Published On : Wed, Jul 22nd, 2020

कोर्ट ने UGC से पूछा- बताइए कोरोना काल में कैसे लेंगे परीक्षा ?

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नागपुर– कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के बीच अंतिम वर्ष की परीक्षा कराने के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के हालिया आदेश को रद्द करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने यूजीसी से जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी से पूछा कि महामारी की मौजूदा स्थिति देखिए. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल काउंसिल ने कहा है कि नवंबर में कोरोना का पीक सीजन आ सकता है. ऐसे में आप ऑफलाइन परीक्षा कैसे कराएंगे? क्या आप छात्रों को दिल्ली बुला सकेंगे? कोर्ट ने यूजीसी से ये बताने को कहा कि क्या एमसीक्यू, असाइनमेंट, प्रेजेंटेशन आदि के विकल्प अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए उपलब्ध हैं.

देश के 13 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की दर्जनों यूनिवर्सिटी के 31 छात्रों ने यूजीसी के छह जुलाई के दिशानिदेर्शों को शीर्ष अदालत में चुनौती देते हुए याचिका दायर की. इन याचिकाकर्ता छात्रों में एक कोरोना पीड़ित भी है. उनका कहना है कि ऐसे अंतिम वर्ष के कई छात्र हैं, जो या तो खुद कोरोना संक्रमण के शिकार हैं या उनके परिवार के सदस्य इस महामारी की चपेट में हैं. ऐसे छात्रों को इस 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाओं में बैठने के लिए मजबूर करना अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन के अधिकार का खुला उल्लंघन है.

वकील अलख आलोक श्रीवास्तव के माध्यम से दायर याचिका में दावा किया गया है कि आमतौर पर 31 जुलाई तक छात्रों को मार्क शीट/ डिग्री दे दी जाती है, जबकि वर्तमान मामले में परीक्षाएं 30 सितंबर तक खत्म होंगी. याचिकाकर्ताओं की दलील है कि जब विभिन्न शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द करके आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर परिणाम घोषित किए जा सकते हैं, तो अंतिम वर्ष के छात्रों के साथ ऐसा क्यों नहीं किया जाता?

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याचिका में कहा गया है, ‘यह ध्यान देने योग्य है कि संशोधित यूजीसी दिशा-निर्देश मौलिक अधिकारों के उल्लंघन में हैं, क्योंकि यह परीक्षार्थियों की आर्थिक, मानसिक, शारीरिक और सामाजिक दुर्दशा को ध्यान में रखने में विफल रहा है. वे एक भारी जोखिम के संपर्क में होंगे और अविश्वसनीय रूप से सभी परीक्षार्थियों के लिए समान आधार और उपचार की उपेक्षा करके ईमानदारी के मूल सिद्धांत का बलिदान करेंगे.’

दलीलों में उन छात्रों के मुद्दे को भी ध्यान में रखा गया है जो पहले ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले गए हैं. परीक्षा में शामिल होने के लिए उन्हें वापस आना होगा, जिससे उन्हें महामारी का अधिक जोखिम होगा.

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