Published On : Wed, Sep 9th, 2020

सैकड़ो अस्थाई आरोग्य कर्मियों के समस्याओं से आयुक्त हुए अवगत

नागपुर – आज बुधवार की दोपहर सैकड़ों अस्थाई मानधन पर कार्यरत आरोग्य कर्मचारी नागपुर महानगर पालिका के केंद्रीय कार्यालय में जमा होकर निगम प्रशासन का ध्यान अपने मांगों की ओर आकर्षित किया। जिसको नागपुर म्युनिसिपल कारपोरेशन एम्पलाइज यूनियन ने अपना समर्थन जाहिर किया।

पिछले 5 महीने में कोरोना महामारी को रोकने के नाम पर निगम प्रशासन ने पूरी जिम्मेदारी अस्थाई आरोग्य कर्मचारियों के कंधों पर सौंप दी थी और निगम के द्वारा संचालित 50 से अधिक दवाखानों को और उसमें कार्यरत स्थायी आरोग्य कर्मचारियों को कोरोना की जिम्मेदारी से अलग रखा गया था इस भेदभाव के खिलाफ अस्थाई आरोग्य कर्मचारियों ने अपनी आवाज को बुलंद कि।नवनियुक्त निगमायुक्त राधाकृष्णन बी ने कर्मचारियों के मांगो को समझते हुए यूनियन के साथ सविस्तर चर्चा करने हेतु पाचारण किया।

उक्त आंदोलन के नेतृत्वकर्ता जम्मू आनंद ने सिलसिलेवार अस्थाई आरोग्य कर्मचारियों के समस्याएं और मांगे उनके सामने रखा,जिनमें प्रमुख रूप से अस्थाई आरोग्य कर्मचारियों को वर्तमान मानधन के समकक्ष कोरोना काल में कार्यरत हर महीने प्रोत्साहन भत्ता दीया जाए, आरोग्य कर्मचारियों की रोग प्रतिकर शक्ति को बनाए रखने हेतु उन्हें नाश्ता, चाय और दोपहर का पौष्टिक भोजन दिया जाए, शहर के अंदर स्थित तमाम प्राथमिक आरोग्य केंद्रों पर एक लिपिक एवं एक अघिक प्रयोगशाला तकनीशियन उपलब्ध कराने, तमाम प्राथमिक आरोग्य केंद्रों पर सैनिटाइजर के बूत लगवाया जाए जिससे उन केंद्रों में कार्यरत आरोग्य कर्मचारियों सुरक्षित रह सके, उसी प्रकार पिछले दिनों में करीब 40 स्थाई आरोग्य कर्मी कोरोना के शिकार हुए और इलाज में काफी पैसा उनको लगाना पड़ा जिसका मोबदला निगम प्रशासन ने करना चाहिए।

निगमायुक्त का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि नागपुर महानगर पालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी यह है कि शहरवासियों जो करदाता हे उनको आरोग्य सेवा और सुविधा उपलब्ध कराएं लेकिन मनपा के द्वारा संचालित तमाम दवाखानों में करीब करीब 400 मंजूर पद रिक्त है ऐसी स्थिति में मनपा का आरोग्य विभाग खोखला हो गया है अतः इन रिक्त पदों पर अस्थाई आरोग्य कर्मचारियों का समायोजन कर मनपा के दवाखानों को सशक्त किया जाए और नगरवासियों की परिणामकारक आरोग्य सेवा दियी जाने हेतु तैयार किया जाए।

निगमायुक्त ने यूनियन के द्वारा उठाए गये मांगों के प्रति अपनी सहानुभूति जताई और कहा कि जो उनके स्तर की है उसको तुरंत एक-दो दिन में दूर करेंगे। कुछ मांगो पर उन्होंने आदेश दिया कि जो भी 40 कर्मचारी जिनको कोरोना का इलाज करने में खर्चा आया है उन्हें उसका भुगतान किया जायेगा। आरोग्य विभाग को निर्देश दिया कि हर प्राथमिक सेंटर में सैनिटाइजर के बूत लगाया जाए, उसी प्रकार के प्रशासन को उन्होंने निर्देश दिया कि मौखिक आदेशों पर काम न कराया जाए और जो भी काम कराया जा रहा है उसका प्रशासकीय आदेश लिखित रूप से दिया जाए और निगमायुक्त ने इस बात का भी आश्वासन दिया कि आरोग्य कर्मचारियों की जो भी समस्या होगी वह उन समस्याओं को लेकर उनके सामने आए और उसको हर संभव दूर करने का प्रयास करेंगे।

आंदोलन में बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए जिसमें प्रमुख रुप से अर्चना मंगरुलकर, कुंदा कोहाड, ममता कावले, कल्पना इखार, कल्पना फोफरे, मालती भगत, मोहनी गुलाक्षाने, नीता वनवे, प्राची घोड़े, प्रिया, राखी पाटिल, रोशनी बरमकर, शीला पाटिल, शिल्पा उरकुटकर, सोनाली खंडहार, सुमित्रा घोडघासे, वैशाली मेश्राम, वर्षा कालवे, शिखा बैसारे, ओम्कारी तान्दुलकर, कविता माने, रोहित , प्रिया मेश्राम, अंकिता बरडे, क्षिपा नगरारे के अलावा बड़ी संख्या में अस्थायी आरोग्य कर्मचारी शामिल हुए।