Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!
    | | Contact: 8407908145 |
    Published On : Thu, Aug 30th, 2018
    nagpurhindinews / News 2 | By Nagpur Today Nagpur News

    देश की सबसे बड़ी ट्रेन रॉबरी, सुलझाने के लिए लेनी पड़ी नासा की मदद

    पूरे 730 दिन लगे. 2 हजार लोगों से पूछताछ की गई. लाखों कॉल डिटेल खंगाली गई. और आखिर में नासा से मदद ली गई. तब जाकर पता चला कि हिंदुस्तान की अब तक की सबसे बड़ी ट्रेन रॉबरी किसने की थी? 8 अगस्त 2016 को तमिलनाडु के सेलम से चेन्नई जाने वाली पैसेंजर ट्रेन में 342 करोड़ रुपये ले जाए जा रहे थे. पैसों की हिफाजत के लिए बोगी में हथिय़ारों से लैस 18 पुलिस वाले भी मौजूद थे. मगर फिर भी ट्रेन में डाका पड़ गया. अब दो साल बाद पुलिस ने दावा किया है कि द ग्रेट ट्रेन रॉबरी के केस को सुलझा लिया गया है.

    8 अगस्त 2016, सेलम रेलवे स्टेशन, तमिलनाडु
    दो साल पहले तमिलनाडु के सेलम रेलवे स्टेशन से सेलम चेन्नई इग्मोर एक्सप्रेस ट्रेन चेन्नई के लिए रवाना हुई. पैसेंजर ट्रेन की दो रिज़र्व बोगियों में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई के 342 करोड़ रुपये रखे थे. जिसकी हिफाज़त के लिए 18 पुलिसवाले तैनात थे. मगर जब तक ट्रेन सेलम से विरधाचलम का 140 किमी. का सफर पूरा करती, तब तक ट्रेन में डाका पड़ चुका था. लुटेरे बोगी में करीब दो फीट का छेद कर 5.78 करोड़ रुपये ले उड़े.

    हर कोशिश नाकाम
    पहले रेलवे पुलिस. फिर लोकल पुलिस ने मामले की जांच की. मगर चोरी इस तरह फिल्मी अंदाज़ में की गई थी कि पुलिस को कुछ समझ नहीं आया. लिहाज़ा मामला सीबी-सीआईडी की स्पेशल टीम को सौंप दिया गया. टीम पूरे 2 साल तक छानबीन करती रही. करीब 2 हजार लोगों से पूछताछ की. तमाम पहलुओं को खंगाल डाला. रेलवे कर्मियों से लेकर पार्सल कंपनी के कर्मचारियों तक का कच्चा चिट्ठा खोला गया. मगर नतीजा सिफर रहा.

    आईटी एक्सपर्ट की मदद से मिला पहला सुराग
    हर तरफ से हार कर आखिर में स्पेशन सेल ने ब्रह्मास्त्र चलाया और मामले को सुलझाने के लिए आईटी एक्सपर्ट्स की मदद ली. तब टीम के हाथ लगा पहला सुराग. दरअसल स्पेशल सेल ने सेलम से चेन्नई के बीच ट्रेन चलते वक्त जितने भी मोबाइल नंबर एक्टिव थे. उनको खंगाला तो उनमें से चार-पांच मोबाइल नंबर संदिग्ध मिले. उन संदिग्ध मोबाइल नंबरों में कुछ समानता पाई गई. जब इन नंबरों की जांच की गई तो पता चला कि ये सभी नंबर मध्य प्रदेश की एक ही जगह के हैं.

    अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा से ली मदद
    मगर सवाल ये था कि ये कैसे तय हो कि इन्हीं लोगों ने ट्रेन में डाका डाला है. लिहाज़ा अब मामले को सुलझाने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की मदद ली गई. और इस इलाके की सैटेलाइट तस्वीरों के ज़रिए चोरों की तलाश शुरू की गई. तब पता चला कि सेलम से विरधाचलम के बीच की इस ट्रेन रॉबरी को 11 लोगों ने मिल कर अंजाम दिया था. पुलिस के लिए ये दोनों ही लीड मामले को सुलझाने में मददगार साबित होने लगी. मोबाइल नंबरों के साथ साथ सेटेलाइट तस्वीरों से ये साफ हो गया कि ट्रेन में डकैती करने वाले डकैत मध्यप्रदेश और बिहार के रहने वाले थे

    पकड़े गए कुछ आरोपी
    हालांकि पुलिस के मुताबिक इस डकैती में रेलवे या पार्सल कंपनी के किसी शख्स के शामिल होने के कोई सबूत नहीं है. इसके बाद कुछ आरोपी पुलिस के हाथ लग चुके हैं. कुछ लगने बाकी हैं. यानी पुलिस मामले को सुलझाने के बेहद करीब है. बस इंतजार है तो सभी आपराधियों के पकड़े जाने का. इसके बाद ही हाल के वक्त की इस सबसे बड़ी ट्रेन रॉबरी की पूरी कहानी हमारे सामने होगी.

    ऐसे हुई देश की सबसे बड़ी ट्रैन रॉबरी

    एक पैसेंजर ट्रेन के दो डिब्बों में भारतीय रिजर्व बैंक के 342 करोड़ रुपए 226 अलग-अलग बॉक्स में रखे थे. दोनों डब्बे पूरी तरह रिजर्व थे और उनके साथ 18 पुलिसवाले भी थे. रात के अंधेरे में करीब 70 किलोमीटर की स्पीड से ट्रेन चली जा रही थी. दो घंटे में 140 किलोमीटर की दूरी तय कर ये तय स्टेशन पर पहंचती है. ये स्टेशन खास है क्योंकि इसी स्टेशन पर ट्रेन से डीजल इंजन को अलग कर उसकी जगह इलैक्ट्रिक इंजन लगाया जाता है. इंजन चेंज होता है और ट्रेन फिर अपनी रफ्तार से आगे बढ़ने लगती है. मगर पांच घंटे बाद जब अगले स्टेशन पर ट्रेन रुकती है तो पता चलता है कि रास्ते में किसी ने नोट से भरे चार बॉक्स लूट लिए हैं.

    ट्रेन में डकैती पड़ी कैसे
    फिल्मों में ऐसे कई सीन आपने देखे होंगे. चलती ट्रेन में डकैती या लूटपाट पर देश-विदेश में अनगिनत फिल्में बनी हैं. द ग्रेट ट्रेन ऱॉबरी पर बनी उन फिल्मों के सीन देख कर कई बार आपके रौंगटे भी खड़े हो गए होंगे. पर ऐसे फिल्मी सीन हकीकत में भी बदल सकते हैं शायद ही किसी ने सोचा हो. दरअसल, इलैक्ट्रिक इंजन लगने से पहले बोगी की छत से सेंध लगाई गई और बोगी की छत काटकर लुटेरे पांच करोड़ की रकम ले उड़े. सब हैरान थे कि तरह भी ट्रेन में रॉबरी हो सकती है?

    9 अगस्त मंगलवार, सुबह 4 बजे, एगनोर रेलवे सटेशन, तमिलनाडु
    ट्रेन जब एग्नोर रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो पहली बार एक रेलवे कर्मचारी की नजर इस बोगी के छत पर पड़ी. छत में सुराख था. ट्रेन में डाका पड़ चुका था. अब सवाल ये था कि चलती ट्रेन में आखिर डाका कैसे पड़ा? कहां पर पड़ा? और इस तरह डाका डालने वाले वो शातिर लोग कौन हैं? कौन हो सकते हैं?

    छत से आ रही थी रोशनी
    चेन्नई पहुंचने से पहले शायद ट्रेन में पड़ चुके इस डाका का खुलासा भी ना होता. अगर एग्नोर रेलवे स्टेशन पर पुलिसवालों ने बोगी का दरवाजा खोल कर यूंही अंदर का मुआयना न किया होता. उसी दौरान एक अफसर ने देखा कि रात के अंधेरे में भी बोगी के अंदर बाहर से रोशनी आ रही है. इसी के बाद जब एक रेलवे कर्मचारी को बोगी की छत पर भेजा गया तो पता चला कि छत में सेंध मारी जा चुकी है.

    ऐसे हुआ खुलासा
    दरअसल, बोगी की लोहे की छत को किसी वेल्डिंग या गैस मशीन से काटा गया था. चोड़ाई इतनी थी कि एक आदमी आसाना से उस सूराख से बोगी के अंदर आ-जा सकता था. जैसे ही इस बात का अहसास सुरक्षाबलों को हुआ तो हड़कंप मच गया. इसी के बाद जब बोगी में रखे ब़क्स की तलाशी ली गई तो पता चला कि उस बोगी में रखे कुल चार बॉक्स ऐसे थे जिनके साथ छेड़छाड़ की गई है. इनमें से एक तो पूरी तरह खाली था. जबकि बाकी बॉक्स से कुछ नोट निकाले गए थे. बाद में सारे बॉक्स की गिनती की गई तो पता चला कि करीब पांच करोड़ रुपये गायब हैं. यानी लुटेरे अपने साथ पांच करोड़ रुपए ले जा चुके थे. ब़क्स में रखे ज्यादातर नोट हजार, पांच सौ और सौ के थे.


    Stay Updated : Download Our App
    Mo. 8407908145