Published On : Sat, Mar 7th, 2015

देवली के कारखानों में स्थानीय लोगों को नहीं मिलता रोजगार


सवांददाता / आकाश खंडाते

Gammon factory
देवली (वर्धा)। शहर के निकट की एमआईडीसी में स्थित कारखाने स्थानीय लोगों को नौकरी पर नहीं रखते. इससे एमआईडीसी की स्थापना करने का सरकार का उद्देश्य ही विफल हो गया है. ये कारखाने परप्रांतीय लोगों को ही नौकरी पर रखते हैं और उन्हें काफी कम वेतन देकर उनसे अधिक घंटे काम लेते हैं. इनमें कई अपराधी प्रवृत्ति के लोग भी होते हैं जिनकी वजह से शहर की शांति को हर समय खतरा बना रहता है. इन कारखानों में इनका कोई रिकार्ड भी नहीं रहता जिससे किसी आपराधिक घटना को अंजाम देने के बाद फरार हो जाने की स्थिति में उन्हें पकड़ पाना पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन जाता है.

1 अक्तूबर 1960 को महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल की स्थापना हुई थी. इसका उद्देश्य राज्य की सामाजिक आर्थिक स्थिति में आमूल-चूल बदलाव लाना था. स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राज्य में जगह-जगह एमआईडीसी शुरू की गई थी लेकिन देवली के कारखाना मालिक सरकार के इस उद्देश्य को ही विफल कर रहे हैं. वे कम वेतन पर परप्रांतीयों को नौकरी पर रख स्थानीय लोगों को रोजगार से वंचित कर रहे हैं. सन 2006-07 से स्थानीय एमआईडीसी में कारखाने लगने शुरू हुए. धीरे-धीरे छोटे-बड़े 60- 70 कारखाने यहां लग गए. कुछ बड़े कारखाने भी लगे जिनमें पावर ग्रिड इंडिया लि., गॅमन इंडिया लि., महालक्ष्मी कंपनी, व्हील्स इंडिया लि., पी.आर. रोलिंग मिल्स, नाव्हया साल्वेंट, एसोसिएट ट्रांसरेल आदि का समावेश है. हालांकि एमआईडीसी में स्थापित 30-40 कारखाने किन्हीं कारणों से बंद हैं.

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मजदूरों में अनेक अपराधी प्रवृत्ति के
सूत्रों के अनुसार देवली के कारखानों में दूसरे प्रांतों के मजदूर रखे गए हैं. गौरतलब है कि परप्रांतों के मजदूर कम वेतन पर अधिक घंटे काम करते हैं. सूत्रों के अनुसार ये कारखाने इन मजदूरों के बारे में विस्तृत जानकारी इकट्ठा किए बिना ही इन्हें काम पर रख लेते हैं. इनमें से कई मजदूर अपराधी प्रवृत्ति के बताए जाते हैें. मजदूरों के बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र नहीं करने से वे अपराध करने के बाद अपने मूल गांव आसानी से भाग जाते हैं. ऐसी स्थिति में उनका कोई पताठिका ना नहीं होने से उन्हें ढूंढ निकालना पुलिस के सामने बड़ी चुनौती होती है. एमआईडीसी के एक कारखाने में मारपीट की घटना हुई थी जिनमें से अनेक मजदूर उत्तरप्रदेश के थे. घटना के बाद आरोपी फरार हो गए. पुलिस जांच में पता चला कि मजदूरों के बारे में कोई भी जानकारी कारखाना प्रबंधन के पास नहीं है. इससे उन्हें ढूंढ निकालने में पुलिस को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. बताया जाता है कि इन कारखानों में अपराधी प्रवृत्ति के लोग भी आश्रय लेते हैं.

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दुर्घटनाएं छुपाते हैं कारखाने

देवली एमआईडीसी पुलिस स्टेशन में कारखानों की केवल 10-12 दुर्घटनाएं ही दर्ज हैं. इनमें गॅमन इंडिया लि. की एक तथा अन्य महालक्ष्मी कंपनी की हैं. 13 नवंबर 2014 को महालक्ष्मी स्टील कंपनी में बर्नर फटने से हुई दुर्घटना में एक कामगार की मौत हो गई थी तथा अन्य छह कामगार जख्मी हो गए थे. लेकिन एमआईडीसी पुलिस स्टेशन में मात्र एक ही कामगार का जख्मी होना दर्ज है. मृतक का नाम उत्तरप्रदेश के मूल निवासी शारदाप्रसाद शंभुप्रसाद दुबे (26) और घायल का नाम रामकुमार दरोगा यादव (30) दर्ज है. जबकि अन्य पांच जख्यिों के बारे में कोई जानकारी दर्ज नहीं है. इस घटना से साबित होता है कि कारखाना मालिक पुलिस के साथ सांठगांठ कर दुर्घटना के मामलों को दबा देते हैं.

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शहर की शांति व्यवस्था खतरे में

इन कामगारों में कई अपराधी प्रवृत्ति के होने से शहर की शांति व्यवस्था खतरे में है. नागरिकों का कहना है कि कारखानों को काम पर रखने से पहले मजदूरों के बारे में विस्तृत जानकारी, उनका फोटो तथा पहचान पत्र रखना चाहिए ताकि किसी आपराधिक घटना को अंजाम देने के बाद उन्हें पकड़ा जा सके.

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