Published On : Sun, Apr 16th, 2017

देश में अब भी होता है भेदभाव : शरद यादव

नागपुर: दुनिया के विभिन्न देशों मे अनेक विद्रोह चले और थम गए। समय के साथ साथ वहां के लोगों ने सभी को अपना लिया। भेदभाव की शुरुआत दुनिया में काले और गोरे के साथ शुरू हुई थी। अफ्रीका के नेल्सन मण्डेला और अमेरिका के बराक जैसी हस्तियों ने सोच बदली। लेकिन अब वहां इस तरह का भेदभाव कम दिखाई देता है जबकि देश में अब भी यह भेदभाव कायम है। ये विचार राज्यसभा सांसद शरद यादव ने शनिवार शाम को यहां कही। वे आवाज़ इंडीया टीवी की ओर बाबासाहेब अम्बेडकर की 126वी जयंती के अवसर पर कस्तूरचंद पार्क मे आयोजित कार्यक्रम को बतौर प्रमुख अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्हें खास तौर पर ‘राष्ट्रनिर्माण में आरक्षण का योगदान’ के विषय पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया था।
इस दौरान यादव ने मौजूद लोगों को संबोधित करते उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब का जन्म एक विद्रोह का जन्म था। आज देश मे संविधान को रौंदा जा रहा है। उसे बचाने के लिए दलित और ओबीसी समाज को साथ आने की ज़रूरत है। यादव ने कहा कि आइंस्टाइन सरस्वती की पूजा नहीं करते थे। दुनिया के किसी भी देश मे सरस्वती की पूजा नहीं होती। केवल भारत में होती है लेकिन भारत में ही सबसे ज्यादा अनपढ़ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बाबासाहेब के स्मारक पर मालाएं चढ़ा रहे है। लेकिन उन्हें नहीं पता बाबासाहेब स्मारक नहीं विचार है। उन्होंने कहा कि जाति के नाम पर देश मे पाखंड चल रहा है। जिसके लिए दलित और ओबीसी को एकजुट होना चाहिए। यादव ने कहा कि बाबासाहेब ने संविधान में सभी को एक सबसे बड़ी ताकत दी थी वह है मताअधिकार की। हम लोग मताधिकार का उपयोग कर दिल्ली में सत्ता स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सभी लोग एक हो जाएं तो दिल्ली मे सत्ता बनाना कोई बड़ा कार्य नहीं है।
इस दौरान उन्होंने यूपी में बनाए गए एंटी रोमियो स्क्वाड को लेकर कहा कि सरकार की ओर से मोहब्बत पर भी पहरा लगाया गया है। उन्होंने मीडिया पर चुटकी लेते हुए कहा कि उनकी ज्यादातर ख़बरे दिखाई नहीं जाती। मीडिया पूंजीपतियों का होकर रह गया है। यादव ने लोगों से कहा कि 5 अनुयायियों से शुरू हुई भगवान बुद्ध की दीक्षा का सफर बाद में पूरे देश में फैला। उन्होंने कहा कि जात नहीं जमात बने और अपने अधिकार के लिए लड़ें।