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    Published On : Wed, Mar 10th, 2021

    सत्तापक्ष के 80% नगरसेवकों के कामों से जनता संतुष्ट नहीं

    -चुनावी सर्वेक्षण ने भाजपा को झकझोरा

    नागपुर : अगले वर्ष फरवरी-मार्च में मनपा का चुनाव होने वाला हैं,इसके लिए मनपा में पिछले 3 टर्म से सत्ताधारी पक्ष ने तैयारियां शुरू कर दी हैं.इस संदर्भ में पक्ष के नगरसेवकों के कार्यकाल हेतु करवाए गए सर्वेक्षण का परिणाम काफी चिंताजनक प्राप्त हुए.नतीजा आधे से अधिक नगरसेवकों को दोबारा उम्मीदवारी नहीं दी जाएगी।

    ज्ञात हो कि भाजपा एक ऐसी पार्टी हैं जो काफी समय पहले और काफी बारीकी से चुनाव प्रक्रिया में भाग लेती हैं.कोई भी चुनाव हो उम्मीदवारी घोषित करने के पूर्व संभावित उम्मीदवारों के सन्दर्भ में काफी छानबीन की जाती हैं.वर्तमान में भाजपा के 107 नगरसेवक हैं.अगले मनपा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पक्ष पदाधिकारी और निजी सर्वेक्षण करने वाली एजेंसी के माध्यम से सर्वे करवाए गए.जिनके संयुक्त निष्कर्ष से यह जानकारी सामने आई कि भाजपा के 80% नगरसेवकों का पिछले 4 वर्षों में कामकाज असमाधानकारक रहा.अर्थात 80 से 85 नगरसेवकों को रडार पर रखा गया.इससे पक्ष के नेतृत्वकर्ताओं की सरदर्दी बढ़ गई.इसलिए अगली चुनाव में जिन्हें पुनः मौका दिया जाएगा,उन्हें अंतिम वर्ष मनपा के अन्य जिम्मेदारियों से मुक्त कर,उन्हें उनके चुनावी क्षेत्र में सक्रिय रहने का आदेश दे दिया गया.

    भाजपा की परंपरागत सर्वे करने वाली कंपनी ने ही उक्त सर्वे कर भाजपा के स्थानीय नेताओं को सकते में ला दिया हैं.शहर के 6 विधानसभा क्षेत्रों में 38 प्रभाग हैं,अर्थात 30 लाख की जनसंख्या वाली इस शहर में भाजपा 6 मंडलों मार्फ़त सक्रिय हैं.वर्त्तमान में सत्तापक्ष भाजपा का इस कार्यकाल का अंतिम चुनावी वर्ष हैं.वर्ष 2022 के फरवरी-मार्च में अगली मनपा चुनाव होने वाली हैं.

    सर्वेक्षण के दौरान पूछे गए सवाल पर अपने-अपने क्षेत्रों के भाजपा नगरसेवकों के विरोध में सूचनाएं संकलित की गई.उक्त सर्वेक्षण बाद नगरसेवकों की संयुक्त/मिश्रित बैठक लेकर शहर भाजपाध्यक्ष व एमएलसी प्रवीण दटके ने जमकर नगरसेवकों की क्लास ली.
    उल्लेखनीय यह हैं कि उक्त सर्वे में सबसे ज्यादा निष्क्रियता का महिला नगरसेविकाओं की रही.यह तो सभागृह में भी नज़र आई.चुन कर आने के बाद अधिकांश नगरसेविका अपने क्षेत्र में निकली ही नहीं,उनके रिश्तेदारों ने जेम-तेम अपने ढंग से मोर्चा संभाला,यहाँ तक कि नगरसेविकाओं के हस्ताक्षर भी उनके रिश्तेदारों द्वारा किये जाते रहे.

    इसलिए उक्त सर्वेक्षण के परिणाम बाद लगातार चौथी मर्तबा मनपा में सत्ता कायम रहे,इसलिए काफी गहन-मंथन-चिंतन का दौर शुरू हैं.अन्य पक्षों में गए अपने पक्ष के पूर्व नगरसेवक/सक्षम/जुझारू कार्यकर्ताओं की घर वापसी पर जोर दिया जा रहा.यह भी मुमकिन हैं कि अगले चुनाव में वर्त्तमान के चुनिंदा नगरसेवकों को छोड़ दिए जाए तो अधिकांश नए नगरसेवक नज़र आएंगे।


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