
नासिक: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक BPO यूनिट से जुड़े कथित लैंगिक उत्पीड़न, धार्मिक भावनाएं आहत करने और जबरन धर्मांतरण के मामले में मुख्य आरोपी दानिश एजाज शेख को अदालत से राहत नहीं मिली है। नासिक रोड स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 28 अक्टूबर को आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी पर धर्मांतरण की साजिश रचने, यौन शोषण और जातिगत अपमान समेत विभिन्न गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
यह मामला मार्च 2026 में नासिक के देवलाली कैंप पुलिस थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 156/2026 से संबंधित है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी और दो सह-आरोपियों पर 23 वर्षीय पीड़िता के धर्मांतरण की साजिश रचने का आरोप है।
नमाज, रोजा और पर्दा करने के लिए दबाव डालने का आरोप
अभियोजन के मुताबिक, पीड़िता और आरोपी की पहचान कॉलेज के समय से थी। आरोप है कि आरोपी ने पीड़िता पर धार्मिक प्रथाओं का पालन करने के लिए दबाव बनाया। उसे नमाज पढ़ने, रोजा रखने और पर्दा करने के लिए मजबूर किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
इसके अलावा, आरोपी पर विवाह का आश्वासन देकर और अपनी पूर्व शादी की जानकारी छिपाकर पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाने का आरोप है। मामले में धर्मांतरण की कथित साजिश और जातिगत अपमान से जुड़े आरोप भी शामिल हैं।
बचाव पक्ष ने सहमति से संबंध होने का दिया तर्क
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दावा किया कि आरोपी और पीड़िता वर्ष 2022 से सहमति से संबंध में थे। बचाव पक्ष ने जांच पूरी होने और आरोपी के सात महीने से अधिक समय से हिरासत में रहने का हवाला देते हुए जमानत देने की मांग की।
बचाव पक्ष की ओर से यह भी दलील दी गई कि मामले के दो अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। हालांकि, सरकारी पक्ष और पीड़िता ने आरोपी की जमानत का विरोध किया।
WhatsApp चैट और अन्य साक्ष्यों पर अदालत ने किया विचार
सुनवाई के दौरान अदालत ने जब्त दस्तावेजों, धार्मिक पुस्तकों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया। बचाव पक्ष की ओर से पेश की गई WhatsApp चैट की प्रामाणिकता स्थापित नहीं होने का भी उल्लेख किया गया।
अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए माना कि साक्ष्य केवल सहमति से चले प्रेम संबंध की ओर संकेत नहीं करते। आरोपी द्वारा पीड़िता पर कथित रूप से दबाव बनाए जाने से जुड़ी परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा गया।
पीड़िता ने जताया जान और सुरक्षा को खतरा
पीड़िता ने अदालत में आरोपी की रिहाई का विरोध करते हुए अपनी जान और सुरक्षा को खतरा होने की आशंका जताई। पीड़िता की ओर से एडवोकेट मिलिंद कुरकुटे ने अदालत में पक्ष रखा।
सभी पक्षों की दलीलें और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी दानिश एजाज शेख की जमानत याचिका खारिज कर दी।
मामले की जांच के लिए SIT का गठन
इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी मामले से जुड़े कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम (POSH) कानून के अनुपालन और कथित गंभीर खामियों को लेकर मुद्दे उठाए थे।
मामले के सामने आने के बाद TCS ने आरोपी कर्मचारियों को निलंबित कर आंतरिक जांच शुरू की थी। धर्मांतरण, यौन शोषण और कार्यस्थल पर उत्पीड़न से जुड़े आरोपों की जांच विभिन्न स्तरों पर की जा रही है।



