Published On : Fri, Nov 10th, 2017

विदर्भ में हुई किसान आत्महत्याओं की राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शर्म की बात – उपराष्ट्रपति


नागपुर:
राष्ट्रीय स्तर पर विदर्भ में हुई किसान आत्महत्या की चर्चा होना शर्मनाक बात है किस सरकार के कार्यकाल में किसानो की आत्महत्याएं हुई यह भी महत्वपूर्ण नहीं है। दुर्भाग्य है की आजादी के बाद से अब तक किसी भी सरकार ने किसानो की समस्या पर ठीक ढंग से ध्यान ही नहीं दिया। यह बात उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने नागपुर में आयोजित एग्रोविजन कृषि प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर कहीं। किसानो को लेकर सरकारों द्वारा बरती गई असंवेदनशीलता का जिक्र करने के साथ ही उपराष्ट्रपति ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा किसानो के लिए किये जा रहे प्रयासों पर समाधान भी व्यक्त किया।

उपराष्ट्रपति ने संसद की छोटी-छोटी बातों पर फोकस करने वाली मीडिया को भी जनता और किसानो की समस्याओ की तरफ ध्यान देने की नसीहत भी दी। गाँव-गाँव में सड़क पहुँचना आवश्यक है इसलिए ग्राम विकास मंत्री रहते हुए मैंने सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी। सड़क, उत्पादन को भाव और बाज़ार अगर किसानो को मिल गया तो वह किसी सरकार के पास आएंगे ही नहीं, किसान खुद अपने उत्पाद का दाम तय नहीं कर सकते इसलिए सरकार को इस पर गंभीरता से ध्यान देने चाहिए। किसानो का संगठित होना अच्छा है लेकिन उन्हें हिंसक नहीं होना चाहिए। आज किसान का बेटा किसान नहीं बनना चाहता सभी को किसानो की समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रयास करना चाहिए नहीं तो भविष्य में कोई खेती ही नहीं करेगा। उपराष्ट्रपति ने कृषि बजट को बढ़ाने पर भी बल दिया। आज आवश्यकता है की एग्रोविजन जैसी प्रदर्शनी का जगह-जगह आयोजन किया जाये। प्रदर्शनी स्थल से ही उपराष्ट्रपति ने रिमोट के माध्यम से गोसीखुर्द सिंचाई प्रकल्प के अंतर्गत आने वाली नेरला उपसा सिंचन योजना और जलमार्ग का भी उद्घाटन किया।


2019 तक गोसीखुर्द प्रकल्प होगा पूरा- गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने विदर्भ के लिए अहम गोसीखुर्द सिंचाई परियोजन को वर्ष 2019 तक पूरा कर लिए जाने का भरोषा दिलाया। गडकरी ने कहाँ अगर पानी की समस्या को सुलझा लिया जाता है तो किसान आत्महत्या नहीं होगी। इस दिशा में राज्य सरक़ार सराहनी काम कर रही है। जलयुक्त शिवर योजना सफल रही इसका फायदा किसानो को पहुँचा। आगामी समय में 6 हजार करोड़ की योजना सिर्फ पानी के लिए शुरू की जाने वाली है। देश में नदी जोड़ो योजना की चर्चा अटल जी के कार्यकाल से शुरू थी लेकिन उसका काम अब शुरू हुआ है। गडकरी ने मुख्यमंत्री को कृषि बजट को 24 हजार करोड़ का करने की सलाह भी दी।


कृषि क्षेत्र में राज्य कर रहा प्रगति – मुख्यमंत्री

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहाँ की एक समय राज्य क्रषि के क्षेत्र में पिछड़ा था लेकिन अब विभिन्न योजना के शुरू होने की वजह से कृषि विकास की दर साढ़े बारह प्रतिशत पर पहुँच गयी है। अनेक सिंचन प्रकल्प सिर्फ मान्यता न मिल पाने की वजह से रुके हुए थे जिनका काम शुरू किया गया है। राज्य के सभी भागों में रुके हुए प्रकल्पो को पूरा किया जायेगा। सरकार किसानो को 365 दिन बिजली देने का प्रयास कर रही है। राज्य में किसानो को बीटी कॉटन लगाने की सलाह यह कहते हुए दी गई थी की इसमें कीटनाशक के छिड़काव की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन यवतमाल में छिड़काव की वजह से किसानो की मौत हो गयी। अब कृषि विभाग पर्यायी व्यवस्था का शोध कर रहा है। एग्रोविजन किसानो के लिए ज्ञान का भंडार है।