
नागपुर: सर्वोच्च न्यायालय और कई बार हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेशों के बावजूद धार्मिक अतिक्रमण हटाने को लेकर कोताही बरती जाती है. जिसे लेकर अवमानना की कार्रवाई का डंडा चलते ही मनपा और प्रन्यास की ओर से कार्रवाई शुरू की गई.
एक ओर जहां धार्मिक संस्थानों के साथ लोगों की ओर से कार्रवाई का विरोध किया गया, वहीं दूसरी ओर न्यायिक विचाराधीन मामला होने के कारण कुछ संस्थानों की ओर से हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया गया. हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद संस्थानों को आपत्तियां दर्ज करने का मौका तो दिया, लेकिन कुछ धार्मिक अतिक्रमण सड़कों के किनारे होने के बावजूद उनकी ओर से ना तो आपत्तियां दर्ज की गई और जिन्होंने आपत्तियां दर्ज कराई न ही उनकी छानबीन ही की जा रही है.
एक तरह से हाईकोर्ट की ओर से अतिक्रमण उन्मूलन के लिए दिए गए प्लान को दरकिनार किए जाने से हाईकोर्ट की अवमानना होने का आरोप याचिकाकर्ता की ओर से लगाया गया. सुनवाई के बाद न्यायाधीश भूषण धर्माधिकारी और न्यायाधीश मुरलीधर गिरटकर ने एक सप्ताह के लिए सुनवाई स्थगित कर दी. याचिकाकर्ता की ओर से अधि. फिरदौस मिर्जा, मनपा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. कप्तान और सरकार की ओर से सरकारी वकील सुमंत देवपुजारी ने पैरवी की.
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