकों ने भी दिखाई रुचि
अपूर्व विज्ञान मेला ने अभियान का रूप तो पहले ही ले लिया था, अब कन्सेप्ट भी बन चुका है। सिर्फ बच्चों में ही यह लोकप्रिय नहीं है, बल्कि अध्यापक और पैरेंट्स भी विज्ञान शिक्षा को प्रयोगों के माध्यम से समझने-समझाने को उत्सुक दिखे। विज्ञान प्रसारक बी.एस. स्वाईं ने बताया कि कोरोना के बाद यहां बच्चों और अभिभावकों का जो उत्साह देखने को मिला, वह संतोषजनक था। साधारणतः शैक्षणिक यात्रा का कल्चर महाविद्यालयों में हैं जहां विद्यार्थियों को प्रकृति या किसी उद्योग का निरीक्षण कराया जाता है। लेकिन अपूर्व विज्ञान मेला के कारण इसका लाभ स्कूल के बच्चे भी उठा रहे हैं। दूरदराज में अध्ययनरत बच्चे बसों में आते हैं और मनोरंजन के साथ ही विज्ञान से दोस्ती भी करते हैं।

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