Published On : Thu, Aug 3rd, 2017

उत्पादित कोयला एवं खदानों की सुरक्षा ताक पर रखकर भ्रष्ट अधिकारी कर रहे मनमानी

 
  • वेकोलि सुरक्षा प्रहरी १७ वर्षो से वंचित हैं पदोन्नति से
  • चेक पोस्ट की सुरक्षा तक पर रख, सुरक्षा कर्मी करते हैं बाबूगिरी
  • मनचाहा कार्यक्षेत्र पाने हेतु सुरक्षा कर्मी करते हैं आला अधिकारीयों की चापलूसी
Emta Coal Mines

File Pic


नागपुर:
 पूर्वी विदर्भ व मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की दर्जनों कोयला खदानें है. जिसमें अधिकांश खुली खदानें है. इनकी सुरक्षा का सम्पूर्ण दायित्व वेकोलि के सुरक्षा प्रहरियों पर है. लेकिन वेकोलि अध्यक्ष तथा प्रबंधन व मुख्य सुरक्षा अधिकारी की लापरवाही की वजह से सुरक्षा प्रहरी बिना किसी हथियार के अपनी चाकरी कर रहें हैं और पिछले १७ वर्षो से उन्हें पदोन्नति से वंचित रखा गया है. इतना ही नहीं आला अधिकारी अपनी इच्छापूर्ति करने वाले सुरक्षा प्रहरियों का तबादला भी नहीं करते है, जबकि वेकोलि नियमानुसार कर्मी से लेकर आला अधिकारी एक पद व स्थान पर ३ वर्ष से ज्यादा नहीं रह सकता है.

वेकोलि का मुख्यालय व नागपुर विभागीय महाप्रबंधक कार्यालय नागपुर में है. इसके अलावा बल्लारपुर, चंद्रपुर, माज़री, पेंच, कन्हान (परासिया), वणी, वणी नॉर्थ, पाथरखेड़ा इलाके में भूमिगत व खुली खदानें हैं. मुख्यालय एवं सभी मुख्य महाप्रबन्धक कार्यालयों सहित खदानों की सुरक्षा का जिम्मा इन निशस्त्र सुरक्षा प्रहरियों पर है. वैसे वेकोलि सुरक्षा कार्यालय प्रमुख के अधीनस्थ सैकड़ों अधिकारी-कर्मी तैनात है. इनमें से २०० के आसपास सुरक्षा प्रहरियों की नियुक्ति वर्ष १९९९-२००० में की गई थी. जिन्हे आजतक पदोन्नति नहीं दी गई. जबकि प्रत्येक ३ साल में उन्हें ‘सीआर’ व ‘डीपीसी’ के मार्फ़त पदोन्नति मिलनी चाहिए थी.

उक्त सुरक्षा प्रहरियों को नियमानुसार पदोन्नति दी गई होती तो वे सभी सुरक्षा उपनिरीक्षक या सुरक्षा निरीक्षक बन गए होते, तथा उनका मासिक वेतन आज ६० से ७० हज़ार रूपए होता. लेकिन आज भी वे सुरक्षा प्रहरी ही है, नियुक्ति के बाद उन्हें पदोन्नति के बजाय उन्हें प्रति वर्ष एक बेसिक बढाकर नियमित दिया जा रहा है. इन प्रहरियों का ओवरटाइम तो बंद करवाया ही है, साथ में साप्ताहिक या त्यौहार के दिन ड्यूटी करने पर एक दिन का सामान्य वेतन ही दिया जा रहा है.

न यूनिफार्म ढंग की ना जूते, सुविधाओं के आभाव में पिस रहें हैं कर्मी
पिछले ४ -५ वर्षो से वेकोलि मुख्यालय के सुरक्षा प्रहरियों को निम्न दर्जे का मटमैला खाकी कपडा और खदान क्षेत्रों के प्रहरियों को पिला खाकी कपडा थमाया जा रहा है, जिसकी सिलाई खुद प्रहरियों को अपनी जेब से करवानी पड़ती है. जो २-३ माह में जवाब दे देती है. नियमानुसार ड्यूटी के लिए काले व पीटी-परेड के लिए पिले रंग के जूते दिए जाना अनिवार्य है, लेकिनए काळा-पिले बार बार गायब से हो जाते हैं. उसमें भी बाटा बताकर लोकल जूता थमा दिया जाता है. बरसाती ( रैनकोट) भी घटिया और ड्यूटी के दौरान काम न आने वाला दिया जाता है. पानी बोतल, टॉर्च, लाठी के बगैर ड्यूटी बजानी पड़ती है. चेक पोस्ट सह ड्यूटी का कार्यक्षेत्र में लाइट की पर्याप्त व्यवस्था कि कमी के कारण कई बार मजबूरन जोखिम उठाना पड़ता है. पेट्रोलिंग मुख्यालय सह खदानों में जीप, जिप्सी जैसी व्यवस्था न होने के कारण दलदल, कीचड़ आदि से लबरेज क्षेत्रों में अपने वाहनों से गस्त लगानी पड़ती है.

कोयले के दलाली में सबके ऊपर से लेकर निचे तक सबके हात काले
खदानों में कोयला उत्खनन करने वाले मशीनरी के ऑपरेटर ( मालिक के इशारे पर ) से लेकर सेल्स मैनेजर, प्रबंधक, माइनिंग अधिकारी, मुख्यमहाप्रबन्धक आदि कोयले की रोजाना चोरी में प्रमुख आरोपी है. लेकिन बलि का बकरा केवल सुरक्षा प्रहरियों को बनाया जाता है. अधिकारियों के मौखिक निर्देश पर गैर अनुमति पत्र के ठेकेदारों के कोयला वाहक गाड़ियों को खदानों में प्रवेश दिया जाता है और कोयला लोड होने के बाद उन्हें बाहर उनके गंतव्य स्थान तक भी जाने भी दिया जाता है. चेक पोस्ट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों से क्लर्क का काम भी करवाया जाता है, जिसके कारण सुरक्षा को अक्सर टाक पर रखा जाता है.

आला अधिकारीयों कि चापलूसी हैं मनचाहा कार्यक्षेत्र पाने का कारगर उपाय
वेकोलि नागपुर विभाग के सुरक्षा अधिकारी कृपाल सिंह पिछले ५-६ वर्षो से एक ही जगह पर तैनात है. चंद्रपुर मुख्य महाप्रबन्धक कार्यालय में पिछले ८-१० वर्षो से भास्कर पारधी, अशोक बोडाले, राजकुमार रामनाथ, सुमेर सिंह, पृथ्वीराज अम्बादे, भरतसिंह मेहंदोळे आदि अधिकारीयों की कृपादृष्टि से कई वर्षों से एकही स्थान पर तैनात है. यही हाल वेकोलि मुख्यालय में तैनात सुरक्षा प्रहरियों की ट्रान्सफर का है. जिसके जादू से जब कभी इन सुरक्षा कर्मियों का तबादला होता है, वे ६-८ दिन से लेकर ६ माह के भीतर वापस मुख्यालय लौट आते है.


उल्लेखनीय यह है कि, यह सब वेकोलि के अध्यक्ष सह प्रबंधक व मुख्य सुरक्षा अधिकारी की मिलीभगत एवं इच्छा से हो रहा है. लेकिन समय रहते वेकोलि प्रबंधन ने उक्त अनियमितताओं को नहीं सुधारा तो स्पष्ट है कि, अन्यायग्रस्त सुरक्षा प्रहरियों की ओर से अपने हक़ पाने हेतु जनहित याचिका जरूर दायर की जाएगी.

– राजीव रंजन कुशवाहा