Published On : Mon, Oct 29th, 2018

टेकड़ी प्लाईओवर दुकान लाइसेंसधारियों की समस्या हल न होने का बहाना पड़ रहा भारी

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नागपुर: मनपा की सभा में रखे गए प्रस्ताव में बताया गया कि टेकड़ी फ्लाईओवर में बाजार विभाग की ओर से 1109 लाइसेंस धारकों को कमरे आवंटित किए गए थे. जिसमें से लगभग 135 व्यवसाय कर रहे हैं. इन धारकों की पात्रता के संदर्भ में सुनिश्चितता करने के बाद उनका पुनर्वसन व्यापार संकुल में किया जाएगा. स्थिति साफ होने के बावजूद समस्या का निपटारा तो नहीं किया जा रहा है, किंतु लाइसेंसधारकों की समस्या हल नहीं होने का बहाना कर पुल तोड़ने का मामला लंबित रखा जा रहा है.

रेलवे स्टेशन के सामने से होनेवाली आवाजाही के कारण ट्राफिक की समस्या हल करने के लिए भले ही वर्ष 2008 में गणेश टेकड़ी मंदिर के सामने पुल का निर्माण किया गया हो, लेकिन अब इसी पुल के कारण यातायात में बाधाएं होने तथा सड़क के चौड़ाईकरण का प्रस्ताव होने का हवाला देते हुए अब इसे तोड़ने पर मुहर लगाई गई है. हालांकि इसे तोड़ने के लिए मनपा की सभा में वर्ष 2017 में ही प्रस्ताव तो पारित कर दिया गया, लेकिन आश्चर्यजनक यह है कि 1 वर्ष में इसे तोड़ने का मुहूर्त नहीं मिल पाया है. जबकि पुल के कारण सैकड़ों लोगों को हर दिन ट्राफिक की समस्या से जुझना पड़ रहा है. अलबत्ता फुटाला चौपाटी के कारण किसी तरह की परेशानी तो नहीं थी, इसके बावजूद चंद दिनों में ही यहां के विकास का प्रारूप तैयार कर दुकानों को स्वाहा भी कर दिया गया है. जिससे विकास के चल रहे अजीबोगरीब खेल पर आश्चर्य जताया जा रहा है.

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जानकारों के अनुसार फुटाला चौपाटी को नए सिरे से विकसित कर यहां पर सनसेट और फाउंटेन शो जैसी योजनाओं के तहत निर्मित करने का प्रस्ताव है. जिसके लिए 110 करोड़ के करीब निधि को भी मंजूरी प्रदान की गई है. नए कलेवर में शहर के हो रहे विकास का निश्चित ही किसी भी स्तर पर विरोध तो नहीं हो रहा है, लेकिन कई पहेलियां अभी भी अनसुलझी है. चूंकि गणेश और दुर्गा महोत्सव के दौरान बड़ी मूर्तियों का विसर्जन अधिकांशत: फुटाला तालाब में ही होता है. अत: अब फुटाला का नए सिरे से विकास होने के बाद क्या मूर्तियों के विसर्जन पर पूरी तरह पाबंदी होगी?. इसका जवाब न तो मनपा प्रशासन की ओर से दिया जा रहा है और न ही प्रन्यास की ओर से कोई जानकारी उजागर की जा रही है. यहां तक कि इसे भविष्य का मुद्दा बताकर टाल दिया जा रहा है.

सूत्रों के अनुसार योजनाओं पर अमल करते समय विकास करनेवाली एजेंसी की ओर से निधि की दरकार दी जाती है. जिस कार्य के लिए निधि उपलब्ध है, उसे प्राथमिक स्तर पर लेकर विकास करने का डंका पीटा जाता है. लेकिन आश्चर्यजनक यह भी है कि गणेश मंदिर के सामने के पुल को लेकर भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ओर से 226 करोड़ रुपए की निधि मंजूर कराई गई है. यहां तक कि उन्होंने गणेश उत्सव के बाद तुरंत पुल तोड़ने की हिदायत प्रशासन को दी थी. विशेषत: हाल ही में मनपा की सभा में पुन: लाए गए इस प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए वोटिंग तक कराई गई. जिसमें सत्तापक्ष को सफलता हासिल हो गई. मनपा की सभा में प्रस्ताव मंजूर होने को अब एक माह का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है. फिर भी इसे तोड़ने का मुहूर्त नहीं मिलना, आश्चर्यजनक माना जा रहा है.

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