Published On : Sat, May 8th, 2021

सिंधी भाषा के विकास की जिम्मेदारी नौजवानों पर है – डा. विनोद आसूदानी

भारतीय सिंधु सभा, नागपुर द्वारा युवा वर्ग के लिए मोटिवेशन लेक्चर का आयोजन

नागपुर – भाषा सिर्फ वार्तालात का माध्यम न होकर सभ्यता और संस्कृति का वाहक है। भाषा लुप्त हो गई तो संस्कृति भी लुप्त हो जाएगी। मातृभाषा अच्छी जानने वाला व्यक्ति ही दूसरी कोई भी भाषा अच्छी तरह बोल सकता है। युवा पीढ़ी इस कार्य में निर्णायक भूमिका निभा सकती है क्योंकि सिंधी भाषा के विकास की जिम्मेदारी नौजवानों पर है उक्त उदगार सुप्रसिद्ध साहित्यकार डा. विनोद आसूदानी के थे। वे युवाओं हेतु मोटिवेशन लेक्चर में बोल रहे थे। दिनांक 7 मई 2021 को शाम 7 बजे भारतीय सिंधु सभा, नागपुर के फेस बुक पेज पर युवा वर्ग के लिए मोटिवेशन लेक्चर का आयोजन आॅनलाइन किया गया।

राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद, नई दिल्ली के उपाध्यक्ष घनश्याम कुकरेजा ने कहा कि युवा वर्ग को अपनी भाषा के प्रति लगाव हो और सिंधी समाज अपने महापुरूषों, शहीदों की जीवनी को अपनी युवा पीढ़ी तक पहुचाएं और अपनी सभ्यता, संस्कृति तथा परंपराओं आदि से उन्हें परिचित करवाएं इसी उद्देश्य हेतु भारतीय सिंधू सभा नागपुर द्वारा सिंधी भाषा दिवस तथा चेटी चंड के अवसर पर युवा वर्ग के लिए आॅनलाइन भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया था जिसमें पूरे भारत वर्ष के युवा वर्ग ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

भारतीय सिंधू सभा के महासचिव गोपाल खेमाणी, भारतीय सिन्धू सभा सांस्कृतिक मंच नागपुर के अध्यक्ष किशोर लालवानी, वरिष्ठ रंगमंच कलाकार विजय मदनाणी, प्रमुख समाज सेवी राज आहूजा ने भी अपने विचार रखे।

प्रतियोगिता के निर्णायक डा. विजय मदनानी तथा किशोर लालवाणी थे। प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण भी किया गया।प्रथम पुरस्कार कु. हनी खिलवाणी आदिपुर, द्वितीय पुरस्कार मानसी टहिल्यिानी नागपुर तथा तृतीय पुरस्कार ईशा राजेश केवलरामानी नागपुर थे। प्रोत्साहन पुरस्कार हर्षा डलानी अजमेर, कृष्णा खिलवानी आदिपुर, खुश्बू बजाज नागपुर, सन्ना विक्की केवलरामाणी नागपुर, पायल परमानंद मेंघाणी नागपुर, हिमांशी ठकुरानी भोपाल, हेतल किशोर हीरानी गुजरात, कृतिका अनिल दावड़ा मुंबई,कृष्णा अजय जेसवानी बैंगलोर तथा टीना गुलानी नागपुर को प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती महक आडवाणी ने किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए राजकुमार कोडवाणी, दिलीप बीखाणी, मोहनीश वाधवाणी तथा जगदीश वंजानी ने अथक प्रयास किया।