Published On : Thu, Sep 5th, 2019

पर्युषण पर्व का आठवा दिवस ”संवत्सरी महापर्व“

श्री श्वेताम्बर जैन समाज पश्चिम नागपुर के स्वाध्याय भवन मे पु.श्री रूचिताकंवरजी म.सा. आठी ठाणा-4 बिराजमान है। उनके सानिध्य मे पर्व के आठवे दिन की आराधना मे सर्व प्रथम अंतगडदसांग सूत्र का वाचन हुआ।

आज का दिन ”संवत्सरी महापर्व“ जो क्षमा का दिन भी है। आज के दिन हमस ब से क्षमायाचना करते है, सब छोटे, बड़ो से विनयपुर्वक मन, वचन, काया से खमतखामणा करते है। खमत-खामणा इसलिए करते है, जो वर्षभर के दरम्यान हमसे जो भी अविनय, अविवेद, असातना हुई हो, उसके लिए खमतखामणा करते है।

सात दिन पर्यूषण के अभ्यास के बितने के बाद आज संवत्सरी का दिन परिक्षा का है। आज का दिन आदान-प्रदान का भी है। आदान-प्रदान क्षमा का होता है। ”(क्षमालेना-क्षमादेना)“। स्वदोष को पहचान कर, चिंतन, मनन कर आराधना के दिनो मे अपने भवभ्रमण को कम कम करना (घटना) चाहिए, आराधना करके इसे घटाया जा सकता है। अशुभ विचार अगर लम्बे समय तक स्वभाव मे रहे, तो वह जीव का भव बिगाड सकता
ह। अगर छाछ लम्बे समय तक बाहर रहता है, तो उसमे खटास आ जाती है, वैसे ही अगर एक जीव, दूसरे जीव से लम्बे कालतक रखने से उस जीव का भव बिगड जाता है; जिस से जीव नरक, तिर्थंच की गती का बंध कर लेता है।

क्षमा का दिन केवल जैन दर्शन मे ही नही, अन्य धर्मो मे भी बताया है। आज के दिन हमे तीन बातां े को याद रखनी चाहिए (प) याद करना = भगवान महावीर के चरित्र को याद कर, सीखना चाहिए के हमारे भगवान ने कैसे, और कितने उपसर्ग को सहन किया।

(पप) साफ करना = अपने अंदर के कषाय (क्रोध, मान, माया, लोभ) आदि बुराइयोओ का अपने अंदर से साफ करना चाहिए।
(पपप) माफ करना = सब जीवो से मन, वचन, काया से क्षमा को अपना ना चाहिए और दूसरों को क्षमा भी कर देना चाहिए। जैसे दिवालो को रंगने का पर्व = ”दिवाली“ है शरीर को रंगने का पर्व = ”होली“ है आत्मा को रंगने का पर्व = ”पर्यूषण पर्व“ है।

मनुष्य को अगर तकलीफ होती है, दुख आता है तो वह बोलकर बता सकता है, लेकिन जो तिर्थच प्राणी होते है, जो बोल नही सकता, उनकी पुकार कौन सूनेंगा? आज nसंवत्सरी महापर्व के दिन हमे संकल्प करना चाहिए कि, जितने भी संप्रदाय है, उन्हे एकnहाके र देश के कत्लखाणो ं का े बंद करवाने का प्रयास करना चाहिए। पर्वाधिराज पर्व पर्युषणnके दिनां े मे खास तारै , पर सारे कत्लखाण े बंद हाने े ही चाहिए।